पैन इंडिया का लक्ष्य पांच वर्षों में २५,००० चिकित्सकों को प्रशिक्षित करना है।
कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने, पोषण संबंधी मौतों को कम करने और पर्यावरण संरक्षण प्रयासों में योगदान करने के लिए भागीदार संगठनों के साथ सहयोग करना है|
जागरण न्यूज ब्यूरो , मुंबई ,
फिजिशियन एसोसिएशन फॉर न्यूट्रिशन इंडिया (पैन इंडिया) ने 4 फरवरी को जेडब्ल्यू मैरियट, जुहू (मुंबई) में क्लिनिकल प्रैक्टिस में साक्ष्य आधारित पोषण (ईबीएन) की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करते हुए डॉक्टरों के लिए अपना 11वां स्वास्थ्य शिक्षा सेमिनार आयोजित किया। सेमिनार में पूरे भारत से चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र के लोगों की सक्रिय भागीदारी देखी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने, पोषण संबंधी मौतों को कम करने और पर्यावरण संरक्षण प्रयासों में योगदान करने के लिए भागीदार संगठनों के साथ सहयोग करना है|
स्वास्थ्य देखभाल का ध्यान अधिक निवारक दृष्टिकोण और पोषण, जीवनशैली पहले दृष्टिकोण पर स्थानांतरित करने की तत्काल आवश्यकता हैं क्योंकि भारत में एनसीडीएस पर भरी बोझ है, और वर्तमान में यह ६६% गैर संचारी रोगों का कारण है|

फिजीशियन एसोशिएशन फॉर न्यूट्रीशन इंडिया (पैन इंडिया) वैश्विक एनजीओ पैन इंटरनेशनल की भारतीय शाकाहारी है, जो पोषण को स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों का मुख्या हिस्सा बनाकर विशव स्तर पर आहार संबंधी मृत्यु को ख़त्म करने के मिशन पर है|
पैन इंडिया का लक्ष्य पांच वर्षों में २५,००० चिकित्सकों को प्रशिक्षित करना है, जो २५०-५०० मिलियन लोगों की खाने की आदतों को प्रभावित करेगा, वर्त्तमान में ३००० से अधिक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर पैन इंडिया से जुड़े हुए हैं और उन्होंने अपने चिकित्सा अभ्यास में इसके दृष्टिकोण को लहू किया है जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं|

कार्यक्रम के दौरान, डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों ने उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि जैसी जीवन शैली की बीमारियों को नियंत्रित करने और लौटाने में साक्ष्य आधारित पोषण उपचार को लागू करने की भूमिका पर चर्चा की। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा चिकित्सकों को इसे अपनाने के बारे में जागरूकता और प्रशिक्षण देना था। बीमारी के प्रति समग्र दृष्टिकोण जिसमें केवल गोलियाँ निर्धारित करना शामिल नहीं है बल्कि जीवन शैली और पोषण संबंधी खपत में बदलाव के माध्यम से इसे रोकना भी शामिल है|

मुंबई में सेमिनार को मुंबई के शीर्ष डॉक्टरों डॉ. रूपा शाह, डॉ. शारंग वार्तिकर और राजदूत डॉ. माधवी कठपाल और डॉ. अजॉय प्रभु ने संबोधित किया। पैन इंडिया की प्रोग्राम मैनेजर श्रुति शर्मा ने अन्य राज्यों और एम्स जोधपुर, एम्स नागपुर, एम्स बिलासपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों तथा बैंगलोर, कोयंबटूर, मैसूर, जलगांव और भरतपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पैन के प्रभाव पर प्रकाश डाला।

पैन इंडिया की चिकित्सा निदेशक डॉ. रजीना शाहीन ने कहा, “स्वास्थ्य देखभाल को अधिक निवारक दृष्टिकोण और पोषण या जीवनशैली पर प्राथमिक दृष्टिकोण केंद्रित करने की गंभीर आवश्यकता है, क्योंकि भारत में गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का भारी बोझ है। वर्तमान में ६६% मृत्यु दर अत्यधिक विकसित पश्चिमी दुनिया के विपरीत गैर-संचारी रोगों के कारण है। भारत में गैर-संचारी रोग (एनसीडी) बहुत कम उम्र में अपने गिरफ्त में ले लेते हैं, गैर-संचारी रोगों से पीड़ित भारतीय आबादी का २/३ हिस्सा २६-५९ आयु वर्ग में आता है, जो जीवन के सबसे अधिक उत्पादक वर्ष हैं|

