जागरण न्यूज नेटवर्क ,

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“अटल सेतु विकसित भारत की तस्वीर है। यह एक झलक है कि विकसित भारत कैसा होगा। विकसित भारत में सबके लिए सुविधाएँ होंगी, सबकी समृद्धि होगी, गति होगी और प्रगति होगी। विकसित भारत में दूरियाँ कम होंगी और देश का हर कोना जुड़ेगा। चाहे जीवन हो या आजीविका, सब कुछ निरंतर, बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा। यह अटल सेतु का संदेश है, “पीएम मोदी ने पुल का उद्घाटन करने और नवी मुंबई में कई अन्य विकासात्मक परियोजनाओं की आधारशिला रखने के बाद कहा।

    मुंबई  , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश के सबसे लंबे समुद्री पुल अटल बिहारी वाजपेई शिवड़ी-न्हावा शेवा नामक अटल सेतु का उद्घाटन किया।

     इस पुल के निर्माण से मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी।

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देश के सबसे बड़े समुद्री पुल मुंबई ट्रांसहार्बर लिंक (एमटीएचएल) परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी ने दिसंबर 2016 में किया था। पुल का निर्माण 17,840 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। प्रधानमंत्री ने इस पुल को आम जनता के लिए खोल दिया। यह पुल लगभग 21.8 किमी लंबा और 6-लेन वाला है। यह पुल 16.5 किमी. समुद्र के ऊपर और करीब 5.5 किमी जमीन पर बना है। अब मुंबई से पुणे, गोवा और दक्षिण भारत की यात्रा में लगने वाला समय कम हो जायेगा। इस समुद्री पुल से मुंबई और नवी मुंबई की दूरी सिर्फ 20 मिनट में तय हो सकेगी। अभी दो घंटे का वक्त लगता था।

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पुल का उपयोग करने वाले यात्रियों को एक तरफ़ा टोल ₹250 का भुगतान करना होगा, साथ ही यह अनुमान लगाया गया है कि एमटीएचएल पर प्रतिदिन औसतन 70,000 वाहन चलेंगे। एमएमआरडीए का अनुमान है कि 2032 तक सेवरी-शिवाजी नगर/चिरले इंटरचेंज पर 1.33 लाख से अधिक वाहन होंगे, 2042 तक 2 लाख से अधिक वाहन होने का अनुमान है।

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   अटल सेतु के निर्माण में करीब 177,903 मीट्रिक टन स्टील और 504,253 मीट्रिक टन सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है। लगभग 17,840 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। इस पुल पर प्रतिदिन लगभग 70,000 वाहन अधिकतम 100 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चलेंगे और यह 100 वर्ष चलता रहेगा। मानसून के दौरान उच्च-वेग वाली हवाओं का सामना करने के लिए विशेष रूप से लाइटिंग पोल डिजाइन किए गए हैं। बिजली से होने वाली संभावित क्षति से बचाने के लिए लाइटिंग प्रोटेक्शन सिस्टम भी लगाया गया है। शिवड़ी से 8.5 किमी लंबा नॉइज बैरियर स्थापित किया गया है, क्योंकि पुल का हिस्सा फ्लेमिंगो प्रोटेक्टेड एरिया और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र से होकर गुजरता है। इस पुल को पूरा करने के लिए कुल 5,403 मजदूरों और इंजीनियरों ने प्रतिदिन काम किया।

बैंकों की बचत खाता स्कीम में अब भी भारतीयों का विश्वास कायम

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बैंकों का जमा सात साल में हुआ दोगुना, पहली बार पहुंचा 200 लाख करोड़ के पार

जागरण न्यूज नेटवर्क ,

भारत देश में भले ही बैंकों को लेकर तमाम तरह की धारणाएं बनाई जाती रही हो , लेकिन लोगों की बचत योजना में अब भी विश्वास बैंकिंग प्रणाली का ही है।

ताजा जानकारी के मुताबिक देश के बैंकों में जमा रकम सात साल में दोगुनी हो गई है। बैंकों की जमा राशि पहली बार 200 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई है। इससे समझ ता है कि 5-6 फीसदी ब्याज के बावजूद बैंकों में रकम जमा करने पर लोगों का भरोसा अब भी कायम है।

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आरबीआई द्वारा प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर, 2016 में बैंकों में कुल जमा रकम 100 लाख करोड़ रुपये थी। इसमें सालाना आधार पर 9.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। यह भारतीय बैंकों में जमा पैसे का सबसे कम समय में 100 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का आंकड़ा है। 29 दिसंबर, 2023 तक बैंक डिपाॅजिट का आंकड़ा 200.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

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वही यह 2022 के मुकाबले 13.2 फीसदी बढ़ा है। बैंक जमा में ऐसे समय में भी तेजी आई है, जब लोग बड़े पैमाने पर म्यूचुअल फंड और शेयरों में निवेश कर रहे हैं। शेयर बाजार का पूंजीकरण जहां 373 लाख करोड़ है, वहीं म्यूचुअल फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) यानी निवेशकों के निवेश का मूल्य पहली बार 50 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। फंड हाउसों का एयूएम 10 साल में छह गुना बढ़ा है। पिछले साल इसमें 10 लाख करोड़ की तेजी आई है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है की , 159.6 लाख करोड़ कर्ज भी हैै । आरबीआई के मुताबिक, बैंकों में जमा रकम में से 176 लाख करोड़ रुपये टर्म डिपॉजिट व बाकी पैसा बचत एवं चालू खाते में है। बैंकों ने इस दौरान 159.6 लाख करोड़ रुपये कर्ज दिया है। इसमें 2022 के मुकाबले करीब 20 फीसदी इजाफा हुआ है। साल 1997 में बैंकों में जमा रकम 5.1 लाख करोड़ थी। चार साल में यह 10 लाख करोड़ हो गई। इसके बाद मार्च, 2006 में यह रकम दोगुनी होकर 20 लाख करोड़ हो गई। मार्च, 2006 से जुलाई, 2009 के बीच सबसे तेजी से बढ़कर यह आंकड़ा लाख करोड़ 200.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

