‘हर घर दस्तक’ के जरिए जुटाई जा रही मदद
“जागरण न्यूज “करता है ऐसे निस्वार्थ संस्थाओं की सेवा में भावुक अपील , इस सेवा में यथा संभव सहायता करें।
देवदूत वानर सेना एक ऐसा सेतु है जो समाज के संपन्न लोगों और उन बेबस परिवारों के बीच खड़ा है जो बीमारी की मार झेल रहे हैं। इनके प्रयास “मानवता ही सर्वोपरि है” के संदेश को धरातल पर उतारते हैं।
जौनपुर,
“नर सेवा ही नारायण सेवा है” के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए ‘देवदूत वानर सेना’ ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। संस्था ने जौनपुर के कठौरा गांव की रहने वाली एक बेबस मां, संगीता देवी की पुकार पर उनके बेटे जगदम्बा के जीवन को बचाने के लिए एक बड़ा अभियान ‘मिशन जौनपुर’ शुरू किया है।
बदलापुर तहसील अंतर्गत कठौरा निवासी जगदम्बा वर्तमान में गंभीर किडनी रोग से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए तत्काल किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी है। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय होने के कारण वे इलाज का भारी-भरकम खर्च वहन करने में पूरी तरह असमर्थ हैं। ऐसे में जगदम्बा की माता संगीता देवी ने नम आंखों से समाज और मददगारों से अपने बेटे के जीवन की गुहार लगाई है.
देवदूत वानर सेना के कार्यकर्ताओं ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए ‘हर घर दस्तक’ अभियान शुरू किया है। संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि कोई भी योगदान छोटा नहीं होता। उन्होंने समाज के हर वर्ग से अपील की है कि वे अपनी सामर्थ्य अनुसार 100, 200, 500 या 1000 रुपये की छोटी-छोटी मदद देकर एक युवक को नया जीवन देने में सहभागी बनें।
जानिए क्या है ” देवदूत वानर सेना (वानर देवदूत मानवता संरक्षण समिति)”
देवदूतवानर सेना (वानर देवदूत मानवता संरक्षण समिति) उत्तर प्रदेश, विशेषकर लखनऊ और जौनपुर के क्षेत्रों में सक्रिय एक सामाजिक संगठन है। यह संस्था मुख्य रूप से उन लोगों की मदद के लिए जानी जाती है जो आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर हैं और गंभीर बीमारियों के इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं।
संस्था का प्राथमिक लक्ष्य “चिकित्सा सहायता” प्रदान करना है। इनका मानना है कि धन के अभाव में किसी की जान नहीं जानी चाहिए। यह संगठन विशेष रूप से उन मामलों को उठाता है जहाँ मरीज को किडनी ट्रांसप्लांट, कैंसर का इलाज या मेजर सर्जरी की जरूरत होती है।
संस्था की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता उनका ‘हर घर दस्तक’ अभियान है।
कार्यकर्ता आम जनता के बीच जाते हैं और मरीज की स्थिति के बारे में बताते हैं।वे लोगों से बहुत छोटी राशि (जैसे ₹10, ₹50 या ₹100) दान करने की अपील करते हैं।इस “क्राउडफंडिंग” मॉडल के जरिए वे लाखों रुपये जमा कर लेते हैं, जिससे गरीब मरीजों का इलाज संभव हो पाता है।
संरक्षक अजीत सिंह सोशल मीडिया पर अभियान चलते हैं, कहते हैं , संस्था किसी एक क्षेत्र या व्यक्ति के लिए विशेष ‘मिशन’ चलाती है, जैसे आपके द्वारा साझा की गई तस्वीर में ‘मिशन जौनपुर’ का उल्लेख है। यह मिशन किसी विशेष जिले के मरीजों पर केंद्रित होता है ताकि स्थानीय लोग अपने क्षेत्र के व्यक्ति की मदद के लिए प्रेरित हों।
देवदूत वानर सेना सोशल मीडिया (Facebook, WhatsApp) का प्रभावी ढंग से उपयोग करती है। वे:मरीज के परिवार, उनके घर की स्थिति और डॉक्टर के पर्चे साझा करते हैं ताकि दानदाताओं को विश्वास हो सके।
सीधे परिवार के सदस्यों या संस्था के बैंक विवरण साझा किए जाते हैं ताकि मदद सीधे जरूरतमंद तक पहुँचे।यह संगठन न केवल आर्थिक मदद पहुँचाता है, बल्कि युवाओं को समाज सेवा से जोड़ने का कार्य भी कर रहा है। “वानर सेना” नाम यह दर्शाता है कि जिस तरह रामायण में छोटी-छोटी गिलहरियों और वानरों ने मिलकर बड़ा सेतु बनाया था, उसी तरह आम आदमी के छोटे-छोटे योगदान से किसी का जीवन बचाया जा सकता है।
