सीबीएसई के नए नियमों के तहत अब प्राइमरी के बच्चों को रटने की बजाए, समझकर और प्रैक्टिकल तरीके से सीखना होगा। माता-पिता और बच्चों दोनों को नई व्यवस्था के अनुसार तैयारी करनी चाहिए, ताकि बच्चे शिक्षा प्रणाली का पूरा लाभ उठा सकें।
सीबीएसई ने नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत प्राइमरी और अन्य कक्षाओं के लिए पढ़ाई का मॉडल पूरी तरह बदल दिया है। अब बच्चों को रटकर नहीं बल्कि समझकर सीखने पर जोर देना होगा। इसके अलावा प्राइमरी स्तर पर मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं को पढ़ाई का माध्यम बनाया गया है।
प्राइमरी शिक्षा में नए बदलाव
कक्षा प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक पढ़ाई अब मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में होगी, जिससे बच्चों को शिक्षा उनके अपने भाषा-संप्रदाय में समझना आसान होगा।
कक्षा 3 से 5 तक कम से कम एक भारतीय भाषा को पढ़ाई का माध्यम बनाया जाएगा, जिससे बच्चों की समझ, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक जुड़ाव बेहतर होगा।अगर किसी स्कूल में मातृभाषा लागू करना संभव नहीं है तो राज्य भाषा को प्राथमिकता दी जाएगी।
रटने के बजाए समझकर सीखना शिक्षा का फोकस
अब “रटे हुए सवालों” की जगह कॉन्सेप्ट बेस्ड लर्निंग, क्रिटिकल थिंकिंग, प्रोजेक्ट्स, और स्किल डेवलपमेंट पर रहेगा।
बच्चों की रुचि, समझ और प्रैक्टिकल ज्ञान बढ़ाने के लिए स्कूल्स में एक्सपेरिमेंट्स, प्रोजेक्ट्स, फील्ड ट्रिप्स, और केस स्टडी जैसी एक्टिविटी कराई जाएंगी.
कक्षा में एक्टिव पार्टिसिपेशन और प्रोजेक्ट्स पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. सिर्फ़ नंबर लाने की व्यवस्था नहीं रहेगी, सीखने की आदत और कॉन्सेप्ट क्लियर होना जरूरी होगा ।
बोर्ड परीक्षा और असेसमेंट में बदलाव केवल आखिरी दिन तैयारी कर पास नहीं हो पाएंगे, बल्कि 2 साल की नियमित पढ़ाई, प्रोजेक्ट्स, टेस्ट और स्कूल की एक्टिविटी में भागीदारी अनिवार्य है।
नए असेसमेंट सिस्टम में बच्चों की रीजनिंग, एप्लिकेशन और समझ का मूल्यांकन होगा, न कि सिर्फ रटी हुई जानकारी का ।
कंटीन्युअस और कम्प्रेहेंसिव एवालुएशन (CCE) लागू किया जा रहा है जिसमें सालभर बच्चों की प्रगति को ट्रैक किया जाएगा ।
शिक्षक प्रशिक्षण और टेक्नोलॉजी का रोल शिक्षक लगातार नए एजुकेशन मॉड्यूल्स, ट्रेनिंग और डिजिटल उपकरणों से पढ़ाने के लिए प्रेरित किए जा रहे है।
स्मार्ट क्लास रूम्स, वर्चुअल लैब्स और डिजिटल असेसमेंट से बच्चों को रियल-टाइम फीडबैक और एक्टिव लर्निंग मिलेगी।