डोंबिवली के रिहायशी बिल्डिंग में लगी भीषण आग ,दमकल की गाड़ियां मौके पर तैनात

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जागरण न्यूज नेटवर्क ,

महाराष्ट्र में मुंबई के ठाणे जिले से सटे डोंबिवली के पास डाऊन टाऊन इमारत में आग लग गई। सूचना मिलते ही आ पास के दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पहुंची और आग को नियंत्रित करने में लग गई है।

मकर संक्रांति के एक दिन पहले इस भीषण आग ने स्थानीय लोगों को सहमा दिया है। ताजा घटना मुंबई से सटे डोंबिवली के पास खोनी पलावा की डाऊन टाऊन इमारत में भीषण आग लगी है।
बताया जा रहा है कि सातवे मंजिल पर शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसकी वजह से आग लगी। इस इमारत में तीसरी मंजिल तक लोग रहते हैं। पुलिस के मुताबिक, समय रहते सभी रहिवासियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की मौके पर 5 गाड़ियां पहुंची हैं। ये आग दोपहर करीब 2 बजे लगी थी।

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डाऊन टाऊन इमारत में इतनी भीषण आग बिल्डिंग के मीटर बॉक्स से फैली। इसके बाद ये आग केबल और वायर के ज़रिए बाकी फ्लोर के गैलरी एरिया में तक फैल गई। दमकल विभाग की मौके पर 5 गाड़ियों ने मिलकर फिलहाल आग पर काबू पा लिया है। राहत की बात है कि इसमें कोई भी शख्स फंसा नहीं है। इस इमारत में लगी आग भीषण है । नीचे की मंजिल से उठी आग की लपटों ने पूरी इमारत को ही अपने आगोश में ले लिया है।

पी. एन. दोशी महाविद्यालय , मुंबई में विश्व हिंदी दिवस पर कार्यक्रम संपन्न

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मुख्य अतिथि के तौर पर हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक सनोज मिश्र

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मुम्बई . घाटकोपर स्थित श्रीमती पी. एन. दोशी महिला महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक श्री सनोज मिश्रा उपस्थिति थे। विशेष अतिथि के रूप में यशोमणि के यशस्वी संपादक श्री ओम प्रकाश तिवारी तथा हिंदी प्रेमी एवं विशेषज्ञ श्री दीपक सोथा उपस्थित रहे।कार्यक्रम का आरंभ सरस्वती वंदना और विश्वविद्यालय गीत से हुआ।

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कार्यक्रम की प्रस्तावना व अतिथि परिचय हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. वेदप्रकाश दुबे ने दिया। साथ ही उन्होंने विश्व हिन्दी दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। अतिथियों का स्वागत शॉल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ और तुलसी का पौधा देकर किया गया। स्वागत वक्तव्य प्राचार्या डॉ. आशा मेनन ने हिंदी भाषा को सबको जोड़ने वाली भाषा बताया और हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. वेदप्रकाश दुबे को ऐसे ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों के लिए बधाई दिया और इसे हिंदी के उत्थान के लिए अनिवार्य बताया।

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उपप्राचार्या डॉ. माधुरी वैद्य ने हिंदी के विद्यार्थियों के लिए रोजगार के नए आयामों पर चर्चा की और हिंदी के बढ़ते वर्चस्व पर अपनी बात रखी। ओमप्रकाश तिवारी ने अपने वक्तव्य में हिंदी के महत्व को बताते हुए छात्राओं को लिखने के लिए प्रेरित किया।

हिन्दी प्रेमी दीपक सोथा ने अपने वक्तव्य में छात्राओं का उत्साहवर्धन किया और हिंदी के प्रति अपने लगाव को व्यक्त किया।

समारोह के मुख्य अतिथि सनोज मिश्रा ने हिंदी और सिनेमा के विभिन्न पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डाला। उन्होंने लेखन के क्षेत्र में हिंदी के महत्व को उजागर किया। उनका हिंदी के प्रति प्रेम इतना ज्यादा है कि वे अपने फ़िल्म के सेट पर किसी को भी विदेशी भाषा में बात नहीं करने देते।

छात्राओं की रुचि को देखते हुये उन्होंने लेखन के कई माध्यमों की चर्चा की जिससे नवांकुर भी अपने कौशल का प्रदर्शन कर सके।

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कार्यक्रम का संयोजन महाविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. वेदप्रकाश दुबे ने किया । कार्यक्रम का संचालन रश्मि मिश्रा और आभार ज्ञापन चांदनी गुप्ता ने किया। विभाग की सहयोगी शिक्षकों डॉ. जनकनंदिनी त्रिपाठी और डॉ. राजश्री चौरसिया के अलावा विद्यार्थियों के समिति हिंदी साहित्य सभा के सभी पदाधिकारी एवं सदस्यों का विशेष योगदान कार्यक्रम के लिए रहा।

पूर्व में मिलने वाली रियायतों के प्रश्न पर जवाब को घुमा कर बोले रेलमंत्री  , सभी को दे रहे 55% छूट – रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव

