नियमो को ताक पर रख कर खतरनाक उत्सर्जित रसायनिक गैसों को छोड़ मानव जीवन और पर्यावरण के साथ कर रही खिलवाड़ !
एक कहावत हैं न कि “जब ऊपरवाला मेहरबान ,तो गधा भी पहलवान ” इसी कहावत को चरितार्थ करती हुई उद्योगनगरी वापी जी आई डी सी स्थित कंपनी हेरंबा केमिकल्स का है।
बता दें कि वापी जी आई डी सी स्थित यह इकाई लिक्विड ब्रोमीन, फिनोल, अमोनियम क्लोराइड पाउडर, पॉली अमोनियम क्लोराइड और पाउडर, कॉपर हाइड्रॉक्साइड, ब्रोमोबेंजीन, शुद्ध बेंजीन का निर्माण करती है। खतरनाक केमिकल्स उत्पादन करना कोई अपराध नही है लेकिन , जोखिम भरे रसायन खुले आम पर्यावरण में छोड़ना अपराध की श्रेणी में लाता है।
हम बात कर रहे हैं, उद्योगनगरी वापी ही नही बल्कि गुजरात की नामी गिरामी केमिकल कंपनी में शुमार हेरांबा केमिकल्स ग्रुप के वापी प्लांट की जहां दिन में भी बेधड़क खुले आम रसायनिक गैस छोड़ी जा रही है।
जानकारी के अनुसार वापी औधोगिक नगरी के थर्ड फेज विस्तार में हेरंबा इंडस्ट्रीज की यूनिट 4 में से पीली जहरीली गैस बेधड़क छोड़ी जा रही है। विश्वस्त सूत्रों के माध्यम से यह जहरीली गैस होने की जानकारी सामने है। यह गैस मानव जीवन के लिए काफी घातक है। इस तरह की गैस हेरंबा इंडस्ट्रीज की यूनिट 4 के छत पर लगे पाइप के जरिए काफी बार निकलती दिखाई देती है।
पहले भी इसी तरह की घटना में कंपनी के अधिकारी से बात करने पे बताया गया था की किसी कर्मचारी की गलती की वजह से गैस लीकेज हो गई थी। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि बार बार जन जीवन के लिए काफी घातक बताई जाने वाली यह गैस कैसे लीकेज हो जाती है। यह घटना कतई किसी की गलती से होने वाली गलती नहीं हो सकती बल्कि यह जान बूझ कर की जाने वाली गलती है।

बता दें यह कंपनी लगातार विवादों में चली आ रही है , कभी जल प्रदूषण , कभी वायु प्रदूषण तो कभी किसी और मुद्दे पर हमेशा प्रदूषण को लेकर ढुलमुल रवैये के कारण यह कंपनी साख खोती जा रही है।
स्थानीय प्रबंधन कैसे इन सब मामलो को मैनेज करता है प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी या वे खुद ही बता सकते हैं। इतने सारे केस होने के बावजूद भी इस कंपनी को प्रशासन का कोई डर नही है।

जी आई डी सी परिसर के आस पास के राहिवासी विस्तारो केलोगों के लिए यह लगातार खतरनाक साबित होती जा रही है , लोगों में बीमारियों के संकेत बढ़ते जा रहे हैं। यहां जानना जरूरी है कि पिछले कुछ महीने पहले ही इस कंपनी को क्लोजर नोटिस भी मिला था , कंपनी भी कुछ दिनों के किए बंद भी हुई थी ,फिर भी स्थानीय कंपनी मैनेजमेंट केवल सेटिंग के बदौलत जल्द जल्द से शुरू कर दी गई।
इन सभी हालतो को देखते हुए साफ होता है कि गुजरात पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और सेंट्रल पोलूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों की मिली भगत के कारण ही स्थानीय कंपनी प्रबंधन के कानो पर जूं रेंगते नही दिखाई पड़ती।
