उद्योगों के लिए उपयोगी देश की पहली ‘एआई लिविंग लैब’ महाराष्ट्र में शुरू

स्वदेशी उद्योगों को मिल रहा तकनीक जोड, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्वगुरु बनेगा — कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढा
महाराष्ट्र राज्य रतन टाटा कौशल विश्वविद्यालय में मंत्री लोढा द्वारा लैब का उद्घाटन
जा.न्यूज़ संवाददाता
मुंबई। उद्योग समूहों और लघु उद्योगों के लिए लाभदायक देश की पहली ‘एआई लिविंग लैब’ महाराष्ट्र में शुरू की गई है। राज्य के कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढा के हाथों सोमवार को महाराष्ट्र राज्य रतन टाटा कौशल विश्वविद्यालय के मुख्यालय में इस लैब का उद्घाटन किया गया। जर्मनी के सहयोग से रतन टाटा कौशल विश्वविद्यालय का यह अभिनव उपक्रम है। इस अवसर पर जर्मनी की संसदीय राज्य मंत्री डॉ. बार्बेल कॉफ्लर, राज्य के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, कौशल विभाग की अपर मुख्य सचिव मनीषा वर्मा, कुलगुरु डॉ. अपूर्वा पालकर, जर्मनी के वाणिज्य दूत क्रिस्टॉप हेलिर तथा जीआईजेड के संचालक उल्करे एबेलिंग उपस्थित थे। रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय (RT-MSSU) के सेंट्रल हॉल में ‘लिविंग लैब’ से संबंधित विभिन्न समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए गए।
कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढा ने कहा कि प्राचीन भारत में उद्योगों में उन्नत तकनीक के उपयोग के अनेक उदाहरण मिलते हैं। छोटे-छोटे उद्योगों के बल पर ही भारत उस समय एक समृद्ध राष्ट्र के रूप में विश्वभर में व्यापार करता था। इसी स्वदेशी की अवधारणा के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट के दौरान दुनिया के 75 से अधिक देशों को स्वदेशी वैक्सीन देकर वैश्विक मित्रता की भूमिका निभाई। उन्होंने आगे कहा कि उनके ही नेतृत्व में भारत में आधुनिक तकनीक लाकर स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। जर्मनी के सहयोग से शुरू हो रही ‘एआई लिविंग लैब’ इसका प्रमाण है और इससे स्वदेशी उद्योगों को तकनीकी मजबूती मिलेगी, जिससे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत निश्चित रूप से विश्वगुरु बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दूरदर्शी विकास नीति के माध्यम से राज्य को प्रगति के शिखर तक पहुंचाने का प्रयास मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में कौशल विभाग की विभिन्न योजनाएं सफलतापूर्वक लागू की जा रही हैं और युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

जर्मनी की संसदीय राज्य मंत्री डॉ. बार्बेल कॉफ्लर ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मानव के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके उचित उपयोग से विज्ञान की जटिल समस्याओं का समाधान, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और दैनिक जीवन की अनेक कठिनाइयों को दूर करना संभव होगा। उन्होंने बताया कि उद्योग क्षेत्र में एआई से बड़े बदलाव हो रहे हैं और कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां तथा संस्थाएं मिलकर नए शोध और नवाचार कर रही हैं, जिसमें बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है और लाखों विशेषज्ञ कार्यरत हैं।
राज्य के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक प्रकार की औद्योगिक क्रांति है, जो केवल विकल्प नहीं बल्कि विश्वभर में अनिवार्य बनती जा रही है। इससे अर्थव्यवस्था की संरचना और कार्यप्रणाली में मूलभूत परिवर्तन हो रहे हैं। नई पीढ़ी एआई के प्रभाव को तेजी से स्वीकार कर रही है और इसमें बड़े अवसर देख रही है।
महाराष्ट्र राज्य रतन टाटा कौशल विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. अपूर्वा पालकर ने ‘एआई लिविंग लैब’ के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह पहल जर्मनी और भारत के बीच कौशल विकास और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करेगी। उद्योग, विश्वविद्यालय और सरकार को एक साथ लाकर वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने का यह अभिनव प्रयास है। ‘लिविंग लैब’ की अवधारणा विद्यार्थियों को उद्योग क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों पर काम करने का अवसर देती है। इसमें विद्यार्थी, प्राध्यापक और उद्योग विशेषज्ञ मिलकर समस्याओं का विश्लेषण कर व्यवहारिक समाधान सुझा सकेंगे, जिससे देशभर के उद्योगों को लाभ मिलेगा। वर्तमान में जर्मनी की पांच कंपनियां इस लैब को सहयोग देंगी, जिससे तकनीक का आदान-प्रदान होगा।
जर्मनी के लिपजिग विश्वविद्यालय, SEPT कॉम्पिटेंस और महाराष्ट्र राज्य रतन टाटा कौशल विश्वविद्यालय के संयुक्त सहयोग से ‘एआई लिविंग लैब’ परियोजना लागू की जा रही है। महाराष्ट्र की अक्युरेट इंडस्ट्रियल कंट्रोल्स लिमिटेड, लाइटेक्स इलेक्ट्रिकल, अश्विनी मैग्नेट्स और पीएमटी मशीन जैसी कंपनियों ने विश्वविद्यालय के साथ सहयोग समझौता किया है। इस पहल के माध्यम से विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की समस्याओं का एआई तकनीक द्वारा समाधान और भविष्य की योजना बनाने के अवसर उपलब्ध होंगे।
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