कंपनी के निदेशक जिग्नेश वजीर भाई पटेल और अनिल जायसवाल के विरुद्ध मामला दर्ज कर न्यायिक जांच करने की मांग
कृष्ण मिश्र ” गौतम”
वलसाड,
देश में कई तरह के चिटफंड घोटाले सुनने को मिलते रहे हैं, कई मामलों में कानूनी फैसले दिए गए हैं और कई अदालतों में लंबित हैं।

वलसाड जिले में एक नए तरह का चिटफंड घोटाला सामने आया है, जिसमें गौ माता के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये ठगे गए हैं । लोगों से हर महीने निश्चित राशि लेकर निर्धारित अवधि में गीर गाय का लालच साथ में गौ से उत्पादित सामानों के विक्री का लालच दे कर योजना के तहत पैसे जमा कराए गए। कुछ समय तक लोगों को पैसे लौटाए गए , लेकिन बाद में पैसे देने में आनाकानी करने लगे।

गुजरात के चिखली, नवसारी से वर्ष 2011 में रजिस्टर्ड गौरस मल्टी ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने लोगों को धोखा देकर और बड़े-बड़े सपने दिखाकर एक चेन स्कीम के तहत हर महीने पैसे जमा कराए , लेकिन समय सीमा के बाद पैसे वापस नहीं लौटाए।

आपको बता दें कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अनुसार, दोनों आरोपी निदेशक जिग्नेश भाई वजीरभाई पटेल, सुखाला, कपराडा, जिला वलसाड के निवासी और अनिलभाई रामनरेश जयसवाल, सूरत के निवासी हैं। इसके अलावा कंपनी की कोर कमेटी के सदस्य वंतिकभाई पटेल, धीरूभाई पटेल, महेंद्रभाई पटेल, सुभाषभाई पटेल थे।

शिकायतकर्ता योगेश भाई बाबूभाई पटेल,निवासी वलसाड , सुनील भाई अरविंद भाई पटेल ,मनिषभाई पटेल , नितिन भाई पटेल , विपुल भाई हलपति और अन्य पीड़ितों द्वारा पारडी पुलिस स्टेशन में आईपीसी 420 के तहत गौरस मल्टीट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के दोनों निदेशकों के खिलाफ पारडी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर मामले में न्यायिक जांच की मांग की है । साथ ही पुलिस और सरकार से न्याय की गुहार लगाई.
पूरे मामले में शिकायतकर्ता के साथ एडवोकेट रूपेश राठौड़ और एडवोकेट हेमंत पटेल उनकी मदद के लिए आए और कानूनी सहायता प्रदान की.
बता दें की ऐसे चिटफंड में सैकड़ों गरीब लोग आते हैं और कम समय में अधिक पाने के लालच में खुद को नुकसान पहुंचाते हैं।

शिकायतकर्ता के वकील रूपेश राठौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि कंपनी ने भोले-भाले लोगों के साथ खिलवाड़ करते हुए वापी, वलसाड और आसपास के इलाकों के लोगों से 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाकर गांव में छोटी-मोटी नौकरी करने वाले लोगों से उनकी मेहनत की कमाई निवेश कराकर उन्हें डेयरी उद्योग करने के नाम पर मैच्योरिटी पर पैसा और गीर गाय देने का झांसा दिया। 2016 के बाद कंपनी के दोनों निदेशक लगातार लोगों को गुमराह कर रहे थे, पैसे देने के नाम पर तरह-तरह के बहाने बना रहे थे।
