महाराष्ट्र के विकास पुरुष देवेंद्र फडणवीस
✍️ आचार्य पवन त्रिपाठी

देश, या किसी प्रदेश में हो रहे विकास कार्य चुनावी एजेंडा बनने लगें, तो यह देश और देश की जनता, दोनों के लिए शुभ है। क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारें चुनी ही जनकल्याण के लिए जाती हैं। भारत में उन्हें पांच वर्ष का मौका दिया जाता है। यदि सरकार के पांच वर्ष के कार्य से जनता संतुष्ट होती है, तो पुनः उसी सरकार को सत्ता में आने का मौका देती है। नहीं तो उसे निकालकर बाहर करती है। विकास की ये झलक यदि समयबद्ध और पारदर्शी हो, तो जनता का विश्वास और गहरा होता जाता है।

शुक्रवार को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लोकार्पित हुआ अटल बिहारी वाजपेयी शिवड़ी न्हावा शेवा अटल सेतु ऐसे ही पारदर्शी एवं समयबद्ध विकास का प्रतिबिंब है। इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना देश के इस सबसे लंबे समुद्री पुल को देखकर जनता गदगद है, तो विपक्षी दल दांतों तले उंगली दबाकर चुप बैठे हैं। 24 दिसंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ही हाथों इस पुल का शिलान्यास किया गया था, और 12 जनवरी, 2024 को उन्हीं के हाथों इसका लोकार्पण भी हो गया। वास्तव में इसका काम 2018 में शुरू हो सका था। ध्यान में यह भी रखना होगा कि इस पुल का काम शुरू होने के बाद ही देश को कोरोना महामारी की दो बड़ी लहरों और राज्य को राजनीतिक अस्थिरता के ढाई वर्ष का कार्यकाल भी देखना पड़ा। इसके बावजूद यदि यह काम समय पर पूरा हो सका, तो इसके लिए राज्य के दूरदर्शी एवं सक्षम नेतृत्व की ही सराहना की जानी चाहिए। इस पुल की संकल्पना तो कई दशक पहले ही हो चुकी थी। लेकिन इतना बड़ा काम शुरू करने की हिम्मत जुटाना आसान नहीं था।

यह हिम्मत जुटाई 2014 में राज्य के मुख्यमंत्री बने देवेंद्र फडणवीस ने। जितना धन इस बड़े काम पर खर्च होनेवाला था, वह राज्य के बजट से तो संभव ही नहीं था। इसमें केंद्र और कुछ अन्य एजेंसियों का सहयोग पाना भी जरूरी था। यह पुल डबल इंजन की सरकार होने के सुफल का भी एक प्रतीक है।
क्योंकि केंद्र में नरेंद्र मोदी और राज्य में देवेंद्र फडणवीस की सरकार न होती, तो इस काम के लिए न तो केंद्र की गारंटी मिल पाती, न जापानी वित्तीय एजेंसी से आर्थिक सहयोग। ये इस बात की ओर भी ध्यान खींचता है कि देश का मतदाता अक्सर जाति-धर्म या किसी अन्य बहकावे में आकर ऐसी सरकारें चुन लेता है, जो केंद्र से तालमेल करके काम करना ही पसंद नहीं करतीं। इसका नुकसान भी उस राज्य की जनता को ही बड़ी कीमत चुका कर करना पड़ता है।

