महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संगठन के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोळे की किसानों से अपील
-भारत दिघोले
नासिक। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बारिश की अनिश्चितता और सूखे जैसे हालात को देखते हुए किसानों को खेती के साथ-साथ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति का भी सावधानीपूर्वक नियोजन करना चाहिए। किसान परिवारों को पानी, फसल, उत्पादन लागत, आय, कर्ज और घरेलू खर्च—इन सभी का संतुलित प्रबंधन करने की जरूरत है। यह अपील महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संगठन के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोळे ने की है।
भारत दिघोळे ने कहा कि सूखे का असर केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि किसान परिवार की पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। ऐसे समय में उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग और भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा बेहद जरूरी है।
उपलब्ध पानी का सावधानी से उपयोग करें
किसानों को उपलब्ध पानी का नियोजन करते समय पीने के पानी, पशुओं और जरूरी फसलों को प्राथमिकता देनी चाहिए। पानी की उपलब्धता से अधिक क्षेत्र में अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसल लेने से बचना चाहिए।
उत्पादन लागत कम करना भी किसान के हाथ में है
किसान को बाजार भाव पर पूरा नियंत्रण नहीं होता, लेकिन उत्पादन लागत को नियंत्रित करने की काफी गुंजाइश होती है। बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी, सिंचाई, बिजली, डीजल और परिवहन जैसे प्रत्येक खर्च का हिसाब रखना चाहिए।कम लागत में उत्पादन और बेहतर आर्थिक नियोजन से ही वास्तविक लाभ बढ़ाया जा सकता है।
अच्छा भाव मिलने पर पूरी आय खर्च न करें
यदि प्याज या अन्य कृषि उपज का अच्छा भाव मिलता है तो पूरी आय तत्काल खर्च करने के बजाय उसका एक हिस्सा अगले सीजन की खेती, कर्ज चुकाने और आकस्मिक परिस्थितियों के लिए बचाकर रखना चाहिए। दिघोळे ने कहा कि आज की अच्छी आय को कल की जरूरतों के लिए सुरक्षित रखना भी किसान की आर्थिक ताकत है।
महंगे ब्याज वाले कर्ज से बचें
सूखे जैसी परिस्थितियों में आय अनिश्चित हो सकती है। इसलिए किसानों को अत्यधिक ब्याज दर पर निजी कर्ज लेने से यथासंभव बचना चाहिए। पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया महंगा कर्ज लेने की स्थिति पैदा न हो, इसका भी ध्यान रखना जरूरी है। कर्ज लेना आवश्यक हो तो उसकी वापसी किस आय से और कितने समय में होगी, इसका स्पष्ट हिसाब करने के बाद ही निर्णय लेना चाहिए।
घर के खर्च में भी आर्थिक अनुशासन जरूरी
सूखे का सामना केवल खेत में नहीं, बल्कि पूरे परिवार को मिलकर करना होता है। इसलिए अनावश्यक घरेलू खर्च, दिखावे और गैरजरूरी खरीदारी को नियंत्रित कर उपलब्ध आय का उपयोग आवश्यक जरूरतों और भविष्य की सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए।
प्याज की बिक्री में जल्दबाजी और अफवाहों से बचें
प्याज उत्पादक किसानों को सोशल मीडिया पर चलने वाली अपुष्ट बाजार भाव की खबरों के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए। बाजार की आवक, मांग, गुणवत्ता, भंडारण क्षमता, तत्काल आर्थिक जरूरत और आगामी खेती के खर्च को ध्यान में रखते हुए प्याज की बिक्री का नियोजन करना चाहिए।
सरकारी योजनाओं की जानकारी आधिकारिक लें
फसल बीमा, कृषि विभाग की योजनाओं, वर्षा की स्थिति, सरकारी सहायता और अन्य कृषि योजनाओं की जानकारी किसानों को संबंधित सरकारी विभागों और आधिकारिक माध्यमों से प्राप्त करनी चाहिए। अफवाहों और अपुष्ट जानकारी से बचना चाहिए।
भारत दिघोळे ने कहा कि सूखे के समय केवल फसल बचाना ही पर्याप्त नहीं है। किसान की आय, बचत, कर्ज की स्थिति और पूरे परिवार की आर्थिक सुरक्षा को बचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक किसानों के साथ-साथ सभी किसान परिवारों से अपील की कि वे पानी बचाएं, अनावश्यक खर्च कम करें, उत्पादन लागत का हिसाब रखें, आय में से बचत करें, महंगे ब्याज वाले कर्ज से बचें और उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ लें।
“संकट के समय खर्च पर नियंत्रण, बचत, सही फसल नियोजन और कर्ज के प्रति सावधानी ही किसान परिवार की आर्थिक सुरक्षा की सबसे महत्वपूर्ण नींव है।”
——-लेखक “महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संगठन” के संथापक अध्यक्ष है।