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अहमदाबाद ब्यूरो रिपोर्ट ,

       गुरुवार को अहमदाबाद में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब मीडियाकर्मियों ने जब ये सवाल उठाया तो सवाल का सीधा उत्तर देने से बचते हुए आंकड़ों का खेल खेलते हुए वैष्णव ने कहा, “अगर किसी गंतव्य के लिए ट्रेन टिकट की कीमत 100 रुपये है, तो रेलवे केवल 45 रुपये ले रहा है। वह 55 रुपये की रियायत दे रहा है।”

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गौरतलब है की कांग्रेस सरकार द्वारा तथा तत्कालीन  रेल मंत्री ममता बनर्जी ने देश के सभी मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए बड़ी रियायत दी थी।  मार्च 2020 में लगाए गए कोविड-19 लॉकडाउन से पहले, रेलवे वरिष्ठ नागरिकों और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों को ट्रेन किराए में 50 प्रतिशत की छूट देती थी।

  वरिष्ठ नागरिकों को केंद्र सरकार द्वारा जमाने से चली आ रही छूट को दोबारा लागू करना चाहिए । स्लीपर के साथ वरिष्ठ नागरिकों के लिए एसी कोच में भी आरक्षण आसानी से मिल सके , इसकी व्यवस्था होनी चाहिए। ताकि यात्रा के दौरान उन्हें दिक्कतों से निजात मिल सके।  जीएसटी समेत अन्य टैक्सो से हो रही कमाई में लगातार इजाफा हो रहा है , वहां सरकार को कम से कम इस मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है , खासकर गरीब वर्ग को इससे काफी राहत मिल सकती है।

                          – राम तीर्थ मिश्र , वरिष्ठ नागरिक

लॉकडाउन के दौरान रेलवे परिचालन पूरी तरह से बंद कर दिया गया था, लेकिन जब जून 2022 में इसे पूरी तरह से फिर से शुरू किया गया, तो रेल मंत्रालय ने इन रियायतों को बहाल नहीं किया और तब से यह मुद्दा संसद के दोनों सदनों सहित विभिन्न प्लेटफार्मों पर उठाया गया है। वैष्णव ने लोकसभा और राज्यसभा में कई मौकों पर सांसदों की ओर से उठाए गए सवाल पर इसी तरह का रुख बनाए रखा था।

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गुरुवार को अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति की समीक्षा के दौरान मीडियाकर्मियों ने जब ये सवाल उठाया तो वैष्णव ने कहा, “अगर किसी गंतव्य के लिए ट्रेन टिकट की कीमत 100 रुपये है, तो रेलवे केवल 45 रुपये ले रहा है। वह 55 रुपये की रियायत दे रहा है।”

बता दें कि,  मध्य प्रदेश के चंद्र शेखर गौड़ की ओर से दायर एक आरटीआई आवेदन का जवाब देते हुए, भारतीय रेलवे ने बताया कि उसने वित्तीय वर्ष 2022-23 में लगभग 15 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों से लगभग 2,242 करोड़ रुपये की कमाई की।

हिंदी दुनिया के लिए ज़रूरी भाषा बनती जा रही है – ग्रेग पार्डो

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हिंदी पत्रकार भवन के लिए महाराष्ट्र सरकार मुंबई में जमीन देने वचनबद्ध – राधा कृष्ण विखे पाटिल

संवाददाता द्वारा ,

मुंबई।

मुंबई में अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास के प्रवक्ता ग्रेग पार्डो ने हिंदी भाषा की खासियत का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी दुनिया के लिए जरूरी भाषा बनती जा रही है। भारत को जानने के लिए हिंदी जरूरी है और यही वजह है कि पिछले कुछ साल से अमेरिका से बड़ी संख्या में छात्र हिंदी सीखने के लिए भारत आ रहे हैं।

 

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विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर मुंबई हिंदी पत्रकार संघ की ओर से बुधवार की शाम बांद्रा (पूर्व) के उत्तर भारतीय संघ भवन हॉल में आयोजित हिंदी सेवा सम्मान एवं स्मारिका विमोचन समारोह में सम्मानित होने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए अभिनेता आशुतोष राणा ने कहा कि हिंदी भाषा को अगर हम गरिमा प्रदान करगें तो वह भी हमें गरिमा प्रदान करेगी।

हिंदी भाषा को अगर हम गरिमा प्रदान करगें तो वह भी हमें गरिमा प्रदान करेगी।

                   – आशुतोष राणा

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कौशल विकास व रोजगर पालकमंत्री, मुंबई उपनगर मंगल प्रभात लोढा ने कहा कि हिंदी जबान बहुत प्यारी और मीठी होती है, जो इसके संपर्क में आता है उसे हिंदी फेविकोल की तरह पकड़ कर अपना बना लेती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश बहुत आगे बढ़ रहा है। ऐसे में हमें उम्मीद ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि देश के विकास के साथ राजभाषा हिंदी का भी विकास होगा।

     हिंदी जबान बहुत प्यारी और मीठी होती है, जो इसके संपर्क में आता है उसे हिंदी फेविकोल की तरह पकड़ कर अपना बना लेती है।

                  – मंगल प्रभात लोढ़ा

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विधायक राजहंस सिंह ने कहा कि हिंदी ही एक ऐसी भाषा है, जो सभी दिलों को जोड़ने का काम करती है। यह किसी से किसी को तोड़ने की बात नहीं करती। उन्होंने आज का यह कार्यक्रम पत्रकारों का है। पत्रकार बुद्धिजीवी होते हैं। पत्रकारों के हाथ में जो कलम होती है,वह कलम नहीं तलवार है। पत्रकार अपनी विश्वसनीय खबरों से सरकार को हिलाने का काम करते हैं।