2014 में महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने के बाद फडणवीस ने सिर्फ यही एक बड़ा काम शुरू किया हो, ऐसा नहीं है। राज्य की राजधानी मुंबई को उपराजधानी नागपुर से जोड़नेवाले बालासाहब ठाकरे समृद्धि महामार्ग की शुरुआत भी फडणवीस के उसी कार्यकाल में हुई। संयोग से उस समय उनके साथ शिवसेना के वरिष्ठ मंत्री के रूप में कार्य कर रहे एकनाथ शिंदे ही समृद्धि महामार्ग के निर्माण का कामकाज देख रहे थे, और आज जब अटल सेतु का लोकार्पण हो चुका है, और समृद्धि महामार्ग भी बनकर तैयार होनेवाला है, तो एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस की जोड़ी मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत है।
ऐसी बड़ी परियोजनाओं का लाभ सिर्फ इन परियोजनाओं तक ही सीमित नहीं रहता। देश के बुनियादी ढांचे को मजबूती प्रदान करनेवाली ये परियोजनाएं अपने आसपास विकास के कई नए आयाम भी खोलती हैं। समृद्धि महामार्ग राज्य के जिन-जिन जिलों से गुजर रहा है, वहां-वहां कृषि और उद्योग के लिए पैदा होनेवाले अवसरों की चर्चा कई बार की जा चुकी है। जिसका परोक्ष या प्रत्यक्ष लाभ राज्य की एक बड़ी आबादी को होनेवाला है। यही स्थिति अब अटल सेतु के उदघाटन के बाद नई मुंबई और रायगढ़ में भी दिखाई देनेवाली है। इसके खुलने के बाद ‘तीसरी मुंबई’ बसने की बात यूं ही नहीं कही जा रही है। सुबह और शाम के समय, जो दूरी तय करने में कभी-कभी तीन से चार घंटे लग जाया करते थे, अब वही दूरी 20 से 25 मिनट में पूरी जाने से कितना ईंधन और समय बचेगा, इसकी कल्पना की जा सकती है।
निश्चित रूप से इसका असर मुंबई से नई मुंबई को जोड़नेवाले पुराने रास्ते के ट्रैफिक पर भी पड़ेगा, और लोगों को राहत मिलेगी। यदि भविष्य में राज्य सरकार या बेस्ट बड़ी संख्या में वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन अटल सेतु से प्रारंभ कर दे, तो अटल सेतु के दूसरे छोर से मुंबई की ओर आनेवाले सामान्य लोगों को भी बड़ी सुविधा होगी, और उन्हें लोकल ट्रेनों से भी आने की जरूरत नहीं रह जाएगी। पश्चिम भारत के होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने तो इस पुल के लोकार्पण के बाद ही खुशी जताते हुए कह दिया है कि नई मुंबई, रायगढ़, लोनावाला, माथेरान, कर्जत, अलीबाग आदि स्थानों पर आम मुंबईकरों की पहुंच और आसान हो जाएगी। मुंबई के अंतरराष्ट्रीय विमानतल से नई मुंबई के अंतरराष्ट्रीय विमानतल तक पहुंच भी आसान हो जाएगी। विकास की इस परियोजना की भनक लगते ही नई मुंबई एयरपोर्ट से लगे उलवे रोड पर प्रापर्टी की कीमतों में उछाल पहले ही शुरू हो गया था, अब यह और बढ़ेगा ही।

फडणवीस की दूरदर्शिता समृद्धि महामार्ग या अटल सेतु के निर्माण तक ही सीमित नहीं है। मुंबई, पुणे और नागपुर के कोने-कोने में फैलता दिखाई दे रहा मेट्रो का जाल भी इसी दूरदर्शिता का परिणाम है। 2014 से पहले राज्य के ग्रामीण भागों में पीने तक का पानी टैंकरों से भेजना राज्य सरकार का नियमित काम बन चुका था। लेकिन इस समस्या की जड़ में जाते हुए सत्ता में आते ही जलयुक्त शिवार योजना की शुरुआत करना ग्रामीण भागों के लिए मानो वरदान बन गया। ग्रामीणों के सहयोग से ही चलाई गई इस योजना का ही परिणाम था कि वर्षाकाल में बह जानेवाले पानी को जगह-जगह रोककर भूमिगत जलस्तर बढ़ाया गया, जिसका सुफल आज पूरा ग्रामीण महाराष्ट्र महसूस कर रहा है।
