राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की उपस्थित मे होगा महोत्सव का शुभारंभ

दादा जिनदत्तसुरि गुरुदेव चादर महोत्सव समिति के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढा जी ने लिया महोत्सव के आयोजन का जायज़ा
जा. न्यूज़ संवाददाता
जैसलमेर। स्वर्णनगरी जैसलमेर की पावन धरतीपर गच्छाधिपति पूज्य श्री जिनमणिप्रभ सुरिश्वरजी की पावन निश्रा में शुक्रवार को युगप्रधान दादा जिनदत्तसुरि गुरुदेव चादर महोत्सव की उत्साह से शुरुवात होगी। राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवतजी की प्रमुख उपस्थिती में इस महोत्सव का शुभारंभ होगा। इस अवसर पर भारतीय संस्कृति समागम एवं समरसता के पुष्प को आगे बढ़ाते हुए सरसंघचालक भागवतजी उपस्थित समुदाय को सम्बोधित करेंगे।
युगप्रधान दादा जिनदत्तसुरि गुरुदेव चादर महोत्सव ६ मार्च से शुरू होकर ८ मार्च तक चलेगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर युगप्रधान दादा जिनदत्तसूरि गुरुदेव की दिव्य चादर एवं मुँखपट्टी के सार्वजनिक दर्शन एवं आशीर्वाद श्रावकों को प्राप्त होगा। दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि चादर महोत्सव समिति के अध्यक्ष तथा महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री श्री मंगलप्रभातजी लोढ़ा जी ने गुरुवार शाम को महोत्सव के आयोजन तथा तैयारी का जायजा लिया। इस महाआयोजन में देश के कोने कोने से सभी धर्म और पंथ के लगभग २५०० साधु-साध्वियों सहित एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। जहा आध्यात्मिक मंथन होगा।
आयोजन का जायजा लेकर समिति के अध्यक्ष तथा मंत्री लोढ़ा ने कहा की खरतरगच्छाधिपति पूज्य श्री जिनमणिप्रभ सुरिश्वरजी के पावन सान्निध्य में 871 वर्षों बाद युगप्रधान प्रथम दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरी की दिव्य चादर के दर्शन इस पीढ़ी को चादर महोत्सव के माध्यम से प्राप्त होंगे। श्रद्धा, तप एवं त्याग की परंपरा का यह उत्सव सामाजिक बंधुत्व और आस्था का प्रतीक है। देशभर में इस आयोजन को लेकर भारी उत्साह है, और तैयारियां पूरी हो चुकी है, ऐसा भी लोढ़ा जीने कहा ।
दादा जिनदत्तसुरि गुरुदेव चादर महोत्सव समिति के संयोजक संघवी श्री तेजराजजी गुलेच्छा, समायोजक श्री महेन्द्रसिंह भंसाली,समन्वयक श्री प्रकाशचंद लोढ़ा, मंत्री पद्मकुमारजी टाटिया तथा सहमंत्री श्री सुरेश लुनिया इन पदाधिकारियोने भी मंत्री लोढ़ा के साथ आयोजन की तैयारियों का जायजा लेकर सम्मिलित होने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्था सुनिश्चित की है।
जैन श्वेतांबर समुदाय के प्रथम दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरी के 871 वर्ष पूर्व अग्नि संस्कार के समय उनका शरीर भस्म हो गया था, किंतु उनका पवित्र वस्त्र चादर, चोल-पट्टा और मुखपट्टी अक्षत रहे। इसी अद्भुत और पवित्र चादर के पूजन के लिए चादर महोत्सव मनाया जाता है। खरतरगच्छ समुदाय के लिए यह महोत्सव अत्यंत आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। महोत्सव के दौरान दादा गुरुदेव से संबंधित पवित्र चादर, चोल-पट्टा और अन्य ऐतिहासिक धरोहरों का विशेष पूजन, आराधना, प्रवचन, भक्ति कार्यक्रम, ऐतिहासिक 5 किलोमीटर लंबी शोभायात्रा तथा सामूहिक धार्मिक विधियां आयोजित की जाएंगी। यह महोत्सव आध्यात्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा समाज में धर्म, संयम, अहिंसा और सदाचार का संदेश प्रसारित करने वाला है, ऐसा भी मंत्री लोढ़ा ने कहा।
