महाराष्ट्र के कोने-कोने में पारंपरिक खेल महाकुंभ का आयोजन करेंगे – मंगल प्रभात लोढा
ओलंपिकवीर खाशाबा जाधव पारंपरिक देशी खेल महाकुंभ का उत्साहपूर्वक समापन
कुल 27 हजार प्रतिभागियों ने देशी खेलों के मैदान में दिखाया दम
जा. न्यूज़ संवाददाता
मुंबई। महाराष्ट्र विरह परिषद के सभापति राम शिंदे ने कहा कि पारंपरिक देशी खेल केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ही नही बल्कि इन खेलों से संस्कृति का अमूल्य कार्य भी होता है। कुर्ला स्थित पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर मैदान में आयोजित ओलंपिकवीर खाशाबा जाधव देशी खेल महाकुंभ का आज उनके प्रमुख उपस्थित में पारितोषिक वितरण समारोह और समापन हुआ। इस अवसर पर वे बोल रहे थे। यह खेल महाकुंभ कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगलप्रभात लोढा की संकल्पना से, राजमाता पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर की स्मृतिदिन के निमित्त 13 अगस्त से क्रीड़ा भारती के सहयोग से आयोजित किया गया था।

मंत्री मंगल प्रभात लोढा ने कहा कि शिवकालीन खेलों को प्रोत्साहन देकर नई पीढ़ी तक सांस्कृतिक धरोहर पहुँचाने के लिए ओलंपिकवीर खाशाबा जाधव पारंपरिक देशी खेल महाकुंभ का आयोजन किया गया था। पारंपरिक खेलों को उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिल रहा है और आगामी समय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र के कोने-कोने में पारंपरिक देशी खेलों का आयोजन किया जाएगा, ऐसा कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री श्री. मंगलप्रभात लोढा ने इस अवसर पर कहा।

व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण संचालनालय की निदेशक श्रीमती माधवी सरदेशमुख, क्रीड़ा भारती के अखिल भारतीय महामंत्री श्री. राज चौधरी, क्रीड़ा भारती के अध्यक्ष श्री. गणेश देवरुखकर, मुंबई विश्वविद्यालय के क्रीड़ा निदेशक श्री. मनोज रेड्डी इस अवसर पर उपस्थित थे।

विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने कहा कि
कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगलप्रभात लोढा के माध्यम से तन-मन को सुदृढ़ करनेवाले पारंपरिक खेलों का यह महाकुंभ युवाओं में नया जोश भर दिया है। साथ ही, पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर देशी खेल मैदान को अल्पावधि में खड़ा करने के लिए भी उन्होंने लोढा का आभार व्यक्त किया। पारंपरिक देशी खेल सामान्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में खेले जाते हैं, किंतु लोढा ने मुंबई जैसे शहर में इन खेलों का आयोजन कर सच्चे अर्थों में देशी खेलों को पुनर्जीवित किया है, ऐसा उन्होंने उल्लेख किया।
18 तरह के देशी खेलो में युवाओं ने दिखाया अद्भुत कौशल

पारंपरिक कबड्डी, खो-खो, कुश्ती, पंजा लड़ाना, तलवारबाजी, पावनखिंड दौड़ (मैराथन), रस्साकशी, विट्टी-दांडू, मल्लखंभ, फुगड़ी और मंगला गौरी जैसे 18 देशी खेलों की इस प्रतियोगिता में 27 हजार खिलाड़ियों के आवाज से मैदान गूँज उठा। वहीं 450 खिलाड़ियों को विधान परिषद के सभापति राम शिंदे और कौशल विकास मंत्री लोढा के हाथों पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर लेझीम के साथ लाठी-काठी, तलवारबाजी जैसे साहसी खेलों का प्रदर्शन भी प्रस्तुत किया गया।
