जागरण न्यूज ब्यूरो,
500 वर्षो की तपस्या , संघर्ष , कानूनी दांव पेंच के बाद सर्वोच्च न्यायालय से फैसला आने के बाद श्री राम जन्मभूमि में 22 जनवरी को राम लला विराजेंगे। सरकार द्वारा इस कार्यक्रम के लिए अभूतपूर्व तैयारिया की जा रही है। भारत में ये कोई नई बात नही है , जब जब सनातन , हिंदुत्व , संस्कृति और आराध्य राम को लेकर कुछ भी किया जाता है , उसके पहले ही विपक्षी दलों द्वारा जनता में तरह तरह की भ्रांतिया फैला दी जाती है।
हाल के दिनों में अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र में प्रभु राम लला 22 जनवरी को विराजेंगे । लेकिन विपक्षी दलों और कुछ प्रायोजित संत से भी चुनावी मुद्दा से जोड़ कर आम जनमानस में भ्रांतिया उत्पन कर रहे हैं।
इन्ही भ्रांतियों को दूर करने जागरण न्यूज कुछ सच्चाई आपके सामने ले आया है , जिसमे जन्म तारीख सुनिश्चित करने वाले प्रकांड विद्वान ने बकायदा लिखित प्रमाण दिया है की, अगले ढाई वर्षों में ऐसी पुण्य बेला और मुहूर्त नही है।
पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ जी ने रामलला के प्राण प्रतिष्ठा का जो 22 जनवरी 2024 का मुहूर्त निकाला है वो सर्वोत्तम मुहूर्त है। यदि इस दिन यह कार्य संपन्न नहीं हुआ तो फिर जून 2026 तक अर्थात अगले ढाई वर्षो तक कोई ऐसा मुहूर्त नहीं मिल पा रहा है जो इस मुहूर्त की तुलना में अधिक शुभ हो।








इस तरह पत्र में सभी जवाबो का उत्तर देते हुए कहा गया है की , अगले 2.5 वर्षों तक रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के लिए इससे शुभ मुहुर्त नही है।
पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ जी ने रामलला के प्राण प्रतिष्ठा का जो 22 जनवरी 2024 का मुहूर्त निकाला है वो सर्वोत्तम मुहूर्त है। यदि इस दिन यह कार्य संपन्न नहीं हुआ तो फिर जून 2026 तक अर्थात अगले ढाई वर्षो तक कोई ऐसा मुहूर्त नहीं मिल पा रहा है जो इस मुहूर्त की तुलना में अधिक शुभ होपंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ जी ने रामलला के प्राण प्रतिष्ठा का जो 22 जनवरी 2024 का मुहूर्त निकाला है वो सर्वोत्तम मुहूर्त है। यदि इस दिन यह कार्य संपन्न नहीं हुआ तो फिर जून 2026 तक अर्थात अगले ढाई वर्षो तक कोई ऐसा मुहूर्त नहीं मिल पा रहा है जो इस मुहूर्त की तुलना में अधिक शुभ हो।
सनातन प्रेमी और श्री राम भक्त पंडित संपूर्णानंद तिवारी ने पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ जी को साधुवाद देते हुए कहा प्रभु राम के लिए राम भक्त ढाई साल का इंतजार असहनीय पीड़ा समान होता ।
पंडित संपूर्णानंद तिवारी
भगवान राम पहले से ही वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे हैं, उन्हें अनावश्यक और ढाई वर्ष तक प्रतीक्षा करवाने का कोई औचित्य नहीं है। हिन्दू समाज भी अपने श्रीराम को मन्दिर में यथाशीघ्र देखने के लिए अधीर हुआ जा रहा है। ऐसे में उसे और ढाई वर्ष की प्रतीक्षा करने के लिए कहना उसे मृत्युदण्ड देने के समान कष्टकारी है।
