भिलाड/संजान / वापी,
भारी बारिश के बाद बने आपदा के हालातों और चारों ओर बिखरी तबाही के बीच, जब उम्मीद की किरणें धुंधली पड़ रही थीं, तब महिलाओं ने संवेदनशील पहल करते हुए बाढ़ पीड़ितों की मदद का बीड़ा उठाया। उनके इस जज्बे ने ‘मान्या टीम’ के रूप में एक बड़े राहत अभियान का रूप ले लिया, जो आज दुर्गम इलाकों में फँसे सैकड़ों बेघर परिवारों के लिए सहारा बना हुआ है।
मान्या टीम के सदस्यों ने भिलाड और संजान क्षेत्र के अत्यंत अंदरूनी एवं दुर्गम ग्रामीण इलाकों का दौरा कर जमीनी स्तर पर राहत कार्य चलाया। खराब सड़कों और कठिन परिस्थितियों के कारण इन दूर-दराज क्षेत्रों तक अब तक कोई भी सहायता नहीं पहुँच सकी थी। क्षेत्र में पहुँचने वाली पहली राहत टीम के रूप में मान्या टीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कदम उठाए और प्रभावित जरूरतमंद परिवारों को सूखा राशन, कपड़े और नाश्ता वितरित किया।
150 तिरपाल से दी आश्रय की छत, आपदा प्रभावितों में जगाई नई आस
सिर छिपाने की जगह खो चुके परिवारों के लिए टीम द्वारा 150 तिरपाल , राशन किट , दवाइयां इत्यादि वितरित किए । ताकि बेघर हुए लोगों को तुरंत अस्थाई आश्रय मिल सके। इसी तरह टुकवाड़ा में अपना सब कुछ गवाँ चुके एक पीड़ित परिवार को टीम ने समुचित राशन, आवश्यक दवाइयों और कपड़ों की मदद दी। साथ ही, उन्हें हर संभव सहायता का आश्वासन देकर उनके जीवन में एक नई आस जगाई।

इसी तरह बगवाड़ा नदी के किनारे बसे गांव बड़ील फलिया समेत दो अन्य अत्यंत प्रभावित गांवों में मान्या टीम ने बड़े पैमाने पर राहत अभियान चलाया। नदी के उफान से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए परिवारों को चिन्हित कर उन्हें तिरपाल, कपड़े, राशन और तैयार नाश्ते के पैकेट बच्चों के लिए कपड़े मुहैया कराए गए।
“मान्या टीम की अध्यक्षा सरबजीत कौर सहित गुरुचरण कौर,हरविंदर कौर,हरलीन कौर,सुरिंदर कौर, सरना का कहना है, “संकट की इस घड़ी में बाढ़ पीड़ितों को केवल सहानुभूति की नहीं, बल्कि व्यावहारिक मदद की जरूरत है। एक महिला होने के नाते हम समझ सकती हैं कि आपदा के समय परिवारों, खासकर माताओं और बच्चों को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।”
