भुरभेंडी गाँव का यह मामला गुजरात के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और पलायन से जुड़ी चुनौतियों को उजागर करता है
भुरभेंडी गांव में एक अनूठी स्थिति सामने आई है, जहाँ ज़िला पंचायत द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालय में केवल एक ही छात्र और दो शिक्षक हैं।
यह गाँव गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है और यहाँ के ज़्यादातर ग्रामीण अलग-अलग ज़िलों और तालुकों में खेतिहर मज़दूर के रूप में काम करते हैं।
यह स्कूल, जो नर्सरी (बाल वाटिका) से कक्षा 5 तक गुजराती माध्यम से शिक्षा प्रदान करता है, पहले छात्रों से भरा रहता था। लेकिन डांग ज़िले के आदिवासी बहुल इस गाँव में, ज़्यादातर परिवार खेतिहर मज़दूरी के लिए दूसरे ज़िलों में चले जाते हैं, जिसकी वजह से पिछले कुछ सालों में छात्रों की संख्या लगातार कम होती गई है।
भुरभेंडी का यह प्राथमिक विद्यालय नर्सरी से कक्षा 5 तक गुजराती माध्यम में शिक्षा देता है। अधिकारियों के मुताबिक, माता-पिता के काम के लिए गाँव छोड़ने के कारण, इस साल यहाँ सिर्फ़ एक छात्र, क्रुणाल भोये, बचा है। पिछले साल भी यहाँ पाँच छात्र थे, जिनमें से ज़्यादातर आस-पास के आश्रम विद्यालयों या दूसरे गाँवों में चले गए। इस स्थिति ने शिक्षकों की संख्या को लेकर एक सवाल खड़ा कर दिया है।
बता दें कि डांग जिले में विभिन्न गाँवों में कुल 377 सरकारी प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें 39,000 छात्र हैं। कक्षा 1 से 5 तक के प्राथमिक खंड के विद्यालयों में 1,107 शिक्षक और कक्षा 6 से 8 तक के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 508 शिक्षक कार्यरत हैं।
जहाँ एक तरफ़ एक छात्र के लिए दो शिक्षक हैं, वहीं दूसरी तरफ़, ज़िले के कई सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में 150 से ज़्यादा शिक्षकों की कमी है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, ज़िला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि वे एक शिक्षक का तबादला पास के गाँव में करने पर विचार कर रहे हैं।
अधिकारियों ने क्रुणाल के पिता, मुकेश भोये, से अपने बेटे का दाखिला पास के नागरपाड़ा गाँव के स्कूल में करवाने को कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। इससे पता चलता है कि वे अपने बच्चे की पढ़ाई को लेकर बहुत गंभीर हैं और शायद मौजूदा स्कूल में मिलने वाली सुविधाओं से संतुष्ट हैं।
भुरभेंडी गाँव का यह मामला गुजरात के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और पलायन से जुड़ी चुनौतियों को उजागर करता है।
क्या आपको लगता है कि इस तरह के छोटे गाँवों के स्कूलों को बंद कर देना चाहिए, या इन स्कूलों को किसी और तरीके से बेहतर बनाना चाहिए?
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