वापी,
वापी महानगरपालिका चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। राजनीतिक सरगर्मियों के बीच वार्ड क्रमांक 5 से कांग्रेस के प्रत्याशी एडवोकेट शशांक मिश्रा ने भाजपा के विकास दावों की हवा निकाल दी है। एक विशेष बातचीत में शशांक मिश्रा ने वार्ड की बदहाली और भाजपा के ‘रीलांच’ घोषणा पत्र पर तीखा प्रहार किया।
चूंकि शशांक एक मुखर प्रवक्ता , कानून के जानकार होने के साथ ही कई सामाजिक विषयों पर उन्होंने कानूनी लड़ाइयां सेशन कोर्ट से गुजरात उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ी हैं। आम आदमी पार्टी छोड़ कांग्रेस पार्टी से उम्मीदवारी मिलते ही वार्ड -5 में माहौल केवल एकतरफा नहीं रहा।
शशांक मिश्रा का कहना है कि जनता अगर मुझे अपना आशीर्वाद देती है तो जनता को मिलने वाली प्राथमिक सुविधाओं को सुलभ करने ने मेरी पहली प्राथमिकता रहेगी। चुनावी मुद्दों के विषय में उनसे खुल कर बात की हमारे ब्यूरो चीफ एम.के कुमार ने , पेश है बातचीत के प्रमुख अंश
प्रश्न: पहला महानगरपालिका चुनाव , इस चुनावी माहौल में आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं?
शशांक : “हमारी राजनीति का आधार बुनियादी समस्याओं का निराकरण करना है। वार्ड-5 की बुनियादी समस्याएं , जैसे कि स्वच्छ पेयजल, सफाई व्यवस्था और जर्जर सड़कों का जाल , मेरी पहली प्राथमिकता हैं। लेकिन, इन सबसे ऊपर ‘पारदर्शिता’ है। मैं चाहता हूँ कि एक आम नागरिक को अपने अधिकार के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, बल्कि उन्हें सम्मान के साथ उनका हक मिले। हम ऐसी व्यवस्था बनाने आए हैं जहाँ सुविधा नागरिक के द्वार पर हो, न कि नागरिक सुविधाओं के लिए संघर्ष करे।”
प्रश्न: अक्सर जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद जनता से ओझल हो जाते हैं, आप इसे कैसे बदलेंगे?
शशांक : “यह सिर्फ वादा नहीं, मेरा संकल्प है। मेरा विजन ‘काम दिखे और निरंतर दिखे’ पर आधारित है। चुनाव जीतना अंत नहीं, जनता की सेवा की शुरुआत है। मैं न केवल जवाबदेही तय करूँगा, बल्कि अपनी पहुंच को भी सुनिश्चित करूँगा। जनता को किसी नेता की नहीं, एक सेवक की जरूरत है, जो उनके बीच 24/7 मौजूद रहे।”
प्रश्न: सत्ता पक्ष का दावा है कि वर्तमान स्थानीय विधायक ( कबीनेट मंत्री) के देखरेख में वापी महानगर पालिका विस्तार के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ी गई है। जैसा कि सर्वविदित है , भाजपा के पास भारी संसाधन और जनता का समर्थन दिखाई पड़ता है, ऐसे में पार्टी और खुद को कहाँ खड़ा देखते हैं?
शशांक : “विकास अगर सिर्फ कागजों और बड़े-बड़े मंचों पर दिखता है, तो उसे ‘विकास’ नहीं, ‘पब्लिसिटी’ कहते हैं। भाजपा के पास संसाधन और समर्थन हो सकता है, लेकिन जनता के बीच ‘विश्वास’ की कमी है। अगर विकास वाकई हुआ होता, तो आज वार्ड-5 की गलियां और नाले बदहाली की दास्तां नहीं सुना रहे होते। मैं खुद को सत्ता के संसाधनों के खिलाफ नहीं, बल्कि उस ‘जमीनी हकीकत’ के साथ खड़ा देखता हूं जिसे भाजपा के नेता पिछले कई सालों से नजरअंदाज कर रहे हैं। मेरा समर्थन मेरी जनता है, और मुझे गर्व है कि मैं उनके संघर्ष का हिस्सा हूँ।”


प्रश्न: आपने भाजपा के घोषणा पत्र को ‘पुराने वादों का रीलांच’ करार दिया है, क्यों?
शशांक : “भाजपा का घोषणा पत्र पुराने वादों की एक नई ‘पैकेजिंग’ मात्र है। कंटेंट वही पुराना और अधूरा है। जनता पिछले चुनाव के वादों का हिसाब मांग रही है, और भाजपा बिना कोई जवाब दिए फिर से नए सपने बेच रही है। हकीकत यह है कि जहाँ जमीन पर काम नजर आना चाहिए था, वहाँ सिर्फ होर्डिंग, पब्लिसिटी और शोर-शराबा है।”
प्रश्न: इस बार जनता का मूड कैसा देख रहे हैं?
शशांक : “वापी की जनता अब बहुत जागरूक हो चुकी है। अब जुमलों और मार्केटिंग के झांसे में कोई नहीं आने वाला। आज हर गली-मोहल्ले से एक ही सवाल उठ रहा है ‘पिछले वादों का क्या हुआ?’ और भाजपा के पास इसका कोई तर्कसंगत जवाब नहीं है। जनता अब पब्लिसिटी नहीं, परिणाम चाहती है।”
प्रश्न: कांग्रेस का एजेंडा भाजपा से कितना अलग है?
शशांक : “हमारे लिए घोषणा पत्र महज कागज़ का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। भाजपा ने विकास की इस जिम्मेदारी के साथ खिलवाड़ किया है। हम सिर्फ वादे नहीं, एक ठोस ‘एक्शन प्लान’ लेकर जनता के बीच हैं। भाजपा के पास अधूरे वादों का बोझ है, जबकि कांग्रेस के पास वापी के भविष्य को बदलने का स्पष्ट रोडमैप।”
एडवोकेट शशांक मिश्रा के इस तीखे तेवरों ने वार्ड-5 के चुनावी समीकरणों को रोचक बना दिया है। देखना यह है कि जनता इस बार ‘जुमलों’ और ‘जवाबदेही’ के बीच किसे चुनती है।
