जा. न्यूज़ संवाददाता
मुंबई। मुंबई के घाटकोपर इलाके में बुधवार तड़के भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन में तीन बच्चों सहित छह लोगों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भूस्खलन की घटना तड़के तीन बजकर 48 मिनट पर चिराग नगर के अशोक नगर स्थित गौसिया मुंबई के घाटकोपर इलाके में बुधवार तड़के भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन में तीन बच्चों सहित छह लोगों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए।
बीएमसी के अधिकारियों ने बताया कि भूस्खलन की घटना तड़के तीन बजकर 48 मिनट पर चिराग नगर के अशोक नगर स्थित गौसिया चॉल में हुई। उन्होंने बताया कि पहाड़ी का एक हिस्सा और मलबा दो से तीन मकानों पर गिर गया, जिससे जान-माल का नुकसान हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि घाटकोपर स्थित बीएमसी संचालित राजावाडी अस्पताल में छह लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। अधिकारी के अनुसार मृतकों की पहचान मोहम्मद समीर अंसारी (14), साहिल हुसैन अब्दुल काजी (19), अबान आरिफ शेख (दो), मन्नत आरिफ शेख (चार) और मरजीना आरिफ शेख (27) के रूप में हुई है। एक अन्य की शिनाख्त नहीं हो पाई है।
अधिकारी ने बताया कि इस घटना में घायल हुए सोहेल अंसारी (18), मोहम्मद अंसारी (14), नईमुद्दीन इकबाल खान (28) और साजिद अंसारी (16) को कुर्ला स्थित बीएमसी संचालित भाभा अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है।
मृतकों के परिजनों को 3 लाख वित्तीय सहायता
मुंबई की महापौर रितु तावड़े भी घटनास्थल पर पहुंचीं और उन्होंने वहां जारी खोज एवं बचाव अभियान का जायजा लिया। तावड़े ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। महापौर ने प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को चार-चार लाख रुपये की तत्काल वित्तीय सहायता और प्रत्येक घायल व्यक्ति के इलाज के लिए 50,000 रुपये देने की घोषणा की।उन्होंने बचाव कार्य में लगी एजेंसियों को अपने प्रयासों को तेज करने और बेहतर समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया।प्रशासन स्थिति और बचाव अभियान पर लगातार नजर बनाए हुए है।
रास्ता संकरा होने से राहत बचाव में कठिनाई
अधिकारी ने बताया कि घटनास्थल तक पहुंचने के संकरे रास्तों ने बचाव कार्य को चुनौतीपूर्ण बना दिया। बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि भूस्खलन के दौरान विशाल चट्टानों ने कई मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। उन्होंने कहा कि घटनास्थल तक पहुंचने का रास्ता इतना संकरा है कि एक बार में केवल एक ही व्यक्ति प्रवेश कर सकता है, जिससे बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण हो गया है।उन्होंने कहा, ‘‘वहां चलने तक के लिए जगह नहीं है। एक बार में बमुश्किल एक व्यक्ति गुजर सकता है और दो लोग आमने-सामने खड़े भी नहीं हो सकते।’’अधिकारी ने बताया कि संकरी जगह के कारण मौके पर मशीनरी तैनात करने की कोई गुंजाइश नहीं है, जिससे बचाव अभियान और भी मुश्किल हो गया है।उन्होंने कहा, ‘‘महज तीन से साढ़े तीन फुट की संकरी गलियों के कारण, मलबे को ‘रेकर’ (एक तरह की क्रेन) की मदद से हटाया जा रहा है और फिर बाल्टी के सहारे हाथों से बाहर निकाला जा रहा है।’’
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