अहमदाबाद के इसनपुर से पकड़ा गया पश्चिम बंगाल का आरोपी, पूर्व केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला के नाम के भी फर्जी लेटरपैड बरामद।
विशेष संवाददाता, वलसाड ,
वलसाड साइबर क्राइम पुलिस ने एक बेहद संवेदनशील और हाईप्रोफाइल मामले में तत्परता दिखाते हुए एक ऐसे शातिर साइबर ठग को चंद घंटों में गिरफ्तार किया है, जिसने वीआईपी नाम का इस्तेमाल कर सीधे बैंकिंग सिस्टम को चूना लगाने की कोशिश की थी। पुलिस ने अहमदाबाद के इसनपुर इलाके से पश्चिम बंगाल के रहने वाले आरोपी प्रद्युतककुमार दे को गिरफ्तार किया है।
सांसद के नाम पर एसबीआई चेयरमैन को लिखा फर्जी सिफारिश पत्र पकड़ा गया आरोपी इतना दुस्साहसी है कि उसने नवसारी-वलसाड क्षेत्र के सांसद धवल पटेल के नाम का फर्जी ई-मेल आईडी और हूबहू दिखने वाला लेटरपैड तैयार कर लिया। सिर्फ इतना ही नहीं, आरोपी ने सांसद के नाम की जाली रबर स्टैंप (मोहर) बनवाई और उनके फर्जी हस्ताक्षर कर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के चेयरमैन को एक आधिकारिक सिफारिश पत्र भेज दिया। इस फर्जी पत्र के जरिए वह एक बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम देने की फिराक में था, लेकिन समय रहते पुलिस सक्रिय हो गई।

रेलवे वीआईपी कोटा टिकट और पुरुषोत्तम रूपाला का भी कनेक्शन
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी इस फर्जी रसूख का इस्तेमाल रेलवे के स्पेशल वीआईपी कोटा से कंफर्म टिकट बुक कराने के लिए भी कर रहा था। पुलिस ने जब आरोपी के ठिकाने पर छापेमारी की, तो उसके पास से न सिर्फ सांसद धवल पटेल, बल्कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला सहित देश के कई अन्य बड़े नेताओं और रसूखदार व्यक्तियों के नाम के फर्जी लेटरपैड, जाली दस्तावेज, मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद किए हैं।
सांसद धवल पटेल के बारे में बता दें कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने साल 2024 के लोकसभा चुनाव में वलसाड (ST) सीट से मौजूदा सांसद के.सी. पटेल का टिकट काटकर धवल पटेल पर भरोसा जताया।उन्होंने 2024 के आम चुनाव में कांग्रेस के आक्रामक नेता अनंत पटेल को एक बेहद कड़े मुकाबले में हरा दिया था।

युवा और तकनीकी रूप से सक्षम होने के कारण भाजपा ने उन्हें 18वीं लोकसभा में ‘लोकसभा व्हिप’ (Lok Sabha Whip) जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।भाजपा के राष्ट्रीय आदाजाति (ST) मोर्चा के नेशनल सोशल मीडिया इन-चार्ज भी हैं। पार्टी की डिजिटल और सोशल मीडिया रणनीतियों को आदिवासियों और युवाओं के बीच ले जाने में उनकी बड़ी भूमिका है।
ऐसा माना जा रहा है कि चूंकि यह पूरा रैकेट इतने पढ़े-लिखे और तकनीकी रूप से मजबूत सांसद के नाम पर चलाया जा रहा था, इसलिए साइबर ठगों ने उनके हाई-प्रोफाइल डिजिटल रसूख का फायदा उठाने की कोशिश की थी।
देशभर में फैले बड़े रैकेट की आशंका: जांच का दायरा बढ़ा
इस मामले में सबसे बड़ा ‘सवालिया निशान’ यह खड़ा हो रहा है कि क्या यह महज एक व्यक्ति की धोखाधड़ी है या इसके पीछे कोई बहुत बड़ा अंतरराज्यीय रैकेट (Inter-state Racket) काम कर रहा है?
- जांच का बड़ा बिंदु: पश्चिम बंगाल के मूल निवासी का गुजरात में आकर इस तरह से स्थानीय सांसदों और दिल्ली के बड़े राजनेताओं के नाम पर फर्जीवाड़ा करना यह साफ इशारा करता है कि इस नेटवर्क के तार देश के अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।
- रेलवे और बैंकिंग पर गंभीर खतरा: वीआईपी कोटे से रेलवे टिकट कंफर्म कराना और एसबीआई जैसी देश की सबसे बड़ी बैंक के चेयरमैन को सीधे पत्र भेजना यह साबित करता है कि इस गिरोह के पास सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली की गहरी जानकारी है। आशंका जताई जा रही है कि देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह से फर्जी लेटरपैड के दम पर बड़े-बड़े ठेके, ट्रांसफर-पोस्टिंग या वीआईपी सुविधाओं का गलत फायदा उठाया जा रहा होगा।
वलसाड साइबर क्राइम पुलिस ने आरोपी को रिमांड पर लेकर उसके लैपटॉप और मोबाइल डेटा को खंगालना शुरू कर दिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी के बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की जांच से यह साफ होगा कि उसने अब तक किन-किन लोगों को अपना शिकार बनाया है और इस रैकेट में उसके साथ देश के किन-किन राज्यों से सह-आरोपी जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
