गोदा से नर्मदा जलयात्रा का संदेश, अगली पीढ़ी को सूखा का सामना न करना पड़े – राधाकृष्ण विखे पाटिल

जा. न्यूज़ संवाददाता
मुंबई। मराठा–मालवा साम्राज्य की महारानी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्र्यंबकेश्वर और चौंडी से शुरू हुई गोदावरी से नर्मदा की जल यात्रा का बुधवार को समापन हो गया। यह तीर्थयात्रा मंदिर जीर्णोद्धार, घाटों और कुओं के निर्माण, लघु सिंचाई को बढ़ावा देने और जल संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता की अहिल्याबाई होल्कर की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास माना जा रहा है। राज्य के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे–पाटिल कहते है कि इसका मकसद जल संवर्धन के प्रति आगाह करना है जिससे अगली पीढ़ी को सूखे की समस्या का सामना न करना पड़े।
राधाकृष्ण विखे पाटिल ने बातचीत में कहा कि महाराष्ट्र को सूखा–मुक्त बनाने के लिए जनभागीदारी बेहद जरूरी है। वर्ष 2026 अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती का वर्ष है, जिनका जल संरक्षण, मंदिरों के पुनर्निर्माण और सामाजिक कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जल यात्रा के माध्यम से उनके द्वारा बनवाए गए डेढ़ हजार से अधिक तालाबों, कुओं के संवर्धन की योजना है। इसलिए उनके संदेश को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 2027-28 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेला में जल संरक्षण और स्वच्छता का विशेष संदेश दिया जाएगा। वहीं, जल विवादों पर उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच पानी के मुद्दे कानून से नहीं, बल्कि आपसी समझ और सामूहिक बुद्धिमत्ता से सुलझाए जाने चाहिए। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों को मिलकर समाधान निकालना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि गर्मी के दौरान जल यात्रा का उद्देश्य लोगों को पानी के महत्व का एहसास कराना है, ताकि वे जल संरक्षण के लिए सक्रिय रूप से आगे आएं।
12 ज्योतिर्लिंग में से एक त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ स्थल से पवित्र जल कुंभ के साथ 25 अप्रैल को गोदावरी से नर्मदा की जल यात्रा निकली थी जिसे मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने रवाना किया था। बुधवार को महेश्वर पहुंचने पर राधाकृष्ण विखे पाटिल ने गोदावरी के अलावा राज्य की 30 से अधिक नदियों के जल कलश को नर्मदा नदी में प्रवाहित किया। इस पांच दिवसीय गोदा–नर्मदा जल यात्रा के दौरान भीषण गर्मी के बीच पाटिल ने लोगों को जलवायु परिवर्तन और जल संरक्षण का संदेश दिया। जल यात्रा के जरिए जल संवर्धन का संदेश देश में संभवतः पहली बार हुआ है। महाराष्ट्र में जल संरक्षण और संवर्धन के इस प्रयास के अलावा सरकार नदी जोड़ परियोजनाओं पर भी काम कर रही है, जिससे जल संचयन और भूजल स्तर में सुधार होगा।
