अहम मामलों जैसे अनुच्छेद 370, अभिव्यक्ति की आजादी, भ्रष्टाचार, पर्यावरण और लैंगिक समानता से जुड़े ऐतिहासिक निर्णयों में भूमिका
हरियाणा के हिसार जिले के जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनने जा रहे हैं।न्यायमूर्ति का कार्यकाल 24 नवंबर 2025 से 9 फरवरी 2027 तक रहेगा । उनका जीवन और न्यायिक यात्रा प्रेरणादायक मानी जाती है, खासकर उनके साधारण पृष्ठभूमि से सर्वोच्च न्यायालय तक के सफर के कारण।
वे वर्तमान मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई के आगामी 23 नवंबर को सेवानिवृत्त होने पर यह पद सँभालेंगे और 9 फरवरी 2027 तक इस पद पर रहेंगे!

जस्टिस सूर्यकांत संवैधानिक, सेवा और सिविल कानून के विशेषज्ञ माने जाते हैं । उन्होंने कई अहम मामलों जैसे अनुच्छेद 370, अभिव्यक्ति की आजादी, भ्रष्टाचार, पर्यावरण और लैंगिक समानता से जुड़े ऐतिहासिक निर्णयों में भाग लिया है ।
मुख्य न्यायाधीश के रूप में भूमिकावह मौजूदा CJI बी. आर. गवई के 23 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त होने के बाद पदभार संभालेंगे ।
परंपरानुसार, वर्तमान CJI अपने उत्तराधिकारी के रूप में सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ और उपयुक्त न्यायाधीश की सिफारिश करते हैं, जिसके तहत न्यायमूर्ति सूर्यकांत को यह पद मिलेगा

10 फ़रवरी, 1962 को एक मध्यमवर्गीय परिवार में पैदा हुए। 1981 में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हिसार से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से विधि स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 1984 में हिसार ज़िला न्यायालय में वकालत शुरू की। 1985 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में वकालत करने के लिए चंडीगढ़ चले गए।
7 जुलाई 2000 को हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता नियुक्त होने का गौरव प्राप्त किया। मार्च 2001 में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया। 09 जनवरी 2004 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश बने।
5 अक्टूबर 2018 से 23 मई 2019 तक हिमाचल प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश पद पर रहे! 24 मई, 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए।
