चुनाव के दौरान आदिवासी युवक से मारपीट के मामले में केंद्रीय जनजाति आयोग की नोटिस
पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी को कारवाई के निर्देश
जा. न्यूज़ संवाददाता
मुंबई। बृहन्मुंबई महापालिका चुनाव के दौरान आदिवासी युवक से उबाठा कार्यकर्ताओ ने मारपीट की थी, इस मामले में अब केंद्रीय जनजाति आयोग ने मुंबई पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी को करवाई करने के निर्देश दिए है। जिससे उबाठा शिवसेना की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही है।

मुंबई महानगरपालिका चुनाव के दौरान गिरगांव इलाके में एक आदिवासी युवक के साथ मारपीट की घटना सामने आई है। इस संबंध में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट किए जाने का वीडियो सामने आया था। इस मामले में पीड़ित आदिवासी युवक ने अनुसूचित जनजाति आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।पीड़ित युवक का नाम केशव पावरा है। 15 जनवरी को मतदान के दिन ही गिरगांव में उसके साथ मारपीट की गई थी।
अपनी शिकायत में केशव पावरा ने कहा है कि वह रोज़गार के लिए नंदुरबार से गिरगांव आया था। मतदान स्थल पर वह भोजन और पानी वितरण का काम कर रहा था। उसी दौरान उद्धव ठाकरे की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उसके साथ मारपीट की। जब उसने बताया कि वह नंदुरबार से काम के लिए आया है, तो वे नाराज़ हो गए और उसे गालियाँ देने लगे। इसके बाद उन्होंने उस पर हमला किया।
केशव पावरा ने आरोप लगाया है कि उसकी जाति का उल्लेख करते हुए उस पर हमला किया गया। इसलिए यह अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत एक गंभीर अपराध है और इसमें मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

केशव पावरा ने यह भी बताया कि उसने स्थानीय पुलिस थाने में भी शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन उसे न्याय मिलने की संभावना कम लग रही है। इसलिए उसने आयोग से इस मामले में हस्तक्षेप करने, आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने और उसे उपचार के लिए सहायता दिलाने की मांग की है। उसे उम्मीद है कि आयोग से उसे न्याय मिलेगा।
इस संबंध में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मुंबई शहर के जिलाधिकारी और दक्षिण मुंबई के पुलिस उपायुक्त को पत्र लिखकर मामले में ध्यान देने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि आयोग को 15 जनवरी को केशव पावरा से एक शिकायत/निवेदन प्राप्त हुआ है (प्रति संलग्न)। भारत के संविधान के अनुच्छेद 338(क) के तहत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए आयोग ने इस मामले की जांच करने का निर्णय लिया है।
इसके तहत संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि इस सूचना के प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर आरोपियों, जांच और की गई कार्रवाई से संबंधित विस्तृत जानकारी लिखित रूप में प्रस्तुत की जाए। आवश्यकता होने पर व्यक्तिगत रूप से या किसी अन्य माध्यम से भी जानकारी प्रस्तुत की जा सकती है।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आयोग को रिपोर्ट या उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग संविधान के अनुच्छेद 338(क) के अंतर्गत प्राप्त सिविल न्यायालय के अधिकारों का उपयोग कर सकता है और व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य की जा सकती है।
