बाणगंगा, मलबार हिल में हिंदू सम्मेलन एवं हिंदू एकता के लिए भव्य कलश यात्रा उत्साहपूर्वक संपन्न
मुंबई,
हिंदू समाज में संगठन, समरसता, सांस्कृतिक गौरव एवं राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बाणगंगा-वालकेश्वर, मलबार हिल में शनिवार, दिनांक 6 जून 2026 को भव्य हिंदू सम्मेलन एवं हिंदू एकता के लिए कलश यात्रा उत्साहपूर्वक संपन्न हुई। महाराष्ट्र शासन के कैबिनेट मंत्री माननीय श्री मंगल प्रभात लोढ़ा की प्रमुख उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र के अनेक गणमान्य के साथ-साथ हजारों हिंदू बंधु उपस्थित थे।
वर्तमान बदलते सामाजिक परिदृश्य में हिंदू समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट करना, परस्पर संवाद को बढ़ावा देना, सामाजिक समरसता को मजबूत करना तथा सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना इस विशेष कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य था। इस आयोजन को हिंदू समाज के युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, विभिन्न धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों तथा स्थानीय नागरिकों का उत्स्फूर्त समर्थन प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 4.00 बजे भव्य कलश यात्रा से हुई। यह यात्रा प्रेम नगर से प्रारंभ होकर कवळे मठ स्कूल, बाणगंगा-वालकेश्वर में संपन्न हुई।
250 से अधिक महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर पवित्र कलश धारण कर यात्रा में सहभागिता दर्ज कराई। टाल-मृदंग की गूंज, लेझीम जैसे पारंपरिक वाद्यों की धुन तथा विभिन्न सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। भगवा ध्वज, धार्मिक उद्घोष, भजन-कीर्तन तथा सांस्कृतिक विरासत का दर्शन कराने वाले विविध कार्यक्रम यात्रा के प्रमुख आकर्षण रहे। हिंदू समाज के विभिन्न पंथों, परंपराओं एवं घटकों का प्रतिनिधित्व करने वाली यह यात्रा हिंदू एकात्मता का प्रतीक बनकर उभरी।
इस यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि कलश यात्रा केवल धार्मिक परंपरा का हिस्सा नहीं है, बल्कि समाज में एकता, संस्कार, श्रद्धा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का भी प्रतीक है। यात्रा मार्ग पर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर प्रतिभागियों का स्वागत किया।
कलश यात्रा के उपरांत सायं 6.00 बजे कवळे मठ स्कूल, बाणगंगा-वालकेश्वर में हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इस सम्मेलन में हिंदू समाज की वर्तमान सामाजिक भूमिका, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, युवाओं की जिम्मेदारी, सामाजिक समरसता, पारिवारिक व्यवस्था, राष्ट्र निर्माण तथा सनातन मूल्यों के संरक्षण जैसे विविध विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता के रूप में श्री विठ्ठल कांबळे (आरएसएस प्रांत कार्यवाह – कोंकण) ने हिंदू समाज की संगठनात्मक शक्ति के महत्व, समाज के विभिन्न वर्गों के बीच समन्वय तथा राष्ट्रीय जीवन में समाज की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।
इसी प्रकार पूज्य मुनिराज सागरजी महाराज ने धर्म, अध्यात्म, संस्कार एवं हिंदू संस्कृति के संरक्षण पर अपने विचार रखे। उनके मार्गदर्शन के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने हेतु आवश्यक आध्यात्मिक मूल्यों पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री आर. जी. भट्ट, अध्यक्ष – वालकेश्वर काशी मठ ने की। उन्होंने समाज में एकात्मता, परंपराओं एवं सामाजिक उत्तरदायित्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

हिंदू सम्मेलन एवं कलश यात्रा के माध्यम से समाज में विभिन्न भाषाओं, क्षेत्रों, पंथों एवं परंपराओं में कार्यरत विभिन्न घटकों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास किया गया। समाजहित, राष्ट्रहित एवं संस्कृति संरक्षण जैसे समान उद्देश्यों के लिए सभी को एकजुट होने का संदेश इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य था।मा. कॅबिनेट मंत्री श्री. मंगल प्रभात लोढा ने कहा कि
हिंदू जनजागरण और हिंदू समाज में एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। इन सम्मेलनों को जनता का उत्साहपूर्ण समर्थन मिला और महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में सक्रिय भागीदारी निभाई,”
हिंदू समाज के संगठन एवं जनजागरण को और अधिक व्यापक स्वरूप प्रदान करने के लिए आगामी समय में संपूर्ण मुंबई में लगभग 1,000 स्थानों पर हिंदू सम्मेलनों के आयोजन की जानकारी इस अवसर पर दी गई। स्थानीय स्तर पर समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट करने के उद्देश्य से इन सम्मेलनों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। बताया गया कि इस पहल का उद्देश्य सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागृति, परिवार प्रबोधन, युवाओं की सहभागिता, राष्ट्रहित तथा समाज संगठन जैसे विषयों पर व्यापक जनजागरण करना है। उपस्थित जनों ने विश्वास व्यक्त किया कि मुंबई के प्रत्येक क्षेत्र में हिंदू समाज के बीच संवाद, समन्वय एवं एकात्मता की भावना को सुदृढ़ करने में यह अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
हिंदू समाज के नागरिकों, महिलाओं, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों, धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों एवं विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों ने बड़ी संख्या में उपस्थित रहकर हिंदू एकता के संदेश को व्यापक बनाने में अपना योगदान दिया। कलश यात्रा में 250 से अधिक महिलाओं की सहभागिता, टाल-मृदंग की ध्वनि के साथ निकली शोभायात्रा, लेझीम एवं पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्यों की प्रस्तुतियां तथा हजारों नागरिकों की उपस्थिति के कारण संपूर्ण कार्यक्रम उत्साहपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