उन्होंने आगे कहा, “अस्पताल की व्यवस्था में हम इतने बड़े बोझ से निपटने में सक्षम नहीं होंगे। भारत को एक स्थायी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की आवश्यकता है, जो विज्ञान और साक्ष्य पर आधारित हो। पैन इंडिया का मिशन पोषण विज्ञान में हाल की प्रगति का लाभ उठाकर स्वास्थ्य प्रणालियों में पोषण-विशिष्ट हस्तक्षेपों के एकीकरण की सुविधा प्रदान करना है। हमारा यह भी लक्ष्य है की नैदानिक अभ्यास में पोषण हस्तक्षेप को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रक्रियाओं, नैदानिक दिशानिर्देशों, उपकरणों और संसाधनों को सामने लाने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाय। पहले कुछ वर्षों में हम साक्ष्य आधारित पोषण पर डॉक्टरों को प्रशिक्षण और सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहें है|
पैन इंडिया की चिकित्सा सलाहकार डॉ. रूपा शाह ने कहा,

“स्वस्थ पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थों और सक्रिय जीवनशैली की शक्ति के बारे में चिकित्सा डॉक्टरों के बीच जागरूकता पैदा करना समय की जरूरत है। अब समय आ गया है कि स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों को नुस्खे से एक कदम पहले सोचना शुरू कर देना चाहिए। किसी जीवनशैली संबंधी बीमारी को प्रबंधित करने की तुलना में उसे रोकना कहीं अधिक आसान हैं|

पैन के सलाहकार डॉ. शारंग वार्तिकर ने कहा, “आबादी द्वारा पौधे आधारित भोजन की आदतों को व्यापक रूप से अपनाने से न केवल मनुष्यों बल्कि हमारे ग्रह के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। पशु कृषि वनों की कटाई, समुद्री क्षति और प्रजातियों के विलुप्त होने का मुलभुत कारण है। पौधे-आधारित आहार पर अवलंबित्व होने से मानव उपयोग के लिए बड़ी मात्रा में भूमि, भोजन और पानी मुक्त हो जाएगा। और अगर हमारी वर्तमान पीढ़ी यह बदलाव नहीं करती है, तो अगली पीढ़ियों के लिए इस बारे में कुछ भी करने में बहुत देर हो सकती हैं|
पैन इंडिया की पैनलिस्ट, डॉ. रूपिंदर कौर मुरजानी, एक कैंसर सर्वाइवर की अपनी उल्लेखनीय रिकवरी कहानी साझा करते हुए कहती हैं, “कई वर्षों तक कैंसर से जूझने से मेरे शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ा, मेरी हड्डियाँ नाजुक हो गईं और मेरी एथलेटिक की आकांक्षाएँ भंग हो गई थी। अनगिनत सप्लीमेंट और आहार लेने के बावजूद, एक कोच का सुझाव था जिसने सब कुछ बदल दिया। धीरे-धीरे पौधों पर आधारित आहार अपनाने और डीटोक्सिफीकेशन को अपनाने के बाद, मैंने खुद में एक चमत्कारी परिवर्तन देखा। अब न शरीर में दर्द रहता है, न सूजन। अनार, क्रैनबेरी और संतरे का रस मेरी सुबह का अमृत बन गया है, जो मुझे अंदर से पोषण देता है। मेरे केमो उपचार के दौरान कैलोरी की कमी वाला आहार मेरा निरंतर साथी रहा हैं|
डॉ. रोहित मोदी, डॉ. माधवई कठपाल और डॉ. अजॉय प्रभु ने भी मरीजों के साथ अपने अनुभव और पैन मिशन से मेल खाने वाले अपने विचार साझा किए|
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
कप्तान रामजी माली, मिडिया सर्कल, कम्युनिकेशन्स- ९८२०३३४७४२.
पैन इंडिया के विषय में अधिक जानकारी के लिए https://pan-india.in/ पर जाएं

