शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ एक महानगरपालिका स्कूल को गोद लेकर उसके विकास में योगदान दें – मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा

जा. न्यूज़ संवाददाता
मुंबई : शिक्षा क्षेत्र की प्रतिष्ठित संस्थाओं, स्कूलों और शिक्षा विशेषज्ञों को अपने क्षेत्र के कम से कम एक महानगरपालिका स्कूल के विकास के लिए पहल करनी चाहिए, ऐसा आह्वान कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने किया।
एक कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। लोढ़ा ने स्पष्ट किया कि शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को केवल अपनी संस्था तक सीमित न रहते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
मंगल प्रभात लोढा ने कहा कि “अपने क्षेत्र में किसी एक महानगरपालिका स्कूल का चयन कर उसके शैक्षणिक विकास में योगदान दें। विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों का ज्ञान प्राप्त हो, इसके लिए विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं और आधुनिक शैक्षणिक सामग्री मुहैया कराएं। केवल आर्थिक सहायता देने के बजाय, अपने स्कूल के शिक्षक महीने में कम से कम एक बार उस स्कूल का दौरा करें और बेहतर शैक्षणिक एवं प्रबंधन पद्धतियों को साझा करें।”
इस अवसर पर उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कौशल विकास के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को कम उम्र से ही विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण मिलना आवश्यक है। इससे उनमें आत्मविश्वास के साथ-साथ श्रम और मेहनत करने वाले लोगों के प्रति सम्मान की भावना भी विकसित होगी। भारत में ब्लू-कॉलर कार्यों को लेकर बनी सामाजिक मानसिकता को बदलने के लिए कौशल आधारित शिक्षा एक महत्वपूर्ण माध्यम है, ऐसा उन्होंने कहा।
लोढ़ा ने यह भी रेखांकित किया कि शिक्षा केवल परीक्षा, अंक और डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कार, संस्कृति, मूल्य, विरासत और आत्मविश्वास भी शिक्षा के समान रूप से महत्वपूर्ण अंग हैं। बदलते समय के अनुरूप शिक्षा पद्धति में निरंतर परिवर्तन आवश्यक है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव हो रहे हैं, ऐसा उन्होंने कहा।
भारत की शिक्षा व्यवस्था केवल किताबी ज्ञान पर आधारित नहीं थी, बल्कि भारत में कौशल, संस्कार, श्रम की प्रतिष्ठा, संस्कृति और जीवनोपयोगी शिक्षा की समृद्ध परंपरा पहले से रही है। ब्रिटिश शासन के दौरान इस पारंपरिक शिक्षा पद्धति को कमजोर करते हुए रटने और रोजगार-केंद्रित शिक्षा को प्राथमिकता दी गई, ऐसी भूमिका मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने रखी।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारतीय शिक्षा की इस समृद्ध परंपरा को आधुनिक कौशल और तकनीक से जोड़कर फिर से सशक्त करने का प्रयास किया जा रहा है। कौशल आधारित शिक्षा, भारतीय संस्कृति, मूल्य, आत्मविश्वास और व्यावहारिक ज्ञान को शिक्षा की मुख्यधारा में लाकर ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में यह नई शिक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, ऐसा विश्वास लोढ़ा ने व्यक्त किया।
‘ड्रग-फ्री मुंबई’ के लिए आगे आएं स्कूल
विद्यार्थियों को नशे से दूर रखने के लिए अभिभावक, शिक्षक और काउंसलर मिलकर काम करें
महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने राज्य के स्कूलों से ‘ड्रग-फ्री मुंबई’ अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने और विद्यार्थियों को नशे से दूर रखने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक स्कूल में दो अभिभावकों, दो शिक्षकों और किसी सामाजिक संस्था के प्रतिनिधि अथवा काउंसलर को शामिल करते हुए एक छोटी समिति गठित की जाए। यह समिति विद्यार्थियों में कम उम्र से ही नशामुक्ति को लेकर जागरूकता पैदा करने का कार्य करे।
मंत्री लोढा ने कहा, “अभिभावक केवल अच्छे स्कूल, सुविधाएं और शिक्षा उपलब्ध करा दें, तो उनकी जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। बच्चों को माता-पिता का समय, प्रेम, स्नेह और उनके जीवन में होने वाली घटनाओं में माता-पिता की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।” उन्होंने अभिभावकों की काउंसलिंग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
लोढ़ा ने आह्वान किया कि ‘ड्रग-फ्री मुंबई’ केवल सरकार की पहल बनकर न रह जाए, बल्कि स्कूलों, शिक्षकों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयासों से खड़ा किया गया एक सामाजिक आंदोलन बनना चाहिए।
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