बरसात के पूर्वानुमान पर भी नहीं की गई कोई व्यवस्था सभी श्रद्धालु जैसे तैसे बरसात से बचते नजर आए
वलसाड /दमन संवाददाता द्वारा,
सूर्य उपासना और मातृशक्ति के प्रतीक छठ महापर्व पर जहां देशभर में श्रद्धा और उल्लास की बयार बह रही थी, वहीं वलसाड में इस पावन पर्व की रौनक प्रशासनिक लापरवाही के कारण मद्धम पड़ गई।
जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरी बीजेपी जमात बिहार के चुनावों में देश भर में त्योहारों के धूमधाम से मनाए जाने का श्रेय ले रही है , वही गुजरात और पास ही सटे दमन में ऐसी अनदेखी उत्तर भारतीय श्रद्धालुओं को हजम नहीं हो रही।
घाटों और तालाबों पर न तो सफाई की कोई ठोस व्यवस्था थी, न ही जल प्रबंध और सुरक्षा का ध्यान रखा गया। रही सही कसर की पोल पूर्वानुमानित बरसात ने खोल दी ,जहां बड़ी मात्रा में श्रद्धालु यहां वहां भागते नजर आए। श्रद्धालु महिलाओं को प्रसाद और अर्घ्य चढ़ाने में भी भारी दिक्कतें झेलनी पड़ीं।
उत्तर भारतीय समुदाय, जो वर्षों से वलसाड में इस पर्व को बड़ी श्रद्धा के साथ मनाता आ रहा है, प्रशासन की इस उदासीनता से बेहद निराश दिखाई दिया। लोगों ने कहा कि छठ सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि हमारी आस्था और पहचान का उत्सव है।
फिर भी, प्रशासन ने इसे वह सम्मान नहीं दिया जिसकी यह हकदार थी।स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि उत्तर भारतीय नेताओं ने भी इस बार कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

उत्तर भारत से आए नेताओं का उज्जवल चेहरा कहीं दिखा नहीं, जो केवल चुनावों और भीड़ जुटाने तक अपनी ज़िम्मेदारी सीमित समझते हैं। इन नेताओं का उद्देश्य जनता की सेवा नहीं, बल्कि मात्र स्व-हित साधना है। ऐसे “छुटभैये” नेता छठ पर्व जैसी पवित्र अवसर पर भी अपनी राजनीति के अलावा कुछ नहीं सोचते।
छठ व्रत रखने वाली महिलाओं ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर प्रशासन थोड़ी संवेदनशीलता दिखाता तो यह पर्व और भी भव्य हो सकता था। श्रद्धालु अनीता देवी ने कहा, “हम लोग रोजी-रोटी के लिए अपने प्रदेश से दूर आए हैं, लेकिन त्योहारों पर हमारी भावनाएं भी सम्मान चाहती हैं।”
चुनावी वक्त में जो नेता लोगों के दिलों और घाटों तक पहुंच जाते हैं, वही इस शुभ अवसर पर गायब रहे। जनता ने सवाल उठाया कि क्या हमारी संस्कृति और आस्था सिर्फ वोट तक सीमित है?
श्रद्धालुओं ने मांग की है कि प्रशासन ऐसी चूक दोबारा न होने दे। घाटों पर सफाई, रोशनी, सुरक्षा और पानी की समुचित व्यवस्था की जाए ताकि आने वाले वर्षों में छठ का उल्लास फिर से वैसा ही दिखे, जैसा इसकी पवित्रता के अनुरूप है।
प्रशासन की उदासीन रवैया और उत्तर भारतीय नेताओं के सीमित चुनावी स्वार्थ के कारण ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों में प्रशासन और नेताओं की वास्तविक प्रतिबद्धता पर व्यापक सवाल खड़े हुए हैं।
लोगों ने वलसाड जिला प्रशासन और संघ प्रदेश प्रशासन से मांग की कि भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए विशेष तैयारी की जाए और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ समान व्यवहार किया जाए, ताकि वलसाड में भी छठ की आस्था फिर से अपनी पूर्ण ज्योति में दमक सके।
