हिंदू हृदय सम्राट आचार्य स्वामी श्री धर्मेंद्र जी महाराज के परम कृपापात्र शिष्य श्रद्धेय श्री हंस जी महाराज कराएंगे दिव्य एवं अलौकिक यज्ञ और कथा का रसपान
कृष्ण मिश्र ” गौतम”
वापी ,
गौसेवार्थ एवं विश्व कल्याण हेतु धर्मनगरी वापी चला में पहली बार सात दिवसीय श्री लक्ष्मी नारायण कथा और महायज्ञ का भव्य आयोजन होने जा रहा है।
व्यावहारिक जीवन के नव वर्ष 2025 के पहले सप्ताह में वलसाड जिले के धर्म नगरी वापी महानगर पालिका अंतर्गत चला स्थित भाटेला पार्टी प्लॉट में विश्व कल्याणार्थ एवं गौसेवार्थ सात दिवसीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ 5 जनवरी से शुरू हो कर 12 जनवरी को संपन्न होगा।

हिंदू हृदय सम्राट परम पूज्य गुरुदेव धमेंद्र जी महाराज के कृपा पात्र शिष्य श्रद्धेय हंस जी महाराज कथा व्यास के रूप में सनातन धर्म , गौसेवा की महिमा के साथ भगवद ज्ञान गंगा का रसपान कराएंगे। यह दिव्य एवं अलौकिक कथा पावन श्री धाम समिति के सानिध्य में तथा श्याम भक्त एवं गौ भक्तों के सहयोग द्वारा आयोजित किया जा रहा है।इस दौरान प्रतिदिन यज्ञ अनुष्ठान के साथ प्रवचन व अन्य धार्मिक कार्यक्रम यज्ञ समिति के तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा।

आयोजन समिति के पदाधिकारी और वरिष्ठ समाजसेवी बी के दायमा जी ने कथा के प्रारूप के बारे में बताया कि श्री लक्ष्मीनारायण कथा का शुभारंभ सर्वप्रथम 5 जनवरी को कलश यात्रा के साथ शुरू हो कर प्रतिदिन कथा 12 जनवरी तक दोपहर 3:15 से 6:15 बजे तक चलेगा। साथ ही प्रतिदिन 2:15 से 3:15 बजे तक महायज्ञ का भी आयोजन होगा।
आयोजन समिति के प्रारूप के अनुसार कलश यात्रा वापी के चला स्थित मुक्तेश्वर महादेव मंदिर से सुबह 10:15 बजे शुरू हो कर कथा स्थल तक जाएगी। जिसमें सैकड़ों महिलाएं , सौभाग्यवती स्त्रियां , कन्याएं सिर पर कलश ले कर दिव्य ढोल नगाड़ों के साथ यात्रा में शामिल होंगी।

कथा व्यास के रूप में भारतीय संस्कृति के अद्वितीय व्याख्याकार एवं यज्ञ सम्राट परम पूज्य हंस जी महाराज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि पावन श्री धाम सेवा समिति , श्यामभक्तो और गौभक्तों द्वारा इस महायज्ञ का आयोजन विश्व कल्याण हेतु और गौसेवार्थ किया जा रहा है। कथा का मकसद आज की पीढ़ी को अपनी संस्कृति अपने ईश्वरीय परंपरा और गुरु परंपरा के साथ गौ भक्ति की शक्ति के बारे में अवगत कराना है।जिस तरह से आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रही है ,आने वाले समय में स्थिति और भी विकट हो सकती है। ऐसे में हमारी संस्कृति और हमारे पूर्वजों द्वारा दिया गया धर्म ज्ञान ही मार्गदर्शक बनेगा ,जिसका ज्ञान अति आवश्यक है।
बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर व्यथा जताई है। हिंदुओं में घटती एकता , जातिवाद की भावना चिंता का विषय है। हिंदू ही नहीं बचेगा तो जातियां और पंथ किसी काम के नहीं रहेंगे।
जहां वर्तमान में बांग्लादेश एक उदाहरण है जहां हिंदुओं पर विधर्मियों द्वारा अत्याचार किए जा रहे है ।ऐसे में “एक है तो सेफ है ” , “बटेंगे तो कटेंगे” जैसे नारे हिंदू हित मे है । साथ ही हिन्दू एकता को सदृढ़ करना होगा। गौसेवा प्रत्येक हिन्दू को करना चाहिए , गौ माता की महिमा बहुत बड़ी है , 33 कोटि देवी देवता गौमाता के भीतर विद्यमान होते हैं। लेकिन निजी स्वार्थ और कामचोरी के कारण लोग गौ पालने में कोई रुचि नहीं लेते । भारत की संस्कृति गौमाता पर आधारित है ऐसे में प्रत्येक सनातनी को गौसेवा का पुनीत कार्य करना चाहिए। कथा में विस्तार से इन सभी विषयों पर प्रकाश डाला जायेगा।
साथ ही पूज्य हंस जी महाराज समेत सभी आयोजकों ने सनातनी माताओं , भाइयों बहनों को इस कथा में पहुंच कर दिव्य एवं अलौकिक कथा का लाभ लेने का आव्हान किया है।
