
राज्य में कौशल विकास के लिए नया अध्याय : मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा
तीन ऐतिहासिक समझौतों से राज्य के युवाओं को मिलेंगे वैश्विक स्तर के अवसर
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में तीन सामंजस्य समझौतों पर हस्ताक्षर
जा. न्यूज़ संवाददाता
मुंबई। नए युग के उद्योग, व्यवसाय और कौशल विकास के क्षेत्र में दक्षिण कोरिया ने वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। महाराष्ट्र और दक्षिण कोरिया के बीच हुए सहयोग समझौतों के माध्यम से कोरिया की उत्कृष्ट कौशल प्रणाली और उन्नत तकनीक भारत में आएगी, जिसका सीधा लाभ भारतीय विद्यार्थियों को मिलेगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इससे राज्य में कौशल विकास के क्षेत्र में नया आयाम जुड़ेगा।
महाराष्ट्र सरकार के सरकारी सह्याद्री अतिथिगृह में कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग के अंतर्गत व्यवसाय शिक्षा एवं प्रशिक्षण संचालनालय तथा दक्षिण कोरिया के कोरिया पॉलिटेक्निक्स, महाराष्ट्र राज्य कौशल विकास संस्था और दक्षिण कोरिया के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर लाइफलॉन्ग एजुकेशन, रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय तथा दक्षिण कोरिया की प्रतिष्ठित संस्थाओं की दो शाखाओं के बीच कुल तीन सामंजस्य समझौतों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इन समझौतों के माध्यम से बुनियादी औद्योगिक कौशल से लेकर उच्च स्तरीय उन्नत कौशल तक सभी स्तरों पर प्रशिक्षण को बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, विभाग की अपर मुख्य सचिव मनीषा वर्मा, मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्र, व्यवसाय शिक्षा एवं प्रशिक्षण संचालनालय के संचालक डॉ. सतीश सूर्यवंशी, रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. अपूर्वा पालकर, केंद्र सरकार के डायरेक्टर जनरल ट्रेनिंग दिलीप कुमार, नेशनल स्किल इंस्टीट्यूट के प्रादेशिक संचालक सी.एस. मूर्ति, महाराष्ट्र राज्य नवाचार सोसायटी के आयुक्त डॉ. अमित सैनी, मुंबई शहर की जिलाधिकारी आंचल गोयल तथा कोरिया गणराज्य के प्रतिनिधिमंडल में कोरिया एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (KAIST) के डॉ. स्युंग हुन हान, कोरिया पॉलिटेक्निक्स की डॉ. यंगआह कांग, नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर लाइफलॉन्ग एजुकेशन (NILE) की सुश्री मिन-सिऑन पार्क सहित KRIVET, KEIS और NexIN Technology के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित थे।

युवा वर्ग भारत की ताकत
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भारत की जनसंख्या और युवा पीढ़ी की नवाचार क्षमता का उपयोग देश के विकास के लिए करने हेतु कौशल विकास विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। भारत को विशाल भौगोलिक और जनसंख्या का लाभ प्राप्त है। देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और यही वर्ग हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इस वर्ग की नवाचार क्षमता को ‘मानव संसाधन’ में परिवर्तित करना हमारा मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन है। राज्य की अर्थव्यवस्था वर्तमान में 660 अरब डॉलर की है और इसे जल्द ही 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को सभी स्तरों पर उत्कृष्ट कौशलयुक्त मानव संसाधन की आवश्यकता है। यह अंतरराष्ट्रीय कौशल समझौता महाराष्ट्र की आर्थिक प्रगति को नई गति देगा। यह समझौता केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल्द ही इसे व्यवहार में उतारा जाएगा। इस ऐतिहासिक सहयोग से उद्योगों को कुशल मानवबल मिलेगा और भारतीय युवाओं के लिए वैश्विक स्तर पर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

राज्य में कौशल विकास के लिए नया अध्याय : मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा
मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने कहा कि महाराष्ट्र के युवाओं को वैश्विक स्तर का कौशल, आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय रोजगार अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में ये समझौते अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। दक्षिण कोरिया की अग्रणी संस्थाओं के साथ यह साझेदारी राज्य की कौशल विकास व्यवस्था को नई मजबूती देगी। उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित, तकनीक-स्नेही और नवाचार आधारित मानव संसाधन तैयार करने के लिए महाराष्ट्र सरकार प्रतिबद्ध है। इस सहयोग से कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग महाराष्ट्र को देश में अग्रणी स्थान दिलाएगा।
दक्ष परियोजना के लिए दक्षिण कोरिया के सहयोग से दो दिवसीय कार्यशाला : अपर मुख्य सचिव मनीषा वर्मा
अपर मुख्य सचिव मनीषा वर्मा ने कहा कि महाराष्ट्र की कौशल विकास व्यवस्था को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने के लिए ‘दक्ष’ पहल और ‘कोरिया-वर्ल्ड बैंक पार्टनरशिप फैसिलिटी’ (KWPF) के अंतर्गत विश्व बैंक का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अनुदान के माध्यम से तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण (DVET) क्षेत्र में स्किल गैप असेसमेंट, आईटीआई विद्यार्थियों का ट्रेसर स्टडी तथा मॉडल आईटीआई जैसी दूरगामी सुधार परियोजनाएं सफलतापूर्वक लागू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि 21-22 मई 2026 को मुंबई में आयोजित यह कार्यशाला भारत सरकार, महाराष्ट्र शासन और दक्षिण कोरिया की अग्रणी कौशल संस्थाओं के विशेषज्ञों को एक मंच पर ला रही है। Korea Polytechnics और KRIVET जैसी वैश्विक संस्थाओं का अनुभव तथा भारतीय उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन हमारी संस्थागत क्षमता को और मजबूत करेगा। ‘विकसित भारत 2047’ और ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए DVET प्रणाली का सशक्तीकरण ही मुख्य आधार बनेगा।

डीवीईटी और कोपो की साझेदारी से महाराष्ट्र में स्थापित होगा ‘लर्निंग फैक्टरी’ मॉडल
राज्य सरकार के व्यवसाय शिक्षा एवं प्रशिक्षण संचालनालय और दक्षिण कोरिया के Korea Polytechnics के बीच हुआ समझौता तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस समझौते के अंतर्गत कोरिया के प्रसिद्ध ‘लर्निंग फैक्टरी’ मॉडल पर आधारित उन्नत प्रशिक्षण केंद्र महाराष्ट्र में स्थापित किए जाएंगे। ये केंद्र उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप अत्याधुनिक तकनीक और प्रायोगिक प्रशिक्षण पर आधारित होंगे। KOPO इस परियोजना में मुख्य भागीदार के रूप में कार्य करेगा। आवश्यकता अनुसार KT, KITECH और KATECH जैसी कोरियाई तकनीकी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाएगा। मई से सितंबर 2026 के दौरान इन केंद्रों के लिए रणनीतिक मैन्युअल तैयार किया जाएगा तथा मार्च 2027 से जून 2028 के बीच इन्हें पूर्ण क्षमता से संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन केंद्रों में अत्याधुनिक मशीनरी, उद्योग आधारित पाठ्यक्रम और प्रशिक्षित प्रशिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

एमएसएसडीसी और एनाइएलई के समझौते से महाराष्ट्र में ‘लाइफलॉन्ग लर्निंग’ को मिलेगा प्रोत्साहन
महाराष्ट्र राज्य कौशल विकास संस्था (MSSDS) और दक्षिण कोरिया के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर लाइफलॉन्ग एजुकेशन (NILE) के बीच हुआ समझौता राज्य में सतत शिक्षा और कौशल उन्नयन को नई दिशा देगा। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य महाराष्ट्र के लिए ‘लाइफलॉन्ग लर्निंग’ अर्थात आजीवन शिक्षा और कौशल विकास की व्यापक नीति तैयार करना है। बदलती तकनीक और रोजगार आवश्यकताओं के अनुसार युवाओं और कर्मचारियों को निरंतर नए कौशल सीखने के लिए डिजिटल शिक्षा और प्रमाणन प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके अंतर्गत राज्य के लिए ‘लाइफलॉन्ग लर्निंग पॉलिसी फ्रेमवर्क’ और उसका संचालन मैन्युअल तैयार किया जाएगा। अपस्किलिंग और रिस्किलिंग के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर उद्योग और शिक्षा क्षेत्र के बीच की दूरी कम करने का प्रयास किया जाएगा। जनवरी 2027 से जून 2028 के बीच इन कार्यक्रमों को लागू किया जाएगा।
आरटी-एमएसएसयू और केएआईएसटी की साझेदारी से अनुसंधान एवं उच्च शिक्षा को वैश्विक अवसर
रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय (RT-MSSU) और दक्षिण कोरिया की प्रतिष्ठित KAIST संस्था की दो शाखाओं के बीच हुआ समझौता महाराष्ट्र के उच्च शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। KAIST-GGGS और KAIST-GDI के साथ हुई इस साझेदारी का मुख्य केंद्रबिंदु सतत विकास और डिजिटल नवाचार है।
इस समझौते के तहत रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय के चयनित प्राध्यापक, कर्मचारी और पूर्व विद्यार्थी KAIST में मास्टर्स और पीएचडी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। शिक्षा पूर्ण करने के बाद ये विशेषज्ञ महाराष्ट्र लौटकर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और अनुसंधान क्षमता को और सशक्त बनाएंगे। दोनों संस्थाएं मिलकर ‘जॉइंट रिसर्च सेंटर ऑन ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी’ की स्थापना करेंगी। साथ ही इस दीर्घकालिक साझेदारी की प्रभावी योजना और क्रियान्वयन के लिए ‘जॉइंट स्टीयरिंग कमिटी’ का गठन भी किया जाएगा।
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