
जा.न्यूज़ संवाददाता
मुंबई। उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहा कि जैन समाज ने सेवा, दान, अहिंसा और त्याग के मूल्यों पर आधारित कार्यों के माध्यम से समाज के सामने एक प्रेरणादायी आदर्श स्थापित किया है। उपराष्ट्रपति लोकभवन स्थित दरबार हॉल में आयोजित 64वें जैन दीक्षा समारोह के अवसर पर अपनी भावना व्यक्त की।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैन समाज देशभर में विभिन्न माध्यमों से समाजहित का कार्य कर रहा है और सेवा ही जैन धर्म की पहचान है। 64 लोगों द्वारा दीक्षा ग्रहण करना अत्यंत प्रेरणादायी है, जिससे संयम, सादगी और आध्यात्मिकता का संदेश समाज को मिलता है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर द्वारा दिया गया अहिंसा, अपरिग्रह का संदेश आज के समय में और भी अधिक महत्वपूर्ण है। संवाद, सहिष्णुता और समस्त जीवों के प्रति करुणा के माध्यम से ही शांति और स्थायित्व का मार्ग प्राप्त हो सकता है।
तमिलनाडु और जैन धर्म के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने साहित्य, संस्कृति और ज्ञान संवर्धन में जैन समाज के योगदान की सराहना की और कहा कि जैन दर्शन के जीवनमूल्य आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं।इस कार्यक्रम में राज्यपाल जिष्णूजी देव वर्मा, मुख्यमंत्री देवेंद्रजी फडणवीस, कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगलप्रभात जी लोढा, अध्यात्म परिवार ट्रस्ट के ट्रस्टी बाबूलालजी बंसाली, हितेंद्र माणेकजी, राजेश चंदनजी तथा ट्रस्ट के सदस्य उपस्थित थे।
जैन धर्म का संदेश शांति, संयम और समन्वय का: राज्यपाल जिष्णूजी देव वर्मा

राज्यपाल जिष्णू देव वर्मा ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जैन धर्म के मूल्य मानवता को शांति, समन्वय और संयम का मार्ग दिखाते हैं। आधुनिक जीवनशैली जहां उपभोक्तावाद और इच्छाओं की निरंतर वृद्धि को बढ़ावा देती है, वहीं भारतीय संस्कृति ने हमेशा सादगी, संयम और त्याग को महत्व दिया है।
उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में विभिन्न क्षेत्रों के लोग दीक्षा का मार्ग अपना रहे हैं, जो अत्यंत प्रेरणादायी है। भगवान महावीर के मार्ग पर चलते हुए जैन आचार्यों ने भारतीय संस्कृति को चिरस्थायी मूल्यों से समृद्ध किया है।
प्राचीन मंदिरों के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए जैन समाज आगे आए: मुख्यमंत्री देवेंद्रजी फडणवीस

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के प्राचीन मंदिरों के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए जैन समाज से आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जैन समाज ने ज्ञान संवर्धन के साथ-साथ प्राचीन धरोहरों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि लगभग सात करोड़ प्राचीन हस्तलिखितों का संरक्षण और संवर्धन तथा प्राचीन जैन मंदिरों की सुरक्षा का कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि विचारों में भी अहिंसा होनी चाहिए—यह संदेश जैन दर्शन देता है। आज के भौतिक जीवन में सब कुछ त्यागकर दीक्षा लेना अत्यंत दृढ़ संकल्प का कार्य है। जैन समाज ने देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ दान-पुण्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
समाज में एकता और समरसता के लिए जैन धर्म के विचार प्रेरणादायी: कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात जी लोढा

कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढा ने कहा कि दरबार हॉल में आयोजित दीक्षा स्मरण कार्यक्रम ऐतिहासिक है। भगवान महावीर के अहिंसा, अपरिग्रह और जीवदया के सिद्धांतों का पालन करने का हम प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज के तेज़ रफ्तार जीवन में जैन धर्म संयम, शांति और नैतिकता का मार्ग दिखाता है। समाज में एकता और समरसता स्थापित करने में जैन धर्म के विचार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे हमेशा जैन समाज के प्रति सम्मान का भाव रखते हैं। जैन समाज की सेवा और त्याग की परंपरा पूरे राष्ट्र के लिए गर्व की बात है।

इस अवसर पर जैन समाज की प्रगति में योगदान देने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया गया। भगवान महावीर जयंती के उपलक्ष्य में ‘अष्ट द्रव्य’ के रूप में जैन पूजा सामग्री की प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसका अवलोकन मान्यवरों ने किया।
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