पत्रकार वार्ता में एड शशांक मिश्रा ने मामले की परत दर परत खोलते हुए इस धोखाधड़ी के बारे में किया खुलासा
जागरण संवाददाता द्वारा,
वापी महानगरपालिका चुनाव के दौरान नामांकन में नकली दस्तावेज जमा करने के गंभीर आरोपों के बाद वलसाड कोर्ट के स्पष्ट आदेश पर डूंगरा पुलिस ने भाजपा के दो पार्षदो समसुद्दीन नुरुद्दीन चौधरी और सुनीता उमेशचंद्र तिवारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न कलमों के तहत FIR दर्ज कर दी है।

स्थानीय कांग्रेस के पदाधिकारियों महेश शाह , एड शशांक मिश्रा ने पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि वार्ड नंबर-3 से चुनाव लड़ने वाले दोनों मौजूदा पार्षदों ने शैक्षणिक योग्यता और पात्रता से जुड़े दस्तावेजों में धोखाधड़ी की, और इन्हीं “बोगस दस्तावेजों” के सहारे चुनाव जीतकर पद हासिल किया। पार्टी ने मांग की थी कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए, जिसके बाद मामला वलसाड कोर्ट पहुंचा।
वलसाड कोर्ट ने शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद डूंगरा पुलिस स्टेशन में दोनों पार्षदों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।
आखिर क्या है पूरा मामला –

शिकायत के अनुसार, वर्ष 2015 में शमसुद्दीन नुरुद्दीन चौधरी ने वापी तालुका पंचायत, छीरी वार्ड नंबर-2 से चुनाव लड़ा और निर्वाचित हुए। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उस समय शमसुद्दीन विधि अनुसार चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु से कम थे। आरोप है कि उन्हें चुनाव लड़ने के लिए पात्र दर्शाने के उद्देश्य से हिंदी विद्यामंदिर विद्यालय की तत्कालीन प्राचार्या सुनीता उमेशचंद्र तिवारी द्वारा एक कथित रूप से जाली एवं मनगढ़ंत स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट तैयार किया गया।
शिकायत में कहा गया है कि उक्त स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में शमसुद्दीन की जन्मतिथि 16 नवंबर 1994 दर्शाई गई, जिससे वे चुनाव लड़ने के लिए पात्र हो गए। शिकायत के अनुसार, शमसुद्दीन द्वारा प्रस्तुत चुनावी शपथपत्र (एफिडेविट) में यह भी उल्लेख किया गया है कि उन्होंने वर्ष 2007 में हिंदी विद्यामंदिर विद्यालय से केवल पांचवीं कक्षा तक अध्ययन किया था।
आरोप है कि इसी कथित जाली स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के आधार पर आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी), पैन कार्ड, पासपोर्ट सहित अन्य सरकारी दस्तावेज एवं अभिलेख प्राप्त किए गए।
इसके विपरीत, शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि शमसुद्दीन ने वास्तव में सेंट जेवियर्स स्कूल में दसवीं कक्षा तक अध्ययन किया था तथा विद्यालय के उपलब्ध रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि 13 नवंबर 1998 दर्ज है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि उक्त रिकॉर्ड सही माना जाए, तो वर्ष 2015 में चुनाव के समय शमसुद्दीन की आयु केवल 16 वर्ष 11 माह थी और वे चुनाव लड़ने के लिए विधिक रूप से अयोग्य थे।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2026 के वापी नगर निगम चुनाव में भी शमसुद्दीन ने उसी कथित स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट एवं उसी जन्मतिथि के आधार पर चुनाव लड़ा।
इस मामले में शिकायतकर्ता ने अपने अधिवक्ता शशांक मिश्रा के माध्यम से न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। 1 जून 2026 को न्यायालय ने डूंगरा पुलिस स्टेशन को मामले की जांच कर 14 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
इसके बाद डूंगरा पुलिस स्टेशन ने न्यायालय के समक्ष यह रिपोर्ट प्रस्तुत की कि मामला उनके क्षेत्राधिकार (Territorial Jurisdiction) से बाहर होने के कारण वे जांच करने में असमर्थ हैं।
मामले की पुनः 4 जुलाई 2026 को सुनवाई हुई, जिसमें अधिवक्ता शशांक मिश्रा ने क्षेत्राधिकार एवं कानून के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत दलीलें प्रस्तुत कीं। दलीलों एवं विधिक पहलुओं पर विचार करने के पश्चात न्यायालय ने डूंगरा पुलिस स्टेशन को निर्देश दिया कि वे मामले की जांच करें तथा यह भी स्पष्ट करें कि शिकायत में संज्ञेय अपराध के आरोप होने के बावजूद अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई। न्यायालय ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई 2026 निर्धारित किया।
इसी बीच, अगली सुनवाई से पहले 18 जुलाई 2026 की रात्रि में डूंगरा पुलिस स्टेशन द्वारा उक्त मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई।
बता दें ,2026 के वापी महानगरपालिका चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत(37 सीटें), मिली थी जबकि कांग्रेस को 11 सीटें मिलीं। ऐसे में यह मामला स्थानीय राजनीति में तनाव बढ़ा सकता है। कांग्रेस इसे “चुनावी धोखाधड़ी” बताकर भाजपा पर हमला कर रही है, जबकि भाजपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सार्वजनिक रूप से विस्तृत नहीं आई है।
तो क्या रद्द हो सकती है दोनों पार्षदों की सदस्यता ???
कानूनी जानकारों के मुताबिक, अगर पुलिस जांच में धोखाधड़ी के सबूत सामने आते हैं और कोर्ट इसे सिद्ध मानता है, तो संबंधित पार्षदों की सदस्यता रद्द हो सकती है और उस वार्ड में नया चुनाव कराया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर वकील और नागरिक मंच भी अयोग्यता याचिका या जनहित याचिका की संभावना जता रहे हैं।
फिलहाल ,इस मामले की अगली कोर्ट सुनवाई और पुलिस जांच की रिपोर्ट आने पर ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।
