
मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे की मिसिंग लिंक परियोजना से तेजी से विकसित होगी तीसरी मुंबई

सीएम फडणवीस ने किया उद्घाटन
जा. न्यूज़ संवाददाता
मुंबई। मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर ‘मिसिंग लिंक‘ परियोजना विस्तारित मुंबई महानगरीय क्षेत्र (एमएमआर) के लिए एक गेम–चेंजर साबित होने वाली है, जिससे तीसरी मुंबई के रुप में उभरते इस क्षेत्र में रियल एस्टेट की संभावनाओं को काफी बढ़ावा मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी, यात्रा के समय में कमी और लोगों की बदलती प्राथमिकताओं के कारण नवी मुंबई से सटे कर्जत, नेरल और लोनावला जैसे क्षेत्र तेजी से विकसित होंगे और तीसरी मुंबई के विस्तार में तेजी आएगी।
मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर बना ‘मिसिंग लिंक’ केवल एक सड़क नहीं, बल्कि भारतीय इंजीनियरिंग कौशल का वैश्विक स्तर पर अद्वितीय नमूना है। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने बताया कि इस परियोजना में भारत सहित सात देशों का सहयोग मिला जो अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का अनोखा उदाहरण है। इस परियोजना में भले ही 7,181 करोड़ रुपए खर्च हुए लेकिन इससे राज्य में 70 हजार करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था का मॉडल तैयार हुआ है।
सात देशों के सहयोग से मिसिंग लिंक बना कनेक्टिविटी लिंक
मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे के मिसिंग लिंक का मूल डिजाइन कनाडा में तैयार हुआ, फोर्स टेक्नोलॉजी कोपनहेगन डेनमार्क में बना और वहां पर विंड टेस्ट किया गया। केबल की जांच ऑस्ट्रिया के विएना विद्यापीठ में किया गया जबकि उत्पादन मेसर्स किस वायर मलेशिया की कंपनी ने किया। सड़क सुरक्षा के उपकरण आस्ट्रिया और गोदरेज ने संयुक्त रुप से तैयार किया। स्पेन की कंपनी एपोस्लैपस्पेन ने फायर जांच की। पुल का आरेखन ताइवान की कंपनी ने तैयार किया जबकि वेरिफिकेशन कंसल्टंट आस्ट्रिया की कंपनी का था। वहीं, केबल एक्सपर्ट सिंगापुर के थे। आपत्कालीन दूरध्वनी, तीन सौ मीटर पर सुरंग को जोड़ने वाले कनेक्टर, 24 घंटे सीसीटीवी नियंत्रण कक्ष है। लेन के लिए इंटेलिजेंट मैनेजमेंट सिस्टम है।
छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1661 में यही लड़ी थी उंबरखिंड की लड़ाई
इस परियोजना का एक ऐतिहासिक तथ्य यह भी है कि 1661 में छत्रपति शिवाजी महाराज ने कारतलब खान के घेरे को तोड़ने के लिए उंबरखिंड की लड़ाई यहीं पर लड़ी थी। यहां एक विजय स्तंभ इसका सबूत है। इसी घाटी में लाखों मुगल सैनिकों को पांच हजार मावले ने धूल चटाई थी। फडणवीस ने बताया कि इस परिसर में लोहगढ़, बीसापुर तिकोना तुंग किले हैं तो बौद्ध कालीन स्तूप भी हैं। इससे अब मुंबई–पुणे क्वांटम कोरिडोर बनाना संभव हो सकेगा। इसलिए इसे मिसिंग लिंक नहीं कनेक्टिविटी लिंक कहना उचित होगा।
परियोजना की मुख्य विशेषताएंः
कुल लंबाई: लगभग 19.16 किमी, 2 अत्याधुनिक सुरंगें (लंबाई 1.58 किमी और 8.86 किमी) , 23मीटर चौड़ी सुरंग—विश्व की सबसे चौड़ी, टाइगर वैली में 650 मीटर लंबा केबल–स्टेड ब्रिज,पुल की ऊंचाई लगभग 125 मीटर,आधुनिक सुरक्षा और ट्रैफिक सिस्टम।
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