खुले आम हो रहे भ्रष्टाचार मामले में भी “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे ” जैसे हालात
सड़क विकास के साथ व्यवस्था का भी पुनर्निर्माण जरूरी है। तभी देश आगे बढ़ेगा, वरना भ्रष्टाचार के ये रास्ते बार-बार विकास के सपनों को कुचलते रहेंगे।
“जो करना है कर लो, हमारी पहुंच ऊपर तक है।” – ठेकेदार
वापी (गुजरात) ,
वलसाड जिले के निकटवर्ती राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर चल रहे निर्माण कार्य में लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
स्थानीय नागरिकों ने ठेकेदार पर आरोप लगाया है कि उसने भारी वर्षा के दौरान देर रात में डामर का कार्य जारी रखा, जबकि नियमों के अनुसार बरसात में ऐसा कार्य किया जाना निषिद्ध है, क्योंकि इससे सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ता है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब कुछ जागरूक नागरिकों और पत्रकारों ने ठेकेदार से इस अनियमितता पर सवाल पूछे, तो उसने अहंकारी अंदाज में जवाब दिया कि “जो करना है कर लो, हमारी पहुंच ऊपर तक है।” ठेकेदार के इस बयान ने लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है और यह बात उजागर की है कि कैसे कुछ ठेकेदार सरकारी प्रणाली पर प्रभाव के दम पर मनमानी कर रहे हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के प्रभारी अधिकारी अंकित कुमार को जब इस विषय में जानकारी और तस्वीरें भेजी गईं, तब उन्होंने केवल इतना कहा कि “मामले की जांच चल रही है।” अधिकारियों की इस निष्क्रियता ने स्थानीय जनता और विशेषज्ञों के बीच संदेह और असंतोष को और बढ़ा दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के दौरान डामर बिछाने से सड़क की मजबूती प्रभावित होती है और कुछ ही दिनों में दरारें पड़ने लगती हैं। इससे जनता के करोड़ों रुपये व्यर्थ जाने का खतरा है। वहीं, कार्य के दौरान कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर उपस्थित नहीं था, जिससे निगरानी और जवाबदेही दोनों पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए हैं।
पूरे मामले में स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि इस लापरवाह ठेकेदार को तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए और उसके साथ-साथ सम्बंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई हो। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक ऐसे मामलों में पारदर्शी और कठोर कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक जनता का पैसा भ्रष्ट नेटवर्क की भेंट चढ़ता रहेगा।
यह घटना देशभर में सड़क निर्माण परियोजनाओं की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है और यह ज़रूरत दर्शाती है कि सरकार को निगरानी तंत्र को और सशक्त बनाना चाहिए ताकि जनता का धन सुरक्षित और सदुपयोग में लाया जा सके।
सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार—जनता के भरोसे पर चोट
वापी के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर जो डामर सड़क निर्माण भारी बारिश में रात के समय किया गया, वह देश की विकास यात्रा में काले धब्बे जैसा है। नियमों की अनदेखी और गुणवत्ता से समझौता, दोनों ही न केवल जनता के करोड़ों रुपयों की बर्बादी हैं, बल्कि देश के अधोसंरचना तंत्र की कमजोरी उजागर करते हैं।
ठेकेदार का “हमारी पहुंच ऊपर तक है” वाला बयान प्रशासनिक तंत्र के भ्रष्टाचार का खुला प्रतीक है। जब जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ठेकेदार विकास कार्यों को अपनी निजी दुकान समझ लें, तब देश में सड़कों की तरह व्यवस्था भी खोखली होती जाती है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी सिर्फ “जांच” का आश्वासन देते हैं, पर तत्काल कार्रवाई और जवाबदेही का भाव नदारद है। सड़क निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी से जनता के धन का ह्रास ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है।
आज जरूरत है कि ऐसे भ्रष्ट ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।
सरकार को चाहिए कि सड़क निर्माण की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ठोस तंत्र बनाए, ताकि ईमानदारी सिर्फ ओट में न रहे।जनता का भरोसा तभी लौटेगा, जब व्यवस्था में “पहुँच” के बदले “जवाबदेही” का बोलबाला हो।
सड़क विकास के साथ व्यवस्था का भी पुनर्निर्माण जरूरी है। तभी देश आगे बढ़ेगा, वरना भ्रष्टाचार के ये रास्ते बार-बार विकास के सपनों को कुचलते रहेंगे।
