मुंबई में केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह के बयान पर बवाल
जा. न्यूज़ संवाददाता
मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता राज ठाकरे ने बुधवार को कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बंबई का नाम आईआईटी मुंबई न करने संबंधी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह की टिप्पणी सरकार की मानसिकता को दर्शाती है।
सोमवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बंबई में एक समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा था, ‘‘जहां तक आईआईटी बंबई का सवाल है, शुक्र है कि इसका नाम अब भी यही है। आपने इसे बदलकर मुंबई नहीं किया है। तो यह आपके लिए एक और प्रशंसा की बात है। और मद्रास के लिए भी यही बात सही है। यह अब भी आईआईटी मद्रास ही है।’’ सिंह की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए ठाकरे ने कहा कि उनका बयान स्पष्ट रूप से सरकार की मानसिकता को दर्शाता है। मनसे प्रमुख ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि हमेशा से मराठी लोगों की रही मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश को मराठी नेताओं और जनता ने नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी मराठी मुंबई महाराष्ट्र में ही रही। दशकों से उनके मन में जो कड़वाहट भरी हुई थी, वह अब एक बार फिर बाहर आने लगी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुंबई के लोगों और पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र में रहने वाले सभी मराठी लोगों को अब अपनी आंखें खोल लेनी चाहिए।
‘‘मुंबई’’ नाम उन्हें (सत्तारूढ़ दल को) परेशान करता है क्योंकि इसका नाम मुंबई की देवी मुंबादेवी के नाम पर रखा गया है। उनकी संतानें मराठी लोग हैं जो पीढ़ियों से यहां रहते आए हैं।’’ ठाकरे ने कहा कि केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ को पंजाब के नियंत्रण से छीनने की कोशिश की, लेकिन अन्य सभी दलों के विरोध के बाद पीछे हट गई। उन्होंने कहा कि कदम वापस खींच लेना अस्थायी है। ठाकरे ने कहा, ‘‘मुंबई के मामले में भी कुछ ऐसा ही चल रहा है। शहर पर कब्जा करने की कोशिश ज़रूर चल रही है। पहले मुंबई और फिर पूरे एमएमआर क्षेत्र पर कब्ज़ा करके उसे गुजरात से जोड़ दिया जाएगा। मराठी लोगों को जाग जाना चाहिए।’’
बता दें कि मुंबई को पहले बंबई के नाम से भी जाना जाता था और उसका नाम मुंबादेवी के सम्मान में और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की छाप मिटाने के लिए आधिकारिक तौर पर 1995 में राज्य सरकार द्वारा मुंबई रखा गया था।
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