व्यापार और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिकी टैरिफ के बीच कहा है कि ऐसा कोई नहीं आया जो भारत को झुका सके। उन्होंने यह बयान तब दिया जब अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाए हैं, जिससे भारतीय निर्यात में 30 अरब डॉलर से अधिक की संभावित गिरावट की आशंका है।
गोयल ने कहा कि भारत चुनौतियों को अवसर में बदलता रहा है। उन्होंने 1999 में नई दूरसंचार नीति और कोविड-19 महामारी का उदाहरण दिया, जब भारत ने चुनौतियों का सामना कर मजबूत वापसी की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत किसानों, डेयरी और मछली पालकों के हितों और राष्ट्रहित में कोई समझौता नहीं करेगा।
मंत्री ने कहा कि दुनिया भारत को एक नई उम्मीद से देख रही है, जो सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और हर साल बड़ी संख्या में STEM ग्रेजुएट्स तैयार कर रही है। उन्होंने अमेरिका के इस कदम पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का मनोबल ऊंचा है और यह झुकने वाला नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का सेवा निर्यात इस चुनौती का सामना करने में मदद कर सकता है। पिछले वित्त वर्ष में सेवा निर्यात 385 अरब डॉलर तक पहुंच गया था और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसमें 10% की वृद्धि हुई है। ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते से भी सेवा निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
व्यापार और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का निर्यात बढ़ेगा, जबकि अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ के कारण इसमें 30 अरब डॉलर से अधिक की गिरावट की आशंका है।
पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में, भारत का कुल निर्यात 821 अरब डॉलर था, जिसमें 437.42 अरब डॉलर का वस्तु निर्यात और 383.51 अरब डॉलर का सेवा निर्यात शामिल था। अमेरिका में भारत का निर्यात 88 अरब डॉलर था।
गोयल ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत राष्ट्रहित, किसानों, डेयरी और मछली पालकों के हित में कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “हम आपदा में अवसर तलाशने वाले लोग हैं” और देश का मनोबल ऊंचा है। गोयल ने 1999 में कंप्यूटर से जुड़ी चुनौती और COVID-19 महामारी जैसी पिछली चुनौतियों का उदाहरण दिया, जिसमें भारत ने संकट को अवसर में बदल दिया।

उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था को “मृत” कहने और विपक्षी नेता राहुल गांधी द्वारा इसका समर्थन करने पर दुख व्यक्त किया। गोयल ने कहा कि दुनिया भारत को एक नई उम्मीद के साथ देख रही है, जो दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और हर साल STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) में सबसे अधिक ग्रेजुएट पैदा कर रही है।
विदेश व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के सेवा निर्यात में तेजी से वृद्धि हो रही है, और यह चालू वित्त वर्ष में भी जारी रहेगी।
* वित्त वर्ष 2024-25 में सेवा निर्यात 385 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 2023-24 में यह 341 अरब डॉलर था।
* चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सेवा निर्यात पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 10% बढ़कर 98 अरब डॉलर हो गया।
जानकारों के अनुसार, सेवा निर्यात में आईटी क्षेत्र का सबसे बड़ा योगदान है, लेकिन वित्तीय सेवा, परामर्श और पर्यटन जैसे क्षेत्रों की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौता लागू होने के बाद सेवा निर्यात में और तेजी आने की उम्मीद है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) के अध्यक्ष चरनजोत सिंह नंदा ने कहा कि वित्तीय सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ICAI कई कोर्स चला रहा है, जिससे भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए खाड़ी देशों और अन्य जगहों पर बड़े अवसर पैदा होंगे।
