ये खबर आपके लिए है….
तो क्या आप के जिले में भी कहीं बिक रहा है चाइनीज लहसुन?? हो जाइये सावधान !!!!!
सूत्रों के हवाले से पुख्ता खबर है कि धल्लड्डे से चंद लालची व्यपारियों द्वारा लाया जा रहा है चाइनीज लहसुन
पुलिस प्रशासन , खाद्य प्रसंस्करण ,स्वास्थ्य विभाग सम्बंधित व्यापारियों पर कड़े एक्शन की तैयारी में...
जी हां, लगभग हर दिन किसी न किसी मित्र ,परिवार ,दूर के मित्र के परिचित या आसपास में कहीं न कहीं हृदयघात ( साइलेंट अटैक) संबंधित की सूचना सुनते ही रहते हैं जिसमें जवान से जवान लोगों की मृत्यु हो रही है। जिस तरह मिलावट का खान पान चल रहा है, उस हिसाब से अपने जीवन को खतरे में डाल रहे है।
बात करते हैं इन दिनों चाइनीज लहसुन की खूब चर्चा हो रही है। राजकोट में विरोध प्रदर्शन होने के बाद यह मुद्दा देशव्यापी हो गया।बाढ़ के प्रभाव से पहले से ही पीड़ित किसान सस्ते चीनी सीलहसुन से प्रतिस्पर्धा का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे उनकी आजीविका को खतरा है।

समझिए , बहुत बड़ी साजिश के तहत ,चीन भारतीयों को स्वास्थ्य खतरा पहुंचा कर धीमे जहर के माध्यम से अस्थिर करना चाहता है
चीन द्वारा चीनी लहसुन को भारत की अर्थव्यवस्था व भारतीय लोगो के आरोग्य को खत्म करने के लिए भारत में सस्ते दामों पर येन केन प्रकारेण घुसाया जा रहा है। विश्वसनीय सूत्रों ने पुख्ता सबूत के साथ चीन से अवैध तरिके से आयात होने वाले लहसुन के अवैध व्यापार को उजागर कर पर्दाफाश कर दिया है.विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार चीनी लहसुन वाया नेपाल, वाया ईरान अफगानिस्तान आयात किया जाता है .इसके अलावा अन्य खाद्य पदार्थों की आड़ में भी चीनी लहसुन किसी भी तरह से दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, एमपी के मंडिया जिसकी रोजी किसानो पर चलती है ऐसी मुख्य मंडिया मंदसोर, निमच, जावरा, पिपलिया, दलोदा के कुछ मुनाफा खोर व्यापारी और कुछ हद तक गुजरात के व्यापारी इस व्यापार को बढ़ावा देते है। बेंगलोर, त्रिची, कोईमबतुर, मद्रास, कोयंमबटूर ,इरोड,मदुराई, सेलम, वडगपटी जैसे सेंटर तक पहुँचता है. माल बोर्डर पास करवाने से लेकर साउथ की मंडी तक पुरा बोगस बिलिंग और हवाला के कारोबार से चल रहा है.
इस बात से कतई इंकार नही किया जा सकता कि महाराष्ट्र के सबसे नजदीक और अरब समुद्री तट से सटे हुए वलसाड जिले में भी चीनी लहसुन बेचा जा रहा है . जो संभावित स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रहा है। सरकारी तंत्र के लिए यह खोज और जांच का विषय है। प्रशासन , खाद्य प्रसंस्करण ,स्वास्थ्य विभाग सम्बंधित व्यापारियों पर कड़े कार्रवाई करे, ताकि देश विरोधी गतिविधि में लिपटे लोगो को पकड़ा जा सके.
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सवाल पूछा है कि 10 साल पहले से प्रतिबंधित उत्पाद चाइनिस लहसुन बाजार में फिर से कैसे आ गए ??
