मंत्री श्री मंगलप्रभात लोढा का प्रयास रंग लाया
खेल मंत्री माणिकराव कोकाटे ने दिया पारंपरिक देशी खिलाड़ियों को सरकारी नियुक्ति का भरोसा
जा. न्यूज़ संवाददाता
मुंबई। पारंपरिक देशी खिलाड़ियों को शिव छत्रपति पुरस्कार, सरकारी लाभ और नियुक्तियों को लेकर शासन स्तर पर प्रयास किए जाएंगे। यह आश्वासन खेल एवं युवा कल्याण मंत्री माणिकराव कोकाटे ने बुधवार को कुर्ला में ओलंपिकवीर खाशाबा जाधव पारंपरिक देसी खेल महाकुंभ के उद्घाटन कार्यक्रम में दिया। कोकाटे की प्रमुख उपस्थिति में इस खेल महाकुंभ का उद्घाटन और पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर देसी खेल मैदान का लोकार्पण किया गया।

भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सहेजनेवाले देसी मैदान खेलों के खिलाड़ियों को सरकारी लाभ दिलाने की मांग मंगलप्रभात लोढा ने की थी। कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री मंगलप्रभात लोढा की संकल्पना से, राजमाता पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर की पुण्यतिथि के अवसर पर, ओलंपिकवीर खाशाबा जाधव पारंपरिक देसी खेल महाकुंभ का आयोजन कुर्ला स्थित जामसाहेब मुकादम व्यवसाय शिक्षा एवं प्रशिक्षण केंद्र के पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर देशी खेल मैदान पर किया गया।
उद्घाटन दिवस पर लाठी-काठी, मल्लखंभ और तलवारबाजी के मनमोहक प्रदर्शन हुए। श्री रंजीत जाधव ने महाकुंभ की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह युवाओं को पारंपरिक खेलों की ओर आकर्षित करने का एक सराहनीय प्रयास है।यह महाकुंभ 22 अगस्त तक चलेगा, जिसमें 20,000 प्रतिभागी 18 पारंपरिक भारतीय खेलों में भाग लेंगे।

उद्घाटन कार्यक्रम में व्यवसाय शिक्षा एवं प्रशिक्षण संचालनालय की निदेशक श्रीमती माधवी सरदेशमुख, मुंबई उपनगर जिलाधिकारी श्री सौरभ कटियार, क्रीड़ा भारती के कोषाध्यक्ष श्री गणेशजी देवरुखकर, मुंबई अध्यक्ष मिलिंद डांगे और ओलंपिकवीर खाशाबा जाधव के सुपुत्र रणजीत जाधव उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने किया मंत्री लोढा का अभिनंदन, संदेश मे कहा कि आज के तकनीक-चालित युग में पारंपरिक खेलों को पुनर्जीवित करना समय की मांग है.
ओलंपिकवीर खाशाबा जाधव पारंपरिक देशी खेल महाकुंभ की शुरुआत ढोल और लेझीम की ताल पर अत्यंत उत्साहपूर्ण माहौल में हुई। कार्यक्रम की शुरुआत में ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भेजे हुए संदेश में कहा कि आज के यांत्रिक युग में बच्चों की शारीरिक गतिविधियां कम हो रही हैं, ऐसे समय में तन-मन को सुदृढ़ करनेवाले देशी खेलों का पुनर्जीवन कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार विभाग द्वारा किया जा रहा है, यह महत्वपूर्ण बात है।
इस अवसर पर मंत्री मंगलप्रभात लोढा तथा विभाग का हार्दिक अभिनंदन! मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे देशी खेलों के लिए मैदान उपलब्ध कराना और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने का यह विभाग का उपक्रम अत्यंत उल्लेखनीय है।
जाधव ने ओलंपिक में देश का नाम रोशन किया था
कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि
महाराष्ट्र के सुपुत्र, पहलवान ओलंपिकवीर खाशाबा जाधव ने प्रतिकूल परिस्थितियों में ओलंपिक पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। इस महाराष्ट्र के सुपुत्र के नाम से हर वर्ष पारंपरिक खेल प्रतियोगिताएं सरकारी स्तर पर होनी चाहिए और खिलाड़ियों को सरकारी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
इसी बात को आगे बढ़ाते हुए खेल एवं युवा कल्याण मंत्री माणिकराव कोकाटे ने हर वर्ष सरकारी स्तर पर पारंपरिक देशी खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश में योग दिवस की शुरुआत कर देश की संस्कृती को विश्वभर में पहुंचाया है। यदि देश के पारंपरिक खेलों को प्रोत्साहित किया जाए तो वर्तमान में आभासी दुनिया और मोबाइल की लत में फंसी युवा पीढ़ी को समय रहते रोका जा सकता है। इसके लिए देसी खेल और खिलाड़ियों को सरकारी स्तर पर मान्यता देने के लिए प्रयासरत रहेंगे, ऐसा उन्होंने ओलंपिकवीर खाशाबा जाधव पारंपरिक देशी खेल महाकुंभ में घोषणा की। साथ ही प्राथमिक विद्यालयों में लंगड़ी, रस्सी कूद, लगोरी जैसे खेल अनिवार्य करने के संबंध में जल्द ही बैठक कर निर्णय लिया जाएगा, यह घोषणा भी श्री कोकाटे ने की।
खिलाड़ियों ने लाठी-काठी, तलवारबाजी का किया प्रदर्शन
पारम्परिक खेल महाकुंभ में मान्यवरों की उपस्थिति में खिलाड़ियों ने लाठी-काठी, मल्लखंब और तलवारबाज़ी जैसे साहसी खेलों का प्रदर्शन किया। ओलंपिकवीर खाशाबा जाधव के सुपुत्र रणजीत जाधव ने इस पारंपरिक खेल महाकुंभ के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह युवाओं को देशी खेलों की ओर आकर्षित करने का एक सराहनीय प्रयास है। यह खेल महाकुंभ 22 अगस्त तक चलेगा, जिसमें 20 हज़ार प्रतिभागी 18 विभिन्न देशी खेलों के माध्यम से मैदान में अपना कौशल दिखाएंगे।

कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि