जर्मन एकता दिवस पर कैबिनेट मंत्री लोढा ने दिया संघ का संदेश
मुंबई। दक्षिण मुंबई के कुलाबा स्थित होटल ताज पॅलेस में आयोजित जर्मन एकता दिवस के स्वागत समारोह में महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढा ने भारत-जर्मनी के बढ़ते संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने राजनयिकों, उद्योगपतियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी के वैश्विक नेतृत्व में भारत विश्व की सबसे तेज़ी से प्रगति करनेवाली और ऊर्जावान अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन चुका है।
मंत्री लोढा ने कहा कि भारत की असली शक्ति विविधता में एकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीसजी के नेतृत्व में महाराष्ट्र देश की जीडीपी में सर्वाधिक योगदान देकर और निवेश के लिए सबसे अनुकूल राज्य बनकर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
भारत-जर्मनी संबंधों में महाराष्ट्र की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बोलते हुए लोढाजी ने बताया कि आज राज्य में 200 से अधिक जर्मन कंपनियां सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। उन्होंने कहा, “जर्मनी अपनी सटीकता के लिए जाना जाता है, जबकि भारत अपनी सृजनात्मकता और युवा ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है। जब ये दोनों गुण एक साथ आते हैं तो संभावनाओं की कोई सीमा नहीं रहती।”
कौशल्य विकास मंत्री के रूप में मंगल प्रभात लोढा ने जर्मनी की ‘ड्युअल एजुकेशन’ प्रणाली का विशेष उल्लेख किया, जिसमें सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक प्रशिक्षण का अनोखा समन्वय है। उन्होंने कहा, “यदि हम कक्षा-शिक्षण को व्यावहारिक अनुभव के साथ जोड़ें तो महाराष्ट्र के युवाओं को विश्वस्तरीय कौशल्य प्रदान कर वैश्विक कार्यक्षेत्र में उतारा जा सकता है।”
इस अवसर को सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए लोढाजी ने याद दिलाया कि 2 अक्टूबर महात्मा गांधी जी का जन्मदिन था। वहीं, कल विजयादशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को 100 वर्ष पूरे हुए। उन्होंने संघ के सरसंघचालक माननीय डॉ. मोहन भागवतजी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा, “भले ही आस्था और जीवन पद्धतियां अलग हों, किंतु आपसी सम्मान स्थायी एकता की नींव रख सकता है।” लोढा ने उपस्थित अतिथियों को आरएसएस के वर्षभर चलनेवाले शताब्दी उत्सव में सहभागी होने का आमंत्रण भी दिया और संघ को “विश्व की सबसे बड़ी सामाजिक सामाजिक संस्था बताया।
कार्यक्रम का समारोप मैत्री और साझा मूल्यों के संदेश के साथ हुआ। लोढाजी ने भारत-जर्मनी संबंधों की तुलना संगीत की संगति से की और कहा, “जिस प्रकार जर्मनी की सिम्फनी और भारत के राग मिलकर अद्वितीय सामंजस्य रचते हैं, उसी प्रकार हमारे आपसी संबंध विश्व में अनुकरणीय एकता का आदर्श स्थापित करेंगे।”
