वर्तमान परिवेश में ओबीसी वोटबैंक पार्टी के पक्ष लामबंद करना प्रमुख चुनौती
कृष्ण मिश्र ” गौतम”
18 वी लोकसभा के परिणाम आने और मोदी सरकार 3.O मंत्रिमंडल के गठन के बाद अब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी नजदीक है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल जून के अंत में खतम हो रहा है।जेपी नड्डा साल 2019 लोकसभा चुनाव के बाद 2020 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर बैठे थे। उनका कार्यकाल जनवरी 2023 तक ही था लेकिन, लोकसभा चुनाव को देखते हुए उनके कार्यकाल को जून 2024 तक बढ़ा दिया गया था ।
ऐसे में नए ताजपोशी के लिए चर्चा में काफी नाम है , लेकिन वर्तमान में और अगले कुछ महीनों के भीतर होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र के विनोद तावड़े का पलड़ा भारी लग रहा है।

महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस मंत्री मंडल में हाशिए पर रहे तावड़े ने 2019 चुनाव के बाद केंद्रीय समिति में ऐसी जगह बनाई की विरोधी भी उनके मुरीद हो गए। पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव पद पर आसीन हुए। लगातार उपलब्धियां भी बढ़ती गई।ऐसे में बीजेपी को नजदीक से जानने वाले लोग दबे जुबान से विनोद तावड़े का नाम ले रहे हैं।

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी के भावी अध्यक्ष के रूप में शिवराज सिंह चौहान का नाम काफी तेजी से चर्चा में आया था, लेकिन उन्हें अब कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है। पुराने मंत्रिमंडल से ऐसे किसी महत्वपूर्ण नाम को स्पेयर भी नहीं किया गया जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि शायद उसे संगठन में जिम्मेदारी सौंपने के लिए मंत्री नहीं बनाया गया।
जो भी महत्वपूर्ण मंत्री थे मोदी जी के दूसरे कार्यकाल में, उनमें से अधिकांश इस कार्यकाल में भी अपनी जिम्मेदारी विभिन्न मंत्रालयों में संभाल चुके हैं। ऐसी स्थिति में अब नए सिरे से अध्यक्ष पद के लिए जो नाम चर्चा में आ रहे हैं
मंत्रालय के बंटवारे के बाद अब दो बड़े पद को लेकर चर्चा है जिसमें एक बीजेपी अध्यक्ष का पद है।

उनमें कुछ लोग तमिलनाडु के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और बहुत ही मेहनती पूर्व आईपीएस अन्नामलाई , ओबीसी नेता के लक्ष्मण , अनुराग ठाकुर , सुनील बंसल का भी नाम ले रहे हैं।
परंतु उनसे कहीं ज्यादा चर्चा में एक अन्य नाम है विनोद तावडे का।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए पिछले दो दिनों से जो एक नाम चर्चा में उभरा है वो विनोद तावड़े का है। महाराष्ट्र से आने वाले तावड़े राज्यस्तर पर मंत्री भी रह चुके हैं।

बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े की 2024 के लोकसभा चुनाव में अहम भूमिका मानी जा रही है. चाहे बिहार में एनडीए गठबंधन को पटरी पर लाना हो या फिर दूसरी पार्टी के अहम नेताओं को बीजेपी में लाने की कवायद हो, इन सबमें विनोद तावड़े के रोल की चर्चा हो रही है। एक तरह से पार्टी के अंदर विनोद तावड़े की दमदार इमेज हो चुकी है। इसे समझना हो तो आज से साढ़े चार साल पहले अक्टूबर 2019 को देखना होगा. तब विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी ने बोरीवली सीट से उनका टिकट काट दिया था।
चूंकि इस बार बीजेपी को जाति लामबंद में ओबीसी वोट बैंक में कांग्रेस और उसके अन्य क्षेत्रीय दलों ने जोरदार सेंध लगाई है। ऐसे में पार्टी ओबीसी नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर अपने बिखरे वोटबैंक को फिर से एकजुट करने की कोशिश कर सकती है।
विनोद तावड़े, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की पृष्ठभूमि से हैं। विनोद तावड़े एक मराठा नेता हैं, पिछले कुछ सालों में मराठा आंदोलन के कारण महाराष्ट्र में काफी आक्रोश रहा है। ऐसे में तावड़े भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं, और उनकी अपनी कार्यशैली से भाजपा के छिटके वोटरों की वापसी हो सकती है।
