पश्चिम एशिया में जंग का असर: होटलों में घटा मेन्यू, अब पकवान महंगे होने का संकेत
आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने से बिगड़ेगा मुंबईकरों का बजट
कृष्ण कुमार
मुंबई: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब मुंबईवासियों की रसोई तक पहुंच गया है। हालत यह है कि कई जगहों पर होटल संचालक कम गैस सिलेंडर और सीमित संसाधनों के चलते एक ही चूल्हे पर खाना तैयार कर रहे हैं। इससे रेस्टोरेंट की मेन्यू में भी कटौती कर दी गई हैं। पहले जायका बिगड़ा और अब पकवान महंगे होने के संकेत से मुंबईकरों का बजट बिगड़ गया है।
इरान के साथ अमेरिका और इस्राइल की जंग के कारण आयात-निर्यात में बाधा, कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण मुंबई के कई होटल और रेस्टोरेंट अपने मेन्यू में कटौती करने पर मजबूर हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया से आने वाले खाद्य तेल, मसाले, सूखे मेवे और अन्य जरूरी सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर मुंबई के खानपान उद्योग पर पड़ा है, जो बड़े पैमाने पर आयातित सामग्री पर निर्भर रहता है। मुंबई के कई इलाकों मोहम्मद अली रोड, बांद्रा, अंधेरी, कुर्ला, मीरारोड और नवी मुंबई में होटल मालिकों का कहना है कि पहले जहां 30-40 आइटम परोसे जाते थे, अब मेन्यू 15-20 आइटम तक सीमित कर दिया गया है। कई जगहों पर बिरयानी, कबाब, ग्रेवी डिशेज और तंदूरी आइटम जैसी चीजों की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है। एक होटल मालिक ने बताया कि कई सामान महंगे हो गए हैं, कुछ की सप्लाई ही समय पर नहीं आ रही। इसलिए हमें कम आइटम बनाने पड़ रहे हैं।
दक्षिण मुंबई में चर्चगेट के पास स्थित मशहूर सम्राट रेस्टोरेंट में 25 वर्षों से कार्यरत संजय एरंगले बताते हैं कि पहले चार चूल्हे जलते थे अब एक चूल्हे पर ही काम हो रहा है। गैस सिलेंडर की कमीं से यह स्थिति पैदा हुई है। गैस सिलेंडर और खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने लागत बढ़ा दी है। कई छोटे होटल और ढाबे भी अब सीमित सिलेंडर में काम चला रहे हैं। ऐसे में एक साथ कई व्यंजन बनाना मुश्किल हो गया है, जिससे एक चूल्हे पर ही पकवान तैयार किए जा रहे हैं। होटलों में खाना बनने की गति धीमी होने से ग्राहकों को ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, कई लोग शिकायत कर रहे हैं कि पहले जैसा स्वाद और वैरायटी अब नहीं मिल रही।
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