हिंदी ही एक ऐसी भाषा है, जो सभी दिलों को जोड़ने का काम करती है। यह किसी से किसी को तोड़ने की बात नहीं करती।

                        – राजहंस सिंह

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सांसद मनोज कोटक ने कहा कि हिंदी साहित्य का प्रभाव इस शहर पर बहुत है। हिंदी का प्रयोग अच्छे कार्य के किए किया जाना चाहिए न कि राजनीति के लिए। उन्होंने कहा कि पत्रकर कलम का धनी होता है। उसके हाथ में कलम होती तलवार नहीं। पत्रकार का कार्य है रचनात्मक कार्यों में सहयोग देना। पूर्व मंत्री व प्रदेश कांग्रेस कार्याध्यक्ष नसीम खान ने कहा की हिंदी के लिए कार्य करने वालों को आगे लाने की पहल अच्छी है। मंत्री कृपाशंकर सिंह ने कहा की हिंदी सबकी भाषा है।

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वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार सुदर्शना द्विवेदी ने कहा कि आज मुझे बहुत खुशी हो रही है कि 45 साल की पत्रकारिता की सेवा करने के बाद पहली बार मुझे मुंबई हिंदी पत्रकार संघ की ओर से सम्मानित किया जा रहा है। लेकिन दुःख के साथ मुझे कहना पड़ रहा है कि हिंदी पत्रकारों को वह सम्मान और हक नहीं मिला, जिसका वे असली हकदार हैं।

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मुंबई हिंदी पत्रकार संघ की तरफ से योगायन समूह के प्रमुख डॉ राजेंद्र प्रताप सिंह, अभिनेता आशुतोष राणा, छत्तीसगढ़ साहित्य परिषद के संरक्षक डॉ राजाराम त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार सुदर्शना द्विवेदी और अमेरिकन महा वाणिज्य दूतावास के प्रवक्ता के ग्रेग पार्डो को हिंदी भाषा के विकास में योगदान के लिए हिंदी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया। इस दौरान कई सामाजिक, साहित्यिक, अभिनय कला क्षेत्र और राजनैतिक क्षेत्र के जानी-मानी विभूतियों को ने सम्मानित किया।

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इस अवसर पर उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष संतोष आर एन सिंह, मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष अमरजीत सिंह, आचार्य पवन त्रिपाठी, प्रदेश भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा के अध्यक्ष संजय पांडेय, मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के अध्यक्ष आदित्य दुबे, महासचिव विजय सिंह कौशिक, उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र मिश्र, कार्यकारिणीस सदस्य हरगोविंद विश्वकर्मा, सैयद सलमान, अशोक शुक्ला, अखिलेश तिवारी व अखिलेश मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार अनुराग त्रिपाठी, हेमंत तिवारी, सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन  तथा आभार संस्था के कोषाध्यक्ष सुरेंद्र मिश्र ने व्यक्त किया।

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हिंदी पत्रकार भवन के लिए सरकार मुंबई में देगी जमीन

    महाराष्ट्र के राज्य के राजस्व और पशुपालन, डेयरी विकास मंत्री तथा कार्यक्रम के उद्घाटक राधाकृष्ण विखे पाटिल ने हिंदी पत्रकारों के समक्ष होने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दूसरों की खोज-खबर लेने वाले मुंबई हिंदी पत्रकार संघ का खुद का भवन नहीं है, इसलिए सरकार ने संघ को भवन के लिए जमीन देने की घोषणा की। उनकी इस घोषणा से पूरा हाल तालियों से गूंज उठा।

 

 

राष्ट्रीय युवा दिवस , 2024  हार्दिक बधाई

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Jagrannews समूह राष्ट्रीय युवा दिवस पर महान विभूति धर्म प्रचारक स्वामी विवेकानंद की जयंती पर नमन करता है।

प्रतिवर्ष 12 जनवरी को आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाई जाती है। स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके बताए विचारों को अपनाकर जीवन को सरल और सफल बनाने में मदद मिल सकती है। इसी कारण विवेकानंद जी की जयंती को युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद का पूरा जीवन ही सीख लेने योग्य है। 25 वर्ष की आयु में सांसारिक मोह माया त्याग कर वह संन्यासी बन गए। गुरु रामकृष्ण परमहंस को समर्पित रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।

एक बार अमेरिका के शिकागो में धर्म संसद का आयोजन हुआ तो हिंदी में भाषण देकर स्वामी विवेकानंद ने हर भारतीय का गौरव बढ़ाया। उनके विचारों को सफलता के मूलमंत्र के रूप में जीवन में आत्मसात किया जा सकता है।

शक्ति ही जीवन है, कमजोरी ही मृत्यु है। विस्तार ही जीवन है, संकुचन ही मृत्यु है। प्रेम जीवन है, घृणा मृत्यु है।” – स्वामी विवेकानंद

भारत में 19वी सदी में जब अंग्रेजी शासन का बोल-बाला था और दुनिया हमें हेय दृष्टि से देखती थी। उस समय भारत माता ने एक ऐसे लाल को 12 जनवरी 1863 में जन्म दिया, जिसने भारत के लोगों का ही नहीं पूरी मानवता का गौरव बढ़ाया। स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय बताता है कि उन्तालीस वर्ष के संक्षिप्त जीवनकाल में स्वामी विवेकानन्द जो काम कर गये, वे आने वाली अनेक शताब्दियों तक पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। आज जब हम स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस 12 जनवरी को युवा दिवस के रूप में मनाते हैं तो यह हमारे लिए गर्व का विषय है।

