“हम किसी भी डील को जल्दबाज़ी में नहीं करते, न ही किसी की कनपटी पर बंदूक रखकर कोई समझौता करते हैं।”
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में बर्लिन ग्लोबल डायलॉग सम्मेलन में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर स्पष्ट कहा कि भारत किसी भी दबाव या डेडलाइन के तहत कोई सौदा नहीं करेगा । सम्मेलन में अपनी बात रखते हुए गोयल ने कहा, “हम किसी भी डील को जल्दबाज़ी में नहीं करते, न ही किसी की कनपटी पर बंदूक रखकर कोई समझौता करते हैं।”
उन्होंने साफ किया कि भारत का दृष्टिकोण दीर्घकालिक और संतुलित साझेदारी का है, न कि किसी तात्कालिक राजनीतिक दबाव में लिए गए निर्णयों का ।
गोयल ने यह भी जोड़ा कि अमेरिका के साथ बातचीत जारी है, लेकिन यह तभी आगे बढ़ेगी जब दोनों पक्षों के आर्थिक हितों का संतुलन सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि भारत अपने नागरिकों और उद्योगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगा और किसी भी देश से दबाव स्वीकार नहीं करेगा।

इस बयान का संदर्भ अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ से है—भारतीय उत्पादों पर लगभग 50% तक शुल्क और रूस से तेल खरीद पर 25% टैक्स लगाया गया है। इसके बावजूद गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत ऐसी नीतियों का सामना संवाद और आत्मनिर्भर आर्थिक नीति से करेगा, न कि दबाव में झुकेगा ।
कुल मिलाकर, पीयूष गोयल का यह वक्तव्य भारत की “इंडिया फर्स्ट” नीति और आत्मविश्वासी विदेश व्यापार दृष्टिकोण को दोहराता है, जिसमें देश किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में बराबरी के सिद्धांत पर ही भाग लेगा।