रिपोर्ट के अनुसार इस लहसुन के उपचार में मिथाइल ब्रोमाइड जैसे हानिकारक रसायनों का उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर सवाल उठाता है। मौजूदा आयात प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त सरकारी कार्रवाई की मांग बढ़ रही है।
इस बात से कतई इंकार नही किया जा सकता कि महाराष्ट्र के सबसे नजदीक और समुद्री तट से सटे हुए वलसाड जिले में भी चीनी लहसुन बेचा जा रहा है . जो मिलावट के कारण संभावित स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रहा है। सरकारी तंत्र के लिए यह खोज और जांच का विषय है।
– अमेरिकी सीनेट ने कुछ गंभीर मुद्दों का हवाला देते हुए स्वास्थ्य सुरक्षा चिंताओं के कारण चीनी लहसुन पर प्रतिबंध लगा दिया है।
– भारत ने फफूंद और कीटनाशक अवशेषों की रिपोर्ट के कारण 2014 में चीनी लहसुन के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। रिपोर्ट बताती है कि चीनी लहसुन के उपयोग से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें साइलेंट हार्ट अटैक और अन्य स्वास्थ्य संकट शामिल हैं .चाइनीज लहसुन में मानव मल का पानी के इस्तेमाल का हवाला देते हुए अमेरिका ने संसद में बैन किया।
जादवपुर विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने एक रिपोर्ट में बताया था कि चीनी लहसुन को छह महीने तक फंगल विकास को रोकने के लिए मिथाइल ब्रोमाइड युक्त कवकनाशी के साथ इलाज किया जाता है. इसके अलावा इसे हानिकारक क्लोरीन से ब्लीच किया जाता है. इससे लहसुन में लगे कीड़े मर जाते हैं. अंकुरण शीघ्र नहीं होता तथा कली सफेद एवं ताजी दिखाई देती है.
मिथाइल ब्रोमाइड आखिर होता क्या है ,इसकी जानकारी ..
मिथाइल ब्रोमाइड एक अत्यधिक जहरीली, गंधहीन, रंगहीन गैस है जिसका उपयोग कृषि और शिपिंग में कवक, खरपतवार, कीड़े, नेमाटोड (या राउंडवॉर्म) सहित विभिन्न प्रकार के कीटों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है . इसका ज्यादा इस्तेमाल सेहत के लिए बेहद खतरनाक है. यूएसईपीए के अनुसार, मिथाइल ब्रोमाइड के संपर्क से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और श्वसन विफलता और फेफड़ों, आंखों और त्वचा को नुकसान हो सकता है. इतना ही नहीं कोमा में जाने का भी खतरा रहता है ।
– बाढ़ के कारण मौजूदा कृषि संकट के बीच और अधिक वित्तीय नुकसान के डर से किसान बाजारों में चीनी लहसुन की आपूर्ति का विरोध कर रहे हैं।
– अगर बात करें तो भारतीय किसानों को इससे काफी नुकसान होगागुजरात के स्थानीय किसानों का तर्क है कि सस्ते चीनी लहसुन (₹1500-2000 प्रति क्विंटल) की उपलब्धता उनके बाजार (₹4000-5000 प्रति क्विंटल) को कमजोर करती है और उनकी आजीविका को खतरे में डालती है।
– चीनी लहसुन पर आयात प्रतिबंध को दरकिनार करने वालों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई की मांग की जा रही है।
– मिथाइल ब्रोमाइड एक रंगहीन, गंधहीन गैस है जिसका उपयोग कीटनाशक के रूप में किया जाता है जो श्वसन विफलता और कोमा सहित महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।
अभी कुछ दिन पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सवाल उठाया कि 10 साल पहले प्रतिबंधित हुए चाइनीज लहसुन अचानक बाजार में कैसे आ गए ?? तत्काल एक्शन लेते हुए डीएम को तलब कर जांच के सख्त आदेश कोर्ट द्वारा दिया गया है।
गुजरात के किसान चाइनीज लहसुन का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब भारत सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगाया हुआ है उसके बावजूद गुजरात के कई जिलों के सब्जी मार्केट में चीनी लहसुन कैसे पहुंचे यह एक बहुत बड़ा सवाल है? किसानों का आरोप है कि भारतीय बाजारों में चाइनीज लहसुन की आपूर्ति अफगानिस्तान से हो रही है। जिसके बाद किसानों ने एक बड़ा फैसला लिया है।गुजरात में किसान पहले ही बाढ़ के चलते फसलों का भारी नुकसान झेल चुके हैं। ऐसे में अगर चाइनीज लहसुन या अन्य चाइनीज सब्जियां भारतीय बाजार में आती हैं तो किसानों को और भी चपत लगेगी। आज के समय में बाजार में एक मन लहसुन की कीमत 4000 से 5000 रुपये तक है। जबकि चाइनीज लहसुन डेढ़ से दो हजार प्रति मन में मिल जाता है।
अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में चीनी लहसुन बैन है। चीन बड़े पैमाने पर लहसुन की खेती करता है। इसके बाद वह दुनिया के तमाम देशों में इसे वैध और अवैध तरीके से भेजता है।
किसानों की दलील कि राज्य में किसान पहले ही बाढ़ के चलते फसलों की भारी नुक्सान के बोझ तले दबे हुए हैं। ऐसे में अगर चाइनीज लहसुन या अन्य चाइनीज सब्जियां भारतीय बाजार में आती है तो जाहिर है किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.
