पत्र के माध्यम से की अपील , सभी सहयोगियों का सहयोग अपेक्षित
मदद करिए देवदूतों ,
🙏 भइया मेरा 14 महीने का बेटा विनायक स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA Type 2) से जूझ रहा है।
उसकी जान बचाने के लिए केवल एक इलाज है — जीन थेरपी “Zolgensma”, जिसकी कीमत है ₹9 करोड़।
अभी तक हमने 15 लाख तक जुटाए है, और गवर्नमेंट से भी कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा है भइया आप ही हमारी आखिरी उम्मीद हैं
यह रकम किसी भी परिवार के लिए सम्भव नहीं, और न ही बीमा या सरकारी योजना से कवर है।
मैं आप से निवेदन करता हूँ कि कृपया हमारी मदद करिए भइया ताकी किसी भी माध्यम से यह इंजेक्शन दिलवाया जा सके।
🙏 एक पिता होने के नाते मेरी आख़िरी उम्मीद है कि आपकी मदद से विनायक तक यह जीवनरक्षक इंजेक्शन पहुँच सके।”
प्यार और उम्मीद के साथ,
आलोक द्विवेदी (पिता)
#8931946916
जानते हैं,आखिर क्यों महंगी है यह दवा और क्या है इसके कारण…
Zolgensma स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी जैसी गंभीर जीन आधारित बीमारी के लिए एक अनोखी और प्रभावी जीन थेरेपी है
Zolgensma एक जीन थेरेपी दवा है जो बच्चों में होने वाली दुर्लभ और गंभीर बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (Spinal Muscular Atrophy – SMA) के इलाज के लिए इस्तेमाल होती है। यह बीमारी मांसपेशियों की कमजोरी और नुकसान पैदा करती है, जिससे बच्चों की सामान्य गतिविधियां करना जैसे बैठना, सिर उठाना, दूध पीना और सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। Zolgensma बीमारी के जीन वाले मुद्दे को सीधे लक्ष्य बनाकर एक बार की डोज में इलाज करता है, जिससे मरीजों को लंबे समय तक लाभ मिलता है।

इस दवा की एक डोज करीब 16 से 18 करोड़ रुपये तक की होती है, जो इसे दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में से एक बनाती है। इस महंगे दाम के पीछे कई कारण हैं:
- यह जीन थेरेपी है, जो जटिल रिसर्च, क्लीनिकल ट्रायल और उन्नत टेक्नोलॉजी पर आधारित है।
- दवा की उत्पादन प्रक्रिया बेहद महंगी और कठिन होती है जिसमें उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल का उपयोग होता है।
- यह एक सिंगल डोज दवा है जिसका मतलब निर्माता को बार-बार मुनाफा नहीं होता, इसलिए लागत मरीजों पर ही डालनी पड़ती है।
- भारत जैसे देशों में यह दवा मान्यता प्राप्त नहीं होने के बावजूद डॉक्टर की सलाह और सरकार की अनुमति से ही आयात हो पाती है।
Zolgensma बीमारी के प्रगतिशील बढ़ाव को रोकती है लेकिन यह बीमारी का पूर्ण इलाज नहीं है। यह बच्चों की जीवन गुणवत्ता बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस दवा का उपयोग मुख्य रूप से 2 साल से कम उम्र के बच्चों में किया जाता है क्योंकि समय रहते इलाज से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
भारत में Zolgensma फिलहाल भारतीय दवा नियंत्रण आयोग (DCGI) द्वारा मंजूरी प्राप्त नहीं है, लेकिन मंजूरी प्रक्रिया चल रही है और अपेक्षा है कि जल्द ही यह दवा स्वीकृत हो सकती है।

इस दौरान, Zolgensma भारत में सीधे उपलब्ध नहीं है, परंतु इसे डॉक्टर की वैध प्रिस्क्रिप्शन और सरकारी अनुमति के साथ आयात किया जा सकता है।
आयात की प्रक्रिया में मरीज को वैध प्रिस्क्रिप्शन, डायग्नोसिस रिपोर्ट और सरकारी पहचान प्रमाण आदि दस्तावेज़ जमा करने होते हैं। कई संस्थान और कंपनियां जैसे Alleviare India और Indian Pharma Network, मरीजों को Zolgensma के आयात में सहायता प्रदान करते हैं, जिससे यह दवा विभिन्न शहरों में मंगाई जा सकती है।
