भिवंडी महापालिका महापौर चुनाव में बड़ा उलटफेर बीजेपी ने आखिरी समय में बदला उम्मीदवार – कांग्रेस को मिला छुपा हुआ बीजेपी का समर्थन

बीजेपी के नगरसेवकों की बगावत से कांग्रेस का बन सकता है महापौर , क्या है भाजपा की रणनीति
जा. न्यूज़ संवाददाता
मुंबई। भिवंडी- निजामपुर महानगरपालिका के महापौर पद के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने महापौर पद के उम्मीदवार में बदलाव कर सभी को चौंका दिया है।
भाजपा ने इससे पहले नारायण चौधरी को महापौर पद का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया था। नारायण चौधरी ने भाजपा की ओर से महापौर पद के लिए अपना नामांकन पत्र भी दाखिल कर दिया था। लेकिन बुधवार को चुनावी समीकरणों ने अचानक नया मोड़ ले लिया। बीजेपी भिवंडी शहर अध्यक्ष रविकांत सावंत ने महापौर पद के उम्मीदवार के तौर पर स्नेहा मेहुल पाटिल के नाम की घोषणा कर दी। इस संबंध में लिखित पत्र भाजपा शहर अध्यक्ष की ओर से पार्टी के सभी नगरसेवकों को सौंपा गया है।भाजपा शहर अध्यक्ष रविकांत सावंत ने बताया कि अब स्नेहा मेहुल पाटील ही भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका के महापौर पद की भाजपा की आधिकारिक उम्मीदवार होंगी।
महापौर चुनाव से पहले हुए इस बदलाव को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है और इससे भिवंडी की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म मिल गया है।बीजेपी के नाराज नारायण चौधरी ने साफ़ कर दिया है की महायुति की सरकार राज्य में है इसके बावजूद भिवंडी में महापौर नहीं बन सकता है। मैंने कई बार चर्चा भी की लेकिन परिस्तिति साफ़ नहीं हुई , भिवंडी के महपौर पद के लिए भिवंडी सेकुलर पार्टी से भी चर्चा करेंगे।
20 फरवरी को महापौर पद का चुनाव
भिवंडी में 20 फरवरी को महापौर का चुनाव होना है। भिवंडी महानगरपालिका चुनाव में कांग्रेस के 30, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के 12, समाजवादी पार्टी के 6, भारतीय जनता पार्टी के 22, शिवसेना के 12, कोणार्क विकास आघाडी के 4, भिवंडी विकास आघाडी के 4 तथा 1 निर्दलीय नगरसेवक निर्वाचित हुए हैं। भिवंडी महानगरपालिका में कुल 90 नगरसेवक हैं और बहुमत के लिए 46 नगरसेवकों का समर्थन आवश्यक है। कांग्रेस के 30 और बीजेपी के 22 नगरसेवक मिलकर कुल 52 सीटें होती हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 46 है। इसी आधार पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच ढाई-ढाई साल के लिए महापौर पद तथा अन्य महत्वपूर्ण पदों को बारी-बारी से साझा करने का फॉर्मूला तय होने की सूत्रों से जानकारी मिल रही है। सामने आ रही जानकारियों के आधार पर यह माना जा रहा है कि भाजपा के कुछ नगरसेवकों का एक समूह कांग्रेस को समर्थन दे सकता है, जिसके चलते कांग्रेस का महापौर बनना आसान हो जाएगा। यदि ऐसा होता है, तो सवाल यह उठने लगे हैं कि क्या भाजपा ऐसे नगरसेवकों के खिलाफ कार्रवाई करेगी, या फिर भिवंडी की सत्ता में कांग्रेस की सहयोगी बनेगी।
क्या अंबरनाथ पैटर्न से होगी कांग्रेस–बीजेपी की युति
अंबरनाथ नगरपालिका में शिवसेना के सबसे अधिक 27 नगरसेवक निर्वाचित हुए थे। इसके बाद एक निर्दलीय नगरसेवक के समर्थन से शिवसेना की संख्या 28 तक पहुँच गई थी। सत्ता गठन के लिए शिवसेना को अभी भी 2 और नगरसेवकों की आवश्यकता थी, लेकिन इस दौरान कांग्रेस और अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नगरसेवकों ने बीजेपी को समर्थन दे दिया। इस घटनाक्रम से राज्य की राजनीति में भारी हलचल मच गई थी। शिवसेना को दरकिनार करते हुए बीजेपी , कांग्रेस और अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने मिलकर सत्ता स्थापित की।
अंबरनाथ नगरपालिका में हुई इन घटनाओं के बाद कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने संबंधित नगरसेवकों को पार्टी से निलंबित कर दिया था। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटील नाराज़ हो गए और उनके साथ 12 नगरसेवकों ने भाजपा में प्रवेश कर लिया। अंबरनाथ में बीजेपी के स्थानीय नेताओं ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर बीजेपी के ‘कांग्रेसमुक्त भारत’ के नारे को ही चुनौती दे दी।
अकोला जिले के अकोट में भाजपा की एआईएमआईएम से हाथ मिलाने की चर्चा
अकोला जिले के अकोट में सत्ता के लिए भाजपा ने ऑल इंडिया इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) के साथ हाथ मिलाने की चर्चा है। इस गठबंधन से राजनीतिक हलकों में जबरदस्त चर्चा और हलचल देखने को मिल रही है।
चंद्रपुर में उबाठा गुट के समर्थन से भाजपा का महापौर
चंद्रपुर महानगरपालिका में शुरुआत में भाजपा के पास 24 नगरसेवकों का संख्या बल था, जिनमें 23 भाजपा और 1 शिवसेना का नगरसेवक शामिल था। शिवसेना (उबाठा) गुट के जिला अध्यक्ष संदीप गिर्हे के नेतृत्व में 6 नगरसेवक भाजपा के समर्थन में आ गए। उद्धव ठाकरे गुट के 6 नगरसेवकों और 2 निर्दलीय नगरसेवकों के समर्थन से भाजपा का संख्याबल 32 तक पहुँच गया। वंचित बहुजन आघाड़ी के 2 नगरसेवक मतदान में अनुपस्थित रहे, जिससे बहुमत का आंकड़ा 33 हो गया। वहीं, एमआईएम के तटस्थ रहने के कारण कांग्रेस का संख्याबल 31 पर ही अटक गया। अंतिम समय में उबाठा गुट को साथ लेते हुए भाजपा ने राजनीतिक चमत्कार कर चंद्रपुर महानगरपालिका में सत्ता स्थापित की। मात्र एक वोट के अंतर से भाजपा की संगीता खांडेकर ने महापौर पद का चुनाव जीत लिया।
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