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स्वामी विवेकानंद के गुणों की बात करें तो वे एक ऐसा युवा थे, जिन्‍होंने अपने छोटे से जीवन में न सिर्फ़ भारतवर्ष को जाग्रत किया, बल्कि विश्व में भारतवर्ष के अद्भुत धर्म शास्त्रों का परचम लहराया। सनातन हिंदू धर्म की ध्वजा को उन्होंने बड़ी ही कुशलता व श्रेष्ठता के साथ विश्व के सामने लहराया। यह सब करना इतना भी आसान नहीं था, जबकि भारत में ही उनके अनेकों दुश्मन हो गए थे। पर स्वामी विवेकानंद ने भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान के बल पर अंततः विश्व की बड़ी संख्या का दिल जीत लिया। यह सब इसलिए हुआ कि वे भारतवर्ष में बहुत घूमे साथ ही दुनिया के कितने ही देशों में लोगों के बीच जाकर अपने सच्चे सनातन धर्म की बात कहीं। वे सिर्फ़ हिमालय की कंदराओं में बैठकर ध्यान करने वाले योगी नहीं थे, वे जनमानस के बीच रहकर आध्यात्म की लौ जगाने वाले योगी थे। उन्हें पता था कि खाली पेट भजन नहीं हो सकता है।

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स्वामी विवेकानंद विश्व के सबसे बड़े धर्म सम्मेलन 11 सितम्बर 1893 अमेरिका में अपने आध्यात्मिक ज्ञान के बलबूते पर ही गए थे। भारत के इस क्षत्रिय सन्देश वाहक की चिंतनधारा की अमेरिका पर गहरी छाप पड़ी। इस गुण के अलावा उनके पास उस समय कुछ नहीं था। लेकिन यह शक्ति कोई साधारण नहीं थी। उनके इस गुण में भारतवर्ष की हजारों वर्षों की आध्यात्मिक ऊर्जा सिंचित थी। वे भारतीय आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत थे। वे भारत के प्राचीन साहित्य व अपने समय के यथार्थ को भलीभांति जानते थे।

स्वामी विवेकानंद जी भारतवर्ष के अपने समय के ज्ञान रूपी सूर्य से कम नहीं थे। वे वेदों व प्राचीन भारतीय शास्त्रों के ज्ञाता थे। उनकी स्मरण शक्ति अद्भुत थी। उनके बतायें मार्ग व दर्शन से भारत में नवजागरण हुआ और आजतक वे युवाओं के लिए महानायक है।

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उन्होंने अपने गुरू रामकृष्ण परमहंस जी से सच्ची शिक्षा प्राप्त कर सबसे पहले भारत को जाना। शुरुआत में अपने गुरू की कितनी ही बातों का वे विरोध करते थे। वे इतनी आसानी से अपने गुरू की बातें भी स्वीकार नहीं करते थे। वे हर बात व तथ्य को कसौटी पर कसते हुए उसकी गहराई तक जाते थे। इसलिए ही बाद में उन्होंने कहा कि “स्वयं पर विश्वास करो।” वे हमेशा कहते थे किसी भी बात पर आंख मूंदकर भरोसा मत करो, उसे स्वयं से जानों। वे भारतीय प्राचीन ज्ञान की शक्ति की क्षमता को जान गए थे। जिसके लिए वे भारत को जानने के लिए वे भारत के कौने-कौने में गए। आम लोगों के बीच रहे। उनके दुख दर्द को जाना। भारत की वास्तविक शक्ति व गुण को पहचाना। सैकड़ों वर्षों की दासता के बाद उन्होंने भारतीयों को जागृत किया कि अपनी मूल शक्ति आध्यात्म की ओर लौटो। वेद व प्राचीन आध्यात्मिक शक्ति को पहचानों। आत्मनिर्भर बनो। उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाए।

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स्वामी विवेकानंद के बारे में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने कहा था-“यदि आप भारत को जानना चाहते हैं तो विवेकानन्द को पढ़िये। उनमें आप सब कुछ सकारात्मक ही पायेंगे, नकारात्मक कुछ भी नहीं।” रोमां रोलां ने उनके बारे में कहा था-“उनके द्वितीय होने की कल्पना करना भी असम्भव है, वे जहाँ भी गये, सर्वप्रथम ही रहे। हर कोई उनमें अपने नेता का दिग्दर्शन करता था।

वे ईश्वर के प्रतिनिधि थे और सब पर प्रभुत्व प्राप्त कर लेना ही उनकी विशिष्टता थी। हिमालय प्रदेश में एक बार एक अनजान यात्री उन्हें देख ठिठक कर रुक गया और आश्चर्यपूर्वक चिल्ला उठा-‘शिव!’ यह ऐसा हुआ मानो उस व्यक्ति के आराध्य देव ने अपना नाम उनके माथे पर लिख दिया हो।”

देश की उन्नति–फिर चाहे वह आर्थिक हो या आध्यात्मिक–में स्वामी विवेकानंद शिक्षा की भूमिका केन्द्रिय मानते थे। भारत तथा पश्चिम के बीच के अन्तर को वे इसी दृष्टि से वर्णित करते हुए कहते हैं, “केवल शिक्षा! शिक्षा! शिक्षा! यूरोप के बहुतेरे नगरों में घूमकर और वहाँ के ग़रीबों के भी अमन-चैन और विद्या को देखकर हमारे ग़रीबों की बात याद आती थी और मैं आँसू बहाता था। यह अन्तर क्यों हुआ ? जवाब पाया – शिक्षा!”

