शिंदे बने सियासी बाजीगर!

जा. न्यूज़ संवाददाता
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ यदि सफल होता है, तो इससे भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और महाराष्ट्र के सत्ताधारी महायुति गठबंधन दोनों के भीतर उनका राजनीतिक दबदबा काफी बढ़ सकता है। इससे शिंदे की सियासी मोलभाव की ताकत बढ़ जाएगी।
शिवसेना (शिंदे गुट) के पास अब तक लोकसभा में 7 सांसद थे। आने वाले दिनों में शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों का दलबदल धरातल पर उतरना तय है। ऐसे में शिंदे गुट की ताकत बढ़कर 13 सांसदों तक पहुंच सकती है। इसके बाद 13 सांसदों के साथ शिंदे की पार्टी नीतीश कुमार की जद (यू) को पीछे छोड़कर टीडीपी और टीएमसी से अलग होकर एंसीपीआई में शामिल होने वाले सांसदों के बाद संसद में एनडीए की तीसरी सबसे बड़ी सहयोगी बन जाएगी।
केंद्रीय कैबिनेट में बढ़ेगी हिस्सेदारी शिवसेना के वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि संसद में संख्या बल बढ़ने से केंद्रीय कैबिनेट में पार्टी के योगदान को पहचान मिलेगी और वे एक और कैबिनेट बर्थ (मंत्री पद) के लिए मजबूती से दावा ठोक सकेंगे। शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के और राष्ट्रीय सचिव शाइना एनसी ने हालांकि राजनीतिक दलबदल की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी का मुख्य ध्यान एनडीए को मजबूत करना है।
महाराष्ट्र की राजनीति पर असर:
विशेषज्ञों के अनुसार, इसका असर राज्य की राजनीति पर भी पड़ेगा जहां शिंदे समर्थक उन्हें फिर से मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। हालांकि, मुंबई विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर मृदुल नीले का मानना है कि केंद्र में शिंदे का प्रभाव बढ़ने के बावजूद, महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस का वर्चस्व सुरक्षित है और 2029 से पहले उनके नेतृत्व को कोई गंभीर चुनौती मिलने की संभावना नहीं है।
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