तालिबान सरकार ने पाकिस्तान की पानी तक पहुंच को सीमित करने के लिए कुनार नदी पर जल्द से जल्द बाँध बनाने का फैसला किया है।
इस कदम से पाकिस्तान की वर्तमान जल सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और कृषि उत्पादन पर इस फैसले का व्यापक नकारात्मक प्रभाव होगा तथा इसके कारण पाकिस्तान को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है
बता दें , यह कदम भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित करने के बाद चीन की तरह पानी के दवाब के लिए है। तालिबान के सुप्रीम लीडर मौलवी हिबातुल्लाह अखुंदजादा ने अफगानिस्तान के जल और ऊर्जा मंत्रालय को इस परियोजना को तेजी से पूरा करने का आदेश दिया है।

तालिबान सरकार का दावा है कि अफगानिस्तान को अपने जल संसाधनों पर अधिकार है और इस काम को विदेशी कंपनियों की बजाय घरेलू कंपनियों से करवाया जाएगा।
इस बांध के बन जाने से पाकिस्तान को न केवल पीने के पानी की आपूर्ति प्रभावित होगी, बल्कि सिंचाई और हाइड्रोइलेक्ट्रिक ऊर्जा उत्पादन पर भी बड़ा असर पड़ेगा। यह कदम अफगान और पाकिस्तान के बीच बढ़े हुए सीमा संघर्षों और तनाव के बीच आया है, जहां दोनों देशों के सैनिकों के बीच लड़ाई हुई थी।
तालिबान की यह रणनीति भारत द्वारा अपनाए गए पानी के दबाव की नीति की तर्ज पर है, जिसमें भारत ने भी पाकिस्तान को सिंधु नदी के पानी की आपूर्ति को सीमित करने के लिए कदम उठाए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में तालिबान द्वारा पाकिस्तान को जल आपूर्ति से काटने का प्रयास एक नई जल कूटनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो क्षेत्र के राजनीतिक तनाव और सीमा विवाद की पृष्ठभूमि में है।
तालिबान के कुनार नदी पर बांध बनाने के फैसले का पाकिस्तान की सिंचाई और बिजली उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
कुनार नदी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है, जिसका उपयोग मुख्यतः खेती की सिंचाई और हाइड्रोइलेक्ट्रिक ऊर्जा उत्पादन के लिए होता है।

यदि तालिबान इस नदी पर बांध बना कर पानी का प्रवाह रोकता है, तो पाकिस्तान के इन क्षेत्रों में पानी की कमी हो जाएगी।पानी की कमी के कारण पाकिस्तान की अन्न उपज प्रभावित होगी, जिससे कृषि संकट गहरा सकता है। इसके साथ ही, बिजली उत्पादन में भी भारी रुकावटें आएंगी क्योंकि हाइड्रोपावर प्लांटों को पानी की जरूरत होती है। यह स्थिति पहले से ही खाद्य एवं ऊर्जा संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए और जटिल स्थितियां उत्पन्न कर सकती है।
इसके अलावा, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जल विवाद और तनाव बढ़ने की संभावना भी है क्योंकि दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक जल बंटवारा समझौता नहीं है।तालिबान के इस कदम को भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद सीधी प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है, जो पाकिस्तान के लिए एक दो मोर्चे की जल चुनौती उत्पन्न करेगा।
पाकिस्तान की वर्तमान जल सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और कृषि उत्पादन पर इस फैसले का व्यापक नकारात्मक प्रभाव होगा तथा इसके कारण पाकिस्तान को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है