स्वामी विवेकानंद का विचार था कि उपयुक्त शिक्षा के माध्यम से व्यक्तित्व विकसित होना चाहिए और चरित्र की उन्नति होनी चाहिए। सन् १९०० में लॉस एंजिल्स, कैलिफ़ोर्निया में दिए गए एक व्याख्यान में स्वामी यही बात सामने रखते हैं, “हमारी सभी प्रकार की शिक्षाओं का उद्देश्य तो मनुष्य के इसी व्यक्तित्व का निर्माण होना चाहिये। परन्तु इसके विपरीत हम केवल बाहर से पालिश करने का ही प्रयत्न करते हैं। यदि भीतर कुछ सार न हो तो बाहरी रंग चढ़ाने से क्या लाभ ? शिक्षा का लक्ष्य अथवा उद्देश्य तो मनुष्य का विकास ही है।

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जीवन के अन्तिम दिनों में उन्होंने शुक्ल यजुर्वेद की व्याख्या की और कहा-“एक और विवेकानन्द चाहिये, यह समझने के लिये कि इस विवेकानन्द ने अब तक क्या किया है।” इस बात में बहुत गहराई थी, वे जैसा कि कहते थे एक विवेकानंद से कुछ नहीं होगा। वे अपने जैसे विचारों वाले युवाओं का एक बड़ा दल संगठित करना चाहते थे। जो भारत की गरीबी को मिटाने में पूर्ण रूप से समर्पित हो। भारत की अपनी यात्राओं में उन्होंने गरीबी को देखा था। जिससे वे बहुत दुखी भी रहे। पश्चिम का वैभवशाली भौतिक वातावरण उन्हें कभी आकर्षित नहीं कर पाया, क्योंकि वे भारत भूमि के सच्चे राष्ट्र भक्त थे। इसलिए ही वर्षों से निद्रा में पड़े भारतीयों को वे जगाना चाहते थे। वे अच्छे से जानते थे कि यदि यह भारतीय जाग गया तो विश्व का कल्याण ही होगा। वे हमेशा युवाओं के लिए आदर्श रहे।

Winter special Gajar ka Halwa
गाजर का हलवा

 

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सौम्या मिश्रा

सर्दी में गाजर का हलवा सभी घर में जरुर बनता है और सबका favorite होता है…कुछ tips को follow कर के आप भी बिलकुल हलवाई जैसा गाजर का हलवा घर में बना सकते है…

   सिर्फ स्वाद ही नहीं सेहत के गुणों से भी भरपूर है गाजर का हलवा, जानें इसके फायदे
  • हेल्दी फैट्स गाजर के हलवे में घी डाला जाता है, जो हेल्दी फैट्स से भरपूर होता है। …
  • पोषक तत्वों का खजाना …
  • इम्यूनिटी मजबूत …
  • ग्लोइंग त्वचा …
  • फाइबर से भरपूर

तो आइए बनाने की विधि जानते हैं, जो बहुत ही आसान है।

सामग्री-
500 g कद्दूकस गाजर
100 g खोया
250 g चीनी
1/2 कप कटे हुए ड्राईफ्रूट
1 चम्मच इलायची पाउडर
1/2 कप घी
1/2 लीटर दूध

रेसिपी– कढ़ाई में घी गरम करे और गाजर डाल कर भुने.10 मिनट भुनने के बाद दूध मिलाये और पकाये.गाजर पकने पर चीनी डाले और पानी सुखने तक हिलाए हुए पकाये.खोया और ड्राई फ्रूट मिला दे. हलवा तैयार.गाजर का हलवा

1.गाजर के हलवे के लिए हमेशा गाजर अच्छी quality की और dark colour की ले.

2. गाजर कद्दूकस करते समय बीच का part हटा दे..वो जरा हलके रंग का होता है . उसको use करने से colour अच्छा नहीं आता …हमे गाजर का ऊपर का part ही use करना है .

3.कढ़ाई में सबसे पहले घी में कद्दुकस गाजर को 10-15 मिनिट भूने.. उस से गाजर का colour dark red हो जाता है.

4.उसके बाद दूध में पकाना है और उसके बाद sugar मिलानी है.. sugar मिलाने पर colour और अच्छा हो जाता है… आखिर में मावा और घी में भुने dry fruits मिलाने है.

5. आप चाहे तो अच्छे colour के लिए एक छोटा टुकड़ा चुकन्दर का कद्दूकस कर के भी गाजर के हलवे में मिला सकते है… बहुत अच्छा colour आता है
फिर देखिये आपका गाजर का हलवा बिलकुल हलवाई के जैसे अच्छा और स्वादिष्ट बनेगा।

मिलते हैं अगली कड़ी में  कुछ नए रेसिपी के साथ , जुड़े और पढ़ते रहिए Jagrannews.co.in

“विश्‍व मित्र” के रूप में आगे बढ़ रहा भारत – नरेंद्र मोदी

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“Goal is to make India developed country in next 25 years,” PM Modi at Vibrant Gujarat Summit

राज्य के विकास में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट की महत्वपूर्ण भूमिका

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में कहा कि तेजी से बदलती विश्व व्यवस्था में भारत विश्व मित्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया भारत को स्थिरता के एक महत्वपूर्ण स्तंभ और वैश्विक अर्थव्यवस्था में विकास के इंजन के रूप में देखती है।

