भारत की लिए गर्व का विषय , मुंबई से अमेरिका तक के करियर में डॉ प्रसून मिश्र ने अपनी लगन और निष्ठा से यह मुकाम हासिल किया
सैन फ्रांसिस्को/न्यूयॉर्क ,
प्रीक्लिनिकल बायोटेक कंपनी लॉन्जेविका थेराप्यूटिक्स ने पूर्व जेनेंटेक/रोश और एनआईएच के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रसून मिश्रा को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और बोर्ड सदस्य नियुक्त किया है।
कंपनी ने हाल ही में दुनिया का सबसे बड़ा स्तनधारी दीर्घायु अध्ययन पूरा किया है। यह 4 साल तक चला 13 मिलियन डॉलर का कार्यक्रम था, जो द जैक्सन लेबोरेटरी में आयोजित किया गया। इसमें 1,033 छोटी-अणु दवाओं का 16,000 से अधिक चूहों पर उनके पूरे जीवनकाल में परीक्षण किया गया।
कंपनी का दावा है कि इस अध्ययन से मिले डेटा के विश्लेषण में उम्र बढ़ने से जुड़े दो नए जैविक मैकेनिज्म की खोज हुई है। अब कंपनी इसी डेटा के आधार पर AI और कम्प्यूटेशनल केमिस्ट्री की मदद से नई दवाएं विकसित करेगी।
डॉ. मिश्रा इससे पहले जेनेंटेक, रोश, एनआईएच, एनसीआई और यूसीएसएफ जैसे संस्थानों में नेतृत्वकारी भूमिकाओं में रहे हैं। उनके नेतृत्व में 30 से अधिक रिसर्च प्रोग्राम चलाए गए, जिनमें से 12 दवाएं क्लिनिकल ट्रायल तक पहुंचीं और 4 को वैश्विक मंजूरी मिली।
संस्थापक अलेक्जेंडर चिकुनोव ने कहा कि डॉ. मिश्रा के अनुभव से कंपनी अब खोज से आगे बढ़कर दवा विकास और IND-एनेबलिंग स्टडीज की ओर तेजी से बढ़ेगी। कंपनी की योजना मेटाबोलिक डिसफंक्शन और फाइब्रोसिस जैसी उम्र-संबंधी बीमारियों के लिए फर्स्ट-इन-क्लास दवाएं बनाने और बड़ी फार्मा कंपनियों के साथ साझेदारी करने की है।

लॉन्जेविका थेराप्यूटिक्स ने डॉ. प्रसून मिश्रा को बनाया नया CEO – दुनिया के सबसे बड़े $13M लॉन्जेविटी अध्ययन को अब दवा विकास में बदलेंगे।
कंपनी ने हाल ही में द जैक्सन लेबोरेटरी में 4 साल और 13 मिलियन डॉलर की लागत से दुनिया का सबसे बड़ा स्तनधारी दीर्घायु स्क्रीनिंग प्रोग्राम पूरा किया है, जिसमें 1,003 कंपाउंड्स का 16,000 से ज्यादा चूहों पर पूरे जीवनकाल परीक्षण किया गया। इस डेटा से उम्र बढ़ने से जुड़े 2 नए मैकेनिज्म की पहचान हुई है।
इस नियुक्ति पर डॉ. प्रसून मिश्रा ने जागरण न्यूज से विचार साझा करते हुए बताया कि
“मैं सम्मानित और उत्साहित हूं कि मैं लॉन्जेविका थेराप्यूटिक्स में CEO और बोर्ड मेंबर के रूप में शामिल हुआ हूं। पिछले एक दशक में बायोफार्मा ने यह माना है कि उम्र बढ़ने के सेलुलर कारणों को टारगेट करना ही उम्र-संबंधी पुरानी बीमारियों की जड़ का इलाज है।”
“मुझे लॉन्जेविका की ओर जिस बात ने आकर्षित किया, वह है इसका बेजोड़ वैज्ञानिक आधार – 4 साल का, 13 मिलियन डॉलर का फुल-लाइफस्पैन मैमेलियन स्क्रीनिंग प्रोग्राम, जिसमें 16,000 से अधिक सब्जेक्ट्स पर 1,003 कंपाउंड्स का मूल्यांकन किया गया।”
“अब हमारा फोकस स्पष्ट है: इस विशाल डेटासेट को परिभाषित बायोलॉजिकल मैकेनिज्म और ड्रगेबल टारगेट में बदलना और हमारे स्मॉल-मॉलिक्यूल उम्मीदवारों को औपचारिक IND-एनेबलिंग स्टडीज में आगे बढ़ाना।”
वहीं कंपनी के फाउंडर अलेक्जेंडर चिकुनोव ने कहा कि डॉ. मिश्रा के 20 साल से अधिक के अनुभव, जिसमें 12 अणुओं को क्लिनिकल ट्रायल तक और 4 दवाओं को ग्लोबल अप्रूवल तक ले जाना शामिल है, से कंपनी अब डिस्कवरी से निकलकर IND और व्यावसायिक साझेदारी के चरण में प्रवेश करेगी।
