राज्य में खुलेंगे दो निजी कौशल विश्वविद्यालय

स्थानीय विद्यार्थियों के लिए 60 प्रतिशत सीटें आरक्षित
आधुनिक कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए नए विश्वविद्यालयों को मंजूरी: कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा
जा. न्यूज़ संवाददाता
मुंबई। महाराष्ट्र कौशल विकास और रोजगार सृजन को गति देने के मामले में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ा है। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए निजी कौशल विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक को विधानमंडल के दोनों सदनों में पारित किया गया है। इस विधेयक को कल विधान परिषद में मंजूरी दी है।
कौशल विकास व रोजगार मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने बताया कि इसके तहत लातूर और पुणे में दो निजी कौशल विश्वविद्यालय खुलेंगे। इन विश्वविद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को प्राथमिकता देने हेतु 60 प्रतिशत सीटें स्थानीय छात्रों के लिए आरक्षित होगी। लोढा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं को रोजगार देने की योजना को ध्यान में रखते हुए नए युग की अत्याधुनिक कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप इन विश्वविद्यालयों को मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में कौशलयुक्त और रोजगारक्षम महाराष्ट्र का निर्माण करने का लक्ष्य रखा गया है। रोजगारक्षम बनने के लिए आधुनिक कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकता को देखते हुए राज्य में स्ववित्तपोषित आधार पर निजी कौशल विश्वविद्यालयों की स्थापना की नीति अपनाई गई है। इसी के अंतर्गत महाराष्ट्र निजी कौशल विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक लाया गया है।
मंत्री लोढा ने बताया कि लातूर में बांस उत्पादन क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले पाशा पटेल की फीनिक्स फाउंडेशन द्वारा संचालित “पाशा स्किल टेक यूनिवर्सिटी” तथा पुणे में फ्रेंड्स यूनियन फॉर एनर्जाइजिंग लाइव्स (FUEL) संस्था की “फ्यूल स्किल टेक एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी” को मंजूरी दी गई है। निजी विश्वविद्यालयों में आधुनिक पाठ्यक्रम
फ्यूल स्किल टेक एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी में बैंकिंग और फाइनेंस क्षेत्र में डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम, साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल मार्केटिंग से संबंधित कोर्स शुरू किए जाएंगे।
पाशा स्किल टेक यूनिवर्सिटी मुख्य रूप से पर्यावरण संरक्षण से जुड़े आधुनिक पाठ्यक्रम संचालित करेगी। इसमें पर्यावरण और मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं पर आधारित अध्ययन, वन्यजीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और उसके समाधान से जुड़े डिग्री एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम शामिल होंगे। इसके साथ ही मीडिया क्षेत्र में स्किल आधारित प्रशिक्षण जैसे मीडिया मैनेजमेंट, ब्रांडिंग और डिजिटल विज्ञापन के क्षेत्र में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इन निजी कौशल विश्वविद्यालयों के माध्यम से सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार डाले बिना छात्रों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध होंगे। उद्योग और बाजार की बदलती आवश्यकताओं के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार कर कुशल मानव संसाधन तैयार करना संभव होगा। ये विश्वविद्यालय आधुनिक और उद्योगोन्मुख कौशल प्रशिक्षण पर केंद्रित रहेंगे, जिससे ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
मंत्री लोढा ने कहा कि राज्य के युवाओं को वैश्विक स्तर पर कुशल बनाने के लिए ऐसी संस्थाओं की आवश्यकता है। इस निर्णय से कौशल आधारित शिक्षा प्रणाली को मजबूती मिलेगी तथा उद्योग और शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। साथ ही, इन विश्वविद्यालयों के माध्यम से रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।
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