गांधीनगर के महात्मा मंदिर में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2024 के 10वें संस्करण के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने अगले 25 वर्षों में भारत को एक विकसित देश बनाने का लक्ष्य रखा है।

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प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-यूएई संबंधों में तेज वृद्धि के लिए यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि भारत और यूएई ने फूड पार्क के विकास, नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग और नवीन स्वास्थ्य देखभाल में निवेश के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत के बंदरगाह बुनियादी ढांचे के लिए यूएई की कंपनियां अरबों डॉलर के निवेश पर सहमत हुई हैं। भारत और यूएई अपने रिश्ते को नई ऊंचाइयों पर ले गए हैं।

दुनिया भारत को स्थिरता के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देखती है। एक मित्र जिस पर भरोसा किया जा सकता है, एक भागीदार जो लोगों के केंद्रित विकास में विश्वास करता है, एक आवाज जो वैश्विक भलाई में विश्वास करती है, और वैश्विक दक्षिण की एक आवाज के रूप में देखती है।

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प्रधानमंत्री  मोदी ने कहा, “आज भारत दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जबकि 10 साल पहले भारत 11वें स्थान पर था। आज दुनिया की हर प्रमुख रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि भारत अगले कुछ वर्षों में दुनिया की टॉप 3 इकोनॉमी में जाएगा। एक ऐसे समय में जब विश्व अनेक अनिश्चितताओं से घिरा हुआ है। तब भारत दुनिया में विश्वास की एक नई किरण बनकर उभरा है।

” उन्होंने आगे कहा, “आज तेजी से बदलते हुए वर्ल्ड आर्डर में भारत विश्वमित्र की भूमिका में आगे बढ़ रहा है। आज भारत ने विश्व को ये भरोसा दिया है कि हम साझा लक्ष्य तय कर सकते हैं, अपने लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। विश्व कल्याण के लिए भारत की प्रतिबद्धता, निष्ठा, प्रयास और भारत का परिश्रम आज की दुनिया को ज्यादा सुरक्षित और समृद्ध बना रहा है।”

बाज़ार के साथ विज्ञान और तकनीकी की भाषा बने हिन्दी

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प्रो. संजीव कुमार दूबे ,

अधिष्ठाता, भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अध्ययन संस्थान, गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय

नागपुर में पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन के आयोजन की तिथि 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस आयोजन से विश्व हिन्दी की अवधारणा का आग़ाज़ माने तो लगभग पचास साल से हम विश्व भाषा के रूप में हिन्दी की प्रतिष्ठा के प्रयास में लगे हुए हैं। अब तक 12 विश्व हिन्दी सम्मेलनों का आयोजन हो चुका है। चार साल के अंतराल पर आयोजित होने वाले पिछले विश्व हिन्दी सम्मेलन से अगले विश्व हिन्दी सम्मेलन के बीच विश्व भाषा के रूप में हिन्दी की प्रगति का ग्राफ़ उसी बिंदु पर ठस दिखना बताता है कि ठोस कार्रवाई की ज़रूरत है। विश्व भाषा के रूप में हिन्दी की प्रतिष्ठा की ज़िम्मेदारी सरकार से ज़्यादा हिन्दी भाषी जनता की है।

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आमतौर पर हिन्दी भाषियों में अपनी भाषा में बोलने-लिखने में हीनता बोध नज़र आता है तो दूसरी भारतीय भाषा सीखने में गहरी उदासीनता दीखती है। जब तक हिन्दी भाषियों में दूसरी भारतीय भाषा सीखने की ललक और अपनी भाषा बरतने का गौरव बोध नहीं जागृत होगा तब तक हिन्दी भाषा न तो देश की राष्ट्र भाषा का गौरव प्राप्त कर पाएगी न विश्व भाषा बन पाएगी।

हम भारतीय अपने लेखन और बोलचाल में कई भाषाओं और लिपियों का प्रयोग करते आ रहे हैं, लेकिन हिंदी एक ऐसी भाषा है जो हम सभी को आपस में जोड़कर रखती है और हिंदी की लिपि देवनागरी है. हम भारतीयों के लिए हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि यह हमारी पहचान है, इसमें हम अपनी भावनाएं जाहिर करने में बहुत ही समझ महसूस करते हैं, तभी तो हम बड़े गर्व से कहते हैं “हिंदी हैं हम”.

कुछ सतही राजनीतिक विरोधों को छोड़ दिया जाए तो हिंदीतर भाषियों और राज्यों में हिन्दी पर्याप्त स्वीकृति प्राप्त कर चुकी है। ज़रूरत है कि देश विदेश के वैज्ञानिक, तकनीकी एवं प्रबंधन क्षेत्र में सक्रिय हिन्दी भाषी अपने ज्ञान और अनुभव को हिन्दी भाषा में अभिव्यक्त करें। दूसरी ओर हिन्दी भाषा से भलीभाँति परिचित हिन्दी शिक्षक एवं अनुवादक दूसरी भाषाओं में लिखी ज्ञान के विविध अनुशासनों की पुस्तकों को हिन्दी में अनुदित करें। एक ऐसा विशाल ऑनलाइन मंच उपलब्ध कराया जाना चाहिए जहां कोई भी अपनी पुस्तक को हिन्दी अनुवाद के लिए उपलब्ध करा सके तथा बड़ी मात्रा में हिन्दी सेवी स्वेच्छा से अनुवाद कर सकें। इसी तरह एक दूसरा मंच संपादन के लिए बनाया जाए जहां पर अपलोड की गई हिन्दी सामग्री का स्वैच्छिक संपादन संभव हो। ध्यान रहे कि सिर्फ़ बाज़ार की भाषा बन जाने से हिन्दी विश्व भाषा नहीं बन सकती। ज्ञान विज्ञान की भाषा बन कर ही हिन्दी विश्व भाषा की अधिकारिणी बन सकेगी।

