देश की क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने और हिंदी को ‘सहकारी भाषा’ के रूप में स्थापित करना रहा उद्देश्य
मुंबई में हिंदी-मराठी विवाद के बीच तमिल भाषी महाराष्ट्र के राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन ने हिदी की वकालत की है। मंगलवार को उन्होंने कहा कि अगर, आप हिंदी नहीं जानते तो देश के लोगों की समस्याएं नहीं समझ सकते। राज्यपाल ने कहा कि मेरी शिक्षा तमिल भाषा के माध्यम से नगर निगम के स्कूल में हुई है लेकिन, वे हिंदी अच्छी तरह बोलते और समझते हैं।
दरअसल, मंगलवार को संसदीय राजभाषा समिति के संयोजक डॉ. दिनेश शर्मा के नेतृत्व में 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन से मुंबई स्थित राजभवन में मुलाकात की और उन्हें समिति के मुंबई दौरे की जानकारी दी। इस दौरान राज्यपाल ने कहा कि उनकी शिक्षा तमिल भाषा माध्यम से नगर निगम के स्कूल में हुई है। उस समय गांव में कोई निजी स्कूल नहीं था। इसलिए उन्हें पहले हिंदी न सीख पाने का अफसोस है। लेकिन, आज तमिलनाडु में स्थिति बदल गई है। अधिकांश लोग अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों में पढ़ने भेजते हैं। उन स्कूलों में हिंदी दूसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाता है। इसलिए अब बच्चे हिंदी को अच्छी तरह समझते और बोलते हैं। उन्होंने कहा कि जब वे झारखंड के राज्यपाल थे, तब हिंदी के बिना लोगों से संवाद नहीं कर सकते थे। आज वह हिंदी बोलते है और अच्छी तरह समझते हैं। राज्यपाल ने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में उन्होंने विश्वविद्यालयों को जर्मन, जापानी, मंदारिन आदि विदेशी भाषाओं को विश्वविद्यालयों में पढ़ाने का निर्देश दिया है।
हिंदी को ‘सहकारी भाषा’ बनाने के लिए हो रहा है काम – डॉ. दिनेश शर्मा

संसदीय राजभाषा समिति के संयोजक उत्तर प्रदेश से सांसद दिनेश शर्मा ने राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को बताया कि समिति देश की क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने और हिंदी को ‘सहकारी भाषा’ के रूप में स्थापित करने के लिए काम कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में अब सारा काम हिंदी में हो रहा है। अब मराठी में लिखे पत्रों का मराठी में ही उत्तर दिया जाएगा जबकि तमिल में लिखे पत्रों का तमिल में। लेकिन, इसके साथ हिंदी अनुवाद भी दिया जाएगा। इस दौरान राजभाषा समिति के सदस्य सांसद रामचंद्र जांगड़ा (हरियाणा), सांसद राजेश वर्मा (बिहार), सांसद कृतिदेवी देवबर्मन (त्रिपुरा), सांसद किशोरी लाल शर्मा (उत्तर प्रदेश), सांसद सतपाल ब्रह्मचारी (हरियाणा), सांसद डॉ. अजीत गोपछड़े (महाराष्ट्र), सांसद विश्वेश्वर हेगड़े (कर्नाटक) और अधिकारी उपस्थित थे।
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