वापी –
यज्ञ और हवन भारतीय संस्कृति का प्राण व वैदिक धर्म का सार है।यज्ञ ही संसार का श्रेष्ठतम कर्म है। यह कहना है ,सद्गुरूधाम बरूमल से वापी पधारे प्रमुख गुरु स्वामी विद्यानंद सरस्वती जी का ।

वलसाड जिले के वापी तालुका के चला स्तिथ रॉयल लाइफ स्टाईल स्तिथ शिव मंदिर प्रांगण में शुक्रवार को आयोजित नवचंडी यज्ञ के समापन पर आशीर्वचन करते हुए सदगुरु धाम बरूमाल के प्रमुख स्वामी विद्यानंद सरस्वती ने अपने प्रवचन में यह बात कही।
उन्होंने नवचंडी यज्ञ के आयोजन पर प्रकाश डालते हुए कहा की पिता के बजाय मां का अपनी संतान पर अधिक स्नेह होता है।इस लिए नवचंडी के अनुष्ठान से मां प्रसन्न होकर त्वरित आशिर्वाद प्रदान करती है। उन्होंने कहा की
प्रभु भक्ति व सेवा से ही जीवन में परमानंद की प्राप्ति संभव है।
सुबह 8बजे वैदिक मंत्रोचार के साथ मां दुर्गा के पूजन के साथ नवचंडी यज्ञ प्रारंभ हुआ।

जिसमे आचार्य सूर्यप्रकाश शास्त्री व सद्गुरुधाम के वेद विद्वानों के द्वारा मंत्रोचार के बीच यजमानों ने आहुतियां प्रदान कर यज्ञ कार्य संपन्न किया।इस अवसर पर काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्तित रह कर यज्ञ,प्रवचन तथा महा प्रसाद का लाभ लिया।