दुनिया के कोने -कोने में बसे भारतीय लोगों को अपने राष्ट्र के स्वाभिमान की भाषा के रूप में हिन्दी का व्यवहार करना होगा। दुनिया के किसी भी कोने में एक भारतीय की उपस्थिति को हिन्दी की उपस्थिति के रूप में सुनिश्चित कर के ही हिन्दी को विश्व भाषा बनाया जा सकता है। मनुष्य के लिए भाषा का मुद्दा व्यावहारिक ज़्यादा है भावनात्मक कम। व्यवहार और भावना में संतुलन साध कर ही अपनी भाषा को विश्व स्तर पर आगे बढ़ाया जा सकता है। भाषा हमारी अस्मिता से जुड़ी होती है, हमारी पहचान का ज़रिया होती है। मातृभाषा हमारी पारिवारिक-सामाजिक पहचान की भाषा है पर हमारी राष्ट्रीय पहचान की भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी को स्वीकार करने का संकल्प हर भारतवासी को लेना चाहिए ।

#Breaking News

शिवसेना एकनाथ शिंदे की ही है …..

एकनाथ ही बने रहेंगे सीएम ….

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महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक महत्वपूर्ण फैसला हुआ है , जहां उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका लगा है।  शिंदे गुट महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर की परीक्षा में पास हो गया ।

महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर  राहुल नार्वेकर ने शिंदे गुट को ही असली शिवसेना माना है. इसके साथ ही एकनाथ शिंदे और उनके गुट के विधायकों की सदस्यता रद्द नहीं की गई है. एकनाथ शिंदे ही महाराष्ट्र के सीएम बने रहेंगे. स्पीकर नार्वेकर का दावा है कि संविधान, कानून और चुनाव आयोग के फैसले को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है.

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कई विधायक छोड़ सकते हैं उद्धव ठाकरे का साथ

चुनाव आयोग पहले ही शिंदे कैंप को असली शिवसेना के तौर पर चुनाव चिह्न ‘तीर-कमान’ सौंप चुका है. अब ठाकरे गुट को स्पीकर से भी निराशा हाथ लगी है, जिसके चलते उनकी पार्टी के टूटने की आशंका है.  स्पीकर के फैसले के बाद कुछ विधायक उद्धव का साथ छोड़ सकते हैं. इतना ही नहीं, उद्धव ठाकरे के सामने आने वाले चुनाव में संगठन के सामने खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी.

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12 જાન્યુઆરીને શુક્રવારે ધરમપુરમાં વિવેકાનંદજીની જન્મજયંતિ નિમિત્તે યુવા રેલી અને યુવા સંમેલન

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યુવા સંમેલનમાં વિદ્યાર્થીઓને વલસાડના એસ.પી. ડો. કરણરાજ વાઘેલાજી અને સુરતના હરિકૃષ્ણ શાસ્ત્રીજી યુવાનોને સંબોધન કરશે

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ધરમપુર , વલસાડ , ગુજરાત,શ્રી

રામકૃષ્ણ વિવેકાનંદ સેવા સમિતિ ટ્રસ્ટ ધરમપુરના ઉપક્રમે આગામી તારીખ 12 જાન્યુઆરી અને શુક્રવારના દિને વિશ્વાચાર્ય સ્વામી વિવેકાનંદજીની 162મી જન્મજયંતી (રાષ્ટ્રીય યુવાદિન) નિમિત્તે સવારે 8.00 કલાકે યુવા રેલી અને બાદ યુવા સંમેલનનું આયોજન હાથ ધરાયુ છે જેમાં ધરમપુર નગરના અને તાલુકાની વિવિધ શાળા અને મહાશાળાના 2500 થી 3000 વિદ્યાર્થીમિત્રો ભાગ લેશે

શુક્રવારે સવારે 8.00 કલાકે સ્વામી વિવેકાનંદ સ્મારક સમડીચોક સ્થિત વિવેકાનંદજીની પ્રતિમા ખાતે નગરજનો અને શાળા પરિવાર દ્વારા પુષ્પાંજલિ અર્પણ કરવામાં આવેશે બાદ આયોજિત યુવા રેલીમાં વિદ્યાર્થીઓ અને શાળાના શિક્ષકો જોડાશે યુવારેલી નગરના સમડીચોક થઈ પ્રભુ ફળીયા, મોટાબજાર, ટાવર, ગાંધીબાગ, દશોન્દી ફળીયા, ડોક્ટર હેડગેવાર ચોક, ગાર્ડન રોડ, ડેપો, થઈ અંતે લક્ષ્મીનારાયણ મંદિર ખાતે સંપન્ન થશે.

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10.00 કલાકે લક્ષ્મી નારાયણ મંદિર ખાતે આયોજિત યુવા સંમેલનમાં ઉપસ્થિત વિદ્યાર્થીઓને વલસાડ એસ. પી. ડો. કરણરાજ વાઘેલાજી અને સુરતના હરિકૃષ્ણ શાસ્ત્રીજી સંબોધન કરશે અંતમાં યુવા વિધાર્થીઓના તમામ પ્રશ્નો માટે વિશેષ પ્રશ્નોતરી કાર્યક્રમ પણ યોજાશે, યુવા રેલી અને યુવા સંમેલનની સફળતા અર્થે તડામાર તૈયારીઓ ચાલી રહી છે.