प्रशासन से गुहार , राजनीतिक रसूख का हो रहा है गलत इस्तेमाल , बदतर हालत में जीने को मजबूर हैै स्थानीय किसान

जागरण न्यूज , एजेंसी , बंगाल
संदेशखाली, पश्चिम बंगाल में एक छोटा सा द्वीप है, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी रहते हैं। जनसंख्या करीब 12 हजार के आसपास है यहां दो ब्लॉक हैं जिसमे संदेशखाली 1 और संदेशखाली-2
स्थानीय आदिवासी न्याय के लिए काफी लंबे अरसे से गुहार लगा रहे हैं। इन लोगों का आरोप है कि इन दो ब्लॉकों में राजनीतिक रसूख के चलते तृणमूल नेताओं शेख शाहजहां, उत्तम सरदार और शिबू हाजरा ने 10 हजार बीघा से अधिक कृषि भूमि को लीज के नाम पर कब्जा कर लिया है । किसानों की जमीन पर तालाब बना लिए और किसानों को मजदूर बनने पर मजबूर कर दिया है ।

हालात इस कदर हो चला है कि बच्चों के लिए खेल का मैदान, स्कूल और मंदिर की जमीन तक को नहीं छोड़ा। गांव के आदिवासी अपनी हालत पर तरस खा कर सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन उनकी गुहार का कोई फायदा दिखता नजर नही आ रहा है।
अपनी व्यथा सुनते हुए गांव के भुक्तभोगी ने बताया कि” हमारे पूर्वज 100 वर्षों से भी अधिक समय से यहां रह रहे हैं, लेकिन ऐसा अत्याचार और ऐसी घिनौनी राजनीति हमने कभी नहीं देखी। हम आदिवासी हैं। आज अपनी ही जमीन पर मजदूर बन गए। खाने के लाले पड़ गए। क्या हमको कभी न्याया मिलेगा??”

संदेशखाली नूतन पाड़ा के बुजुर्ग आसमान की ओर हाथ जोड़कर फफक कर रो पड़ते हैं। कहते हैं, राजनीतिक रसूख, पुलिस और प्रशासन के गठजोड़ ने हमको भीख मांगने पर मजबूर कर दिया। कहीं कोई सुनवाई नहीं है। हमारे ही गांव की करीब 225 बीघा जमीन पर लीज के नाम पर कब्जा कर लिया। जब पैसा मांगों तो लाठी-डंडों से पीटा जाता। न्याय मांगों तो गांव से बाहर निकालने की धमकी मिलती है। इस नर्क भरी जीवन से कब छुटकारा मिलेगा ??
उत्तम सरदार और शिबू हाजरा को मिलाकर तीनों की बात करें तो लगभग 12 से 15 हजार बीघा जमीन पर कब्जा किया हुआ है।

पीड़ित किसानों के मुताबिक, शेख शाहजहां ने अकेले पूरे संदेशखाली विधानसभा क्षेत्र में आठ से 10 हजार बीघा जमीन पर अवैद्य कब्जा कर रखा है। वही घुड़की धमकी देते हुए खुले आम कहते हैं, जहां जाना है जाओ, क्या कर लोगे । किसान कहते हैं, यहां पर किसान की कोई सुनावाई नहीं। ऊपर से लेकर नीचे तक तृणमूल कांग्रेस का बोलबाला है। सांसद तृणमूल का, विधायक तृणमूल का, ब्लॉक अध्यक्ष तृणमूल का। कृषि योग्य भूमि छीन कर तालाब बना लिए राजनीतिक ताकत, रसूख का तांडव और घमंड सातवें आसमान पर है।
वही पीड़ित महिला ने बताया कि पहले हम इन खेतों पर धान उगाते थे। इन तीनों ने पहले किसानों को जमीन देने का दबाव बनाया। जब आदिवासी किसान नहीं माने तो खेतों में नमकीन पानी डाल देते। इससे फसल नष्ट हो जाती है और जमीन भी बंजर हो जाती है । इसके वाद जोर- जबरदस्ती से लीज के नाम पर जमीन कब्जा कर (भेड़ी) तालाब बना दिए जाते है। जिसके एवज में किसानों को पैसे भी नहीं लौटाए जाते । इस द्वीप में लगभग 225 किसान मजदूर बन गए हैं।
मामले में काफी तूल पकड़ने के बाद राज्य बाल आयोग की टीम ने गांव में जा कर जांच की , जिसमे कई तरह के विभत्स आरोप सुनने को मिले , जो की राक्षस काल की याद दिलाता है।
