उद्धव ठाकरे की पार्टी के छह सांसद शिवसेना में शामिल
जा. न्यूज़ संवाददाता
मुंबई। सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) के सभी छह बागी लोकसभा सदस्य उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि संसदों के आधिकारिक तौर पर सत्ताधारी शिवसेना में शामिल होने के साथ ही “ऑपरेशन टाइगर अब पूरा हो गया है”। इससे उद्धव ठाकरे के गुट में एक और विभाजन की प्रक्रिया पूरी हो गई। वहीं, इसको लेकर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर एक बार फिर सवाल उठे है।
नयी दिल्ली में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की संसदीय दल की एक अहम बैठक में शामिल न होने के पांच दिन बाद, शिंदे और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में बागी सांसद शिवसेना में शामिल हुए। शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की बैठक में 9 में से केवल तीन लोकसभा सदस्य शामिल हुए थे। जो मौजूदा समय में ठाकरे के साथ हैं। पाला बदलने वाले शिवसेना (उबाठा) के लोकसभा सदस्य हैं: संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व), नागेश पाटिल-आष्टीकर (हिंगोली), ओमप्रकाश राजे निंबालकर (धाराशिव) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी)।
पाला बदलने वाले सांसद धुरंधर
शिंदे ने पाला बदलने वाले छह सांसदों को जमीन से जुड़े ‘धुरंधर’ बताते हुए कहा, “मेरा अभियान एकदम पुख्ता होते हैं”। उप मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “ऑपरेशन टाइगर” अब पूरा और सफल हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सांसदों की संख्या के हिसाब से शिवसेना अब महाराष्ट्र की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। उन्होंने 2024 के आम चुनावों में भाजपा और शिवसेना के उम्मीदवारों को हराया था। शिवसेना (उबाठा) ने 2024 के आम चुनाव में महाराष्ट्र में नौ लोकसभा सीटें जीती थीं।
ये हैं बालासाहेब ठाकरे के विचारों को मानने वाले सांसद
शिंदे ने कहा कि ये लोकसभा सदस्य अब उस असली शिवसेना में शामिल हो गए हैं, जो दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के विचारों का अनुसरण करते है। चार साल पहले मैंने एक कड़ा कदम उठाया था और अब मैंने छक्का मारा है (यह उन सांसदों की संख्या की ओर इशारा है, जिन्होंने पाला बदला है)। उन्होंने जून 2022 में अविभाजित शिवसेना में की गई अपनी बगावत का भी जिक्र किया, जिसकी वजह से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार गिर गई और वह मुख्यमंत्री बन गए। शिंदे ने कहा, “मैंने पहले (जून 2022 में शिवसेना में विभाजन) दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों और शिवसेना को बचाने के लिए ऐसा किया था। अब, यह कदम (शिवसेना उबाठा के लोकसभा सदस्यों में बगावत) शिवसेना के विस्तार का दूसरा चरण है।
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