राजनीति में जब निष्ठा पर सवाल उठने लगें और मेहनत की जगह गुटबाजी लेने लगे, तो एक समर्पित कार्यकर्ता का टूटना लाजिमी है। कुछ ऐसा ही मंजर गुजरात ‘आप’ (AAP) में देखने को मिल रहा है, जहाँ वलसाड और डांग के लोकसभा इंचार्ज डॉ. राजीव पांडेय ने एक बेहद भावुक पत्र लिखकर संगठन के भीतर चल रही उठापटक को उजागर किया है।
पत्रकार वार्ता में डॉ. पांडेय ने उमरगांव, धरमपुर और कपराडा जैसे क्षेत्रों का हवाला देते हुए कहा कि
वहाँ के स्थानीय पदाधिकारी संगठन का काम करने के बजाय दूसरों के काम में अड़ंगे डाल रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ नेता पार्टी के प्रति नहीं, बल्कि विशेष व्यक्तियों (जैसे चैतर वसावा) के प्रति समर्पित होकर काम कर रहे हैं, जिससे जमीनी कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
डॉ पांडे कहते हैं, यह पत्र केवल एक इस्तीफा नहीं, बल्कि उन हज़ारों कार्यकर्ताओं की आवाज है जो पर्दे के पीछे रहकर काम तो करते हैं, लेकिन गुटबाजी का शिकार हो जाते हैं।
‘आप’ में अंतर्कलह का फायदा क्या उठाएगी कांग्रेस? डॉ. राजीव पांडेय के इस्तीफे के बाद वलसाड-डांग में बड़े उलटफेर के आसार
गुजरात की राजनीति में ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में उभरी आम आदमी पार्टी के लिए दक्षिण गुजरात से एक परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। लोकसभा इंचार्ज (वलसाड एवं डांग) डॉ. राजीव पांडेय द्वारा पार्टी के पदों से मुक्ति की मांग ने ‘आप’ के भीतर की गुटबाजी को उजागर किया है।
जमीनी हकीकत माने तो बीजेपी विरोधी के तौर पर राजीव पांडे तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं। चूंकि वलसाड और डांग जैसे क्षेत्रों में कांग्रेस का अभी भी एक मजबूत आधार है। डॉ. पांडेय जैसे नेता का साथ मिलना कांग्रेस के लिए दक्षिण गुजरात में ‘संजीवनी’ जैसा साबित हो सकता है।डॉ. पांडेय के पास जमीनी स्तर पर काम करने का गहरा अनुभव है। कांग्रेस को वर्तमान में गुजरात में ऐसे चेहरों की तलाश है जो कैडर को फिर से जीवित कर सकें
कांग्रेस में जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ‘आप’ के कई पुराने कार्यकर्ता मूल रूप से भाजपा विरोधी और समावेशी राजनीति के समर्थक रहे हैं, जो वैचारिक रूप से कांग्रेस के करीब बैठते हैं , तो इसमें मुझ जैसे नेता और कार्यकर्ता के लिए आसान हो होगा।
