अनन्य गौ भक्त कार्तिक जोशी ने गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने गिरिराज भगवान का किया पूजन
वापी स्थित शुभम ग्रीन सिटी के 3bhk सोसायटी के पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट ( सी ए) गौसेवक कार्तिक और नीरजा जोशी दंपत्ति ने अपने निवास स्थान पर भगवान गिरिराज गोवर्धन पूजा का आयोजन किया । इस पूजा में भगवान गोवर्धन की प्रतिमा शुद्ध गाय के गोबर , इत्र, गंगाजल इत्यादि के मिश्रण से बनाया गया। भगवान गिरिराज गोवर्धन की कथा के बारे में विस्तार से बताया गया। आखिर क्यों किया जाता है गिरिराज महाराज की पूजा इसके बारे में विस्तृत रूप से कथा में वर्णन किया गया।

इस्कॉन की भजन मंडली के कई भक्त जनों द्वारा किए गए भक्तिभरे कीर्तन ने पूरे कार्यक्रम में समा बना दिया लोग झूमने पर मजबूर हो उठे। गिरिराज पूजन के दौरान सभी ने दीपदान किया साथ ही छप्पन भोग प्रसाद का भोग भी लगाया गया।

बता दें कि दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। इस त्यौहार का भारतीय लोकजीवन में बहुत महत्व है। इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध दिखाई देता है। इस पर्व की अपनी मान्यता और लोककथा है। गोवर्धन पूजा में गोधन अर्थात गायों की पूजा की जाती है। शास्त्रों में बताया गया है कि गाय उसी प्रकार पवित्र होती है जैसे नदियों में गङ्गा। गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है। देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं। इनका बछड़ा खेतों में अनाज उगाता है। ऐसे गौ सम्पूर्ण मानव जाति के लिए पूजनीय और आदरणीय है।

आयोजक और अनन्य गौ भक्त और बृंदावन के बहु चर्चित संत प्रेमानंद जी महाराज से दीक्षा प्राप्त कर चुके दंपती बताते हैं कि गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन की पूजा की जाती है और इसके प्रतीक के रूप में गाय की। इसी भाव से प्रभु की भक्ति करने हेतु इस नव वर्ष के दिन इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया , जिसमे उनकी पत्नी नीरजा जोशी ने गिरिराज भगवान की प्रतिमा स्वयं अपने हाथों से बनाया साथ ही दीपदान कार्यक्रम , आरती और छप्पन भोग के प्रसादम कार्यक्रम में जुटी रही।
