प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अंत्योदय के माध्यम से ही देश की महाशक्ति की ओर अग्रसर
– भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री श्री बी. एल. संतोष का प्रतिपादन
एकात्म मानव दर्शन राष्ट्रीय संगोष्ठी का श्री संतोष के कर-कमलों से उद्घाटन

पंडितजी के मौलिक विचार आज के समय में भी प्रासंगिक – मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के वैश्विक विचार युवाओं के लिए मार्गदर्शक – मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा
मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सही अर्थों में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं और पंडितजी के ‘अंत्योदय’ के सिद्धांत के माध्यम से ही मोदी के नेतृत्व में देश महाशक्ति की ओर अग्रसर हो रहा है। रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी में दो दिवसीय ‘एकात्म मानव दर्शन राष्ट्रीय संगोष्ठी’ के उद्घाटन के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी एल संतोष यह विचार। व्यक्त किया। उन्होंने देश की प्रगति तथा पंडितजी की अंत्योदय की संकल्पना पर अपने विचार व्यक्त किए।
कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा की पहल से महाराष्ट्र राज्य ‘एकात्म मानव दर्शन हीरक महोत्सव समिति’ का गठन किया गया है। इसी समिति के माध्यम से इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल हुए। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि पंडितजी का अंत्योदय का विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने लगभग साठ वर्ष पूर्व अंत्योदय और एकात्म मानव दर्शन की विचारधारा प्रस्तुत की थी। समाज के अंतिम व्यक्ति का जब तक विकास नहीं होता, तब तक विकास की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकती। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडितजी का यह मौलिक विचार जनसेवा का मार्ग निर्धारित करने वाला है। वहीं, मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा कि पंडितजी के विचार राष्ट्रसेवा और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देने वाले हैं और समाज में उनके विचारों को स्थापित करना हमारा संकल्प है।
29 और 30 दिसंबर को आयोजित इस संगोष्ठी एवं कार्यशाला में ‘वसुधैव कुटुंबकम’, कौशल विकास, शिक्षा–प्रशिक्षण, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण तथा एकात्म मानव दर्शन में समरसता और मूल्य-शिक्षा जैसे विषयों पर मार्गदर्शन किया जाएगा। मंत्री लोढा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि पंडितजी के विचार आज भी नई पीढ़ी के लिए उतने ही मार्गदर्शक और दिशादर्शक हैं।समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान अर्थात ‘अंत्योदय’ का यह वैश्विक विचार पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने मुंबई के रुइया महाविद्यालय में दिए गए एकात्म मानव दर्शन व्याख्यान के माध्यम से प्रस्तुत किया था। इस ऐतिहासिक घटना के 60 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।

कौशल विकास मंत्री के मार्गदर्शन में ‘एकात्म मानव दर्शन हीरक महोत्सव समिति’ के माध्यम से राज्य भर में विविध उपक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कार्यशाला में देश के 19 राज्यों से लगभग 250 प्रतिनिधियों ने सहभाग लिया है तथा दो दिवसीय सत्रों में विभिन्न मान्यवरों